
आज के समय में फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन एक हैरान करने वाला ट्रेंड सामने आ रहा है। हजारों लोग सुबह की वॉक, जिम, पौष्टिक थाली और सुपरफूड्स के बावजूद डॉक्टरों के पास शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं कि उनका हीमोग्लोबिन स्तर बढ़ ही नहीं रहा। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या अब महामारी के रूप में उभर रही है, खासकर युवाओं और महिलाओं में।
इसे भी पढ़ें- हेल्थ टिप्स: सर्दियों में क्यों होती है ब्लड वेसल्स में एलर्जी, ये है बचाव और इलाज
हीमोग्लोबिन शरीर का वह जरूरी इंजन है, जो ऑक्सीजन को फेफड़ों से पूरे शरीर तक पहुंचाता है। इसकी कमी से थकान, चक्कर आना, चिड़चिड़ापन, कमजोरी और गंभीर मामलों में अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, लेकिन सवाल यह है कि, जब लोग सब कुछ सही कर रहे हैं, तो एनीमिया क्यों बरकरार है?
सिर्फ आयरन खाना काफी नहीं
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या क्या खा रहे हैं से ज्यादा शरीर उसमें से क्या सोख पा रहा है पर टिकी है। पालक, चुकंदर, अनार, दालें और हरी सब्जियां खाने के बावजूद आयरन ब्लडस्ट्रीम तक नहीं पहुंच पाता। इसकी मुख्य वजह विटामिन सी की कमी है क्योंकि आयरन और विटामिन सी एक-दूसरे के पूरक हैं।

विटामिन सी आयरन को ऐसे रूप में बदलता है, जिसे आंत आसानी से अवशोषित कर सके। नींबू, संतरा, आंवला या कीवी जैसे स्रोतों के बिना आयरन युक्त भोजन ज्यादातर बेकार चला जाता है। न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है कि, मैं रोज देख रही हूं कि, हेल्थ कॉन्शियस लोग आयरन सप्लीमेंट ले रहे हैं, लेकिन विटामिन सी के साथ पेयरिंग नहीं कर रहे। नतीजा रिपोर्ट में कोई सुधार नहीं।
खराब हो रहा पाचन तंत्र
आधुनिक जीवनशैली की सबसे बड़ी मार पाचन तंत्र पर पड़ रही है। गैस, एसिडिटी, कब्ज और ब्लोटिंग जैसी आम समस्याएं दरअसल आंतों की लाइनिंग को क्षति पहुंचाती हैं, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण रुक जाता है। यदि आपकी आंतों में सूजन है या पाचन रस ठीक से नहीं बन रहे, तो दुनिया का सबसे अच्छा खाना भी फायदा नहीं देगा। कई मामलों में एनीमिया की जड़ पेट की समस्या है, न कि सिर्फ आयरन की कमी
महिलाओं में खतरा दोगुना
महिलाओं में यह समस्या और गंभीर है। मासिक धर्म के दौरान खून की हानि, गर्भावस्था में बढ़ती मांग और कई बार जागरूकता की कमी के कारण वे एनीमिया की चपेट में जल्दी आ जाती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, थकान और कमजोरी को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। बी12 और फोलिक एसिड की अनदेखी महंगी पड़ रही है। एनीमिया में आयरन के अलावा विटामिन बी12 और फोलिक एसिड की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है।
शाकाहारी आहार लेने वाले लोगों में बी12 की कमी बेहद आम है, क्योंकि यह मुख्य रूप से मांसाहारी स्रोतों में पाया जाता है। इनकी कमी से हड्डी मज्जा स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाती।
चाय-कॉफी की आदत भी बन रही बाधा
एक और छिपा दुश्मन है भोजन के साथ या तुरंत बाद चाय-कॉफी पीना। इसमें मौजूद टैनिन और कैफीन आयरन के अवशोषण को 50-60 प्रतिशत तक कम कर देते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि, भोजन और चाय-कॉफी के बीच कम से कम 1-2 घंटे का अंतर रखें।
क्या करें
आयरन युक्त भोजन के साथ हमेशा विटामिन C रिच फूड लें जैसे कि, नींबू, आंवला, टमाटर आदि)।
प्रोबायोटिक्स, फाइबर युक्त भोजन और पर्याप्त पानी पिएं।
नियमित ब्लड टेस्ट करवाएं, खासकर B12, फोलिक एसिड और हीमोग्लोबिन की जांच कराएं।
अगर जरूरी हो तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें, लेकिन सिर्फ गोलियों पर निर्भर न रहें।
स्वास्थ्य सिर्फ जिम और सलाद तक सीमित नहीं है। यह शरीर की आंतरिक केमिस्ट्री को समझने और छोटी-छोटी वैज्ञानिक आदतों को अपनाने का नाम है। अगर आप सब कुछ सही कर रहे हैं फिर भी हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ रहा, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय रहते जांच करवाएं और अपनी डाइट को सही दिशा दें। जागरूकता ही सबसे बड़ा उपचार है। एक स्वस्थ शरीर न सिर्फ पोषण लेता है, बल्कि उसे सही ढंग से उपयोग भी करता है।
इसे भी पढ़ें- हेल्थ टिप्स: सर्दियों में क्यों होती है ब्लड वेसल्स में एलर्जी, ये है बचाव और इलाज



