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चीनी-प्याज से लेकर सब कुछ महंगा, RBI ने जारी किया महंगाई का अलर्ट

नई दिल्ली। देश में बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। दाल से लेकर प्याज और चीनी तक, खाने-पीने की लगभग सभी जरूरी चीजों के दाम लगातार आसमान छूते जा रहे हैं। इस बढ़ती महंगाई को लेकर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी गंभीर चिंता जताई है और आम जनता को आगाह किया है कि, आने वाले समय में उन्हें और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।

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RBI ने जारी किया मासिक बुलेटिन

आरबीआई ने 25 अगस्त को अपना मासिक बुलेटिन जारी किया, जिसमें अगस्त महीने के दौरान यह दूसरी बार है जब केंद्रीय बैंक ने कीमतों से जुड़े जोखिम को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। यह बुलेटिन RBI द्वारा नियमित रूप से जारी किया जाने वाला दस्तावेज है, जिसमें देश की समग्र आर्थिक स्थिति, महंगाई के रुझान और भविष्य की संभावित चुनौतियों का विस्तृत आकलन प्रस्तुत किया जाता है।

बुलेटिन में शामिल ‘स्टेट ऑफ द इकॉनमी’ शीर्षक वाले विशेष लेख के अनुसार, तमाम बाहरी और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद फिलहाल मजबूत बनी हुई है। हालांकि, इसी के साथ लेख में यह भी स्पष्ट रूप से आगाह किया गया है कि आने वाले समय में देश की आर्थिक वृद्धि और महंगाई दोनों को लेकर कई गंभीर जोखिम मौजूद हैं। इनमें प्रमुख रूप से सामान्य से कमजोर मॉनसून की आशंका, कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतें, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार को लेकर बनी अनिश्चितता की स्थिति शामिल हैं।

RBI ने क्या कहा 

केंद्रीय बैंक ने अपनी इस चेतावनी में स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि, खाने-पीने की चीजों से लेकर ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उत्पादन लागत यानी इनपुट कॉस्ट में हो रही लगातार बढ़ोतरी के चलते देश में एक बार फिर व्यापक स्तर पर महंगाई भड़क सकती है। यह स्थिति न सिर्फ आम उपभोक्ताओं बल्कि समूची अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

RBI

हालांकि, इसी लेख में RBI ने कुछ सकारात्मक पहलुओं का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में मजबूत घरेलू मांग बनी हुई है, औद्योगिक गतिविधियों में भी सुधार देखा जा रहा है। कंपनियों के मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो कि आर्थिक विकास के लिए सहायक साबित हो सकते हैं। बावजूद इसके, महंगाई को लेकर आरबीआई की चिंता कम नहीं हुई है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने अगस्त महीने में दूसरी बार इस मुद्दे पर सख्त चेतावनी जारी की है।

अगस्त की शुरुआत में भी दी गई थी चेतावनी

गौरतलब है कि, यह कोई पहला मौका नहीं है जब आरबीआई ने महंगाई को लेकर चिंता व्यक्त की हो। इससे पहले अगस्त महीने की शुरुआत में जब मौद्रिक नीति समिति की बैठक हुई थी, उस दौरान भी केंद्रीय बैंक ने पहली बार यह चेतावनी दी थी कि देश में खाने-पीने की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और यह चिंता का विषय है।

अब 25 अगस्त को जारी किए गए ताजा बुलेटिन में केंद्रीय बैंक ने अपनी इस चिंता को और गंभीर रूप से दोहराया है। इस बार RBI ने विशेष रूप से आगाह किया है कि, यह बढ़ती महंगाई अब सिर्फ टमाटर या प्याज जैसी कुछ चुनिंदा सब्जियों तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब इसके संकेत यह दिखा रहे हैं कि, यह समस्या धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था में व्यापक रूप से फैल सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

क्यों बढ़ रहा है महंगाई का खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल महंगाई पर सबसे ज्यादा दबाव खाने-पीने की चीजों की कीमतों की वजह से बना हुआ है। इसका असर जुलाई महीने के आंकड़ों में भी साफ तौर पर देखने को मिला था, जब खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

उपलब्ध आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि, खाने-पीने की चीजों की कीमतें महीने-दर-महीने के आधार पर लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस सूची में चावल, गेहूं, खाने का तेल और दाल जैसी रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं शामिल हैं, जिनकी कीमतों में कम-ज्यादा मात्रा में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। हालांकि, इस बीच राहत की बात यह है कि कोर महंगाई यानी खाद्य और ईंधन को छोड़कर बाकी वस्तुओं की महंगाई दर फिलहाल स्थिर बनी हुई है।

इसके साथ ही हाल के दिनों में मौसम की मार के चलते चीनी की कीमतों में भी भारी उछाल देखा गया है, जिसने आम उपभोक्ताओं की चिंता और बढ़ा दी है। मिठाई से लेकर रोजमर्रा के इस्तेमाल तक, चीनी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम घरों के बजट पर पड़ रहा है।

सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें 

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, वर्तमान समय में महंगाई का यह दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति यानी सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतों और वैश्विक स्तर पर बने भू-राजनीतिक तनावों की वजह से उत्पन्न हो रहा है। इन कारणों से न सिर्फ आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, बल्कि उनकी उत्पादन लागत में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसका सीधा बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है।

 अलनीनो भी बना बड़ी वजह

इसी बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की तरफ से भी एक चिंताजनक पूर्वानुमान जारी किया गया है। विभाग के अनुसार, अगस्त और सितंबर महीने के दौरान देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अल नीनो प्रभाव और असमान मानसून पैटर्न की वजह से देश के कृषि उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

यदि कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, तो इसका सीधा असर बाजार में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता पर पड़ेगा, जिससे खाने-पीने की चीजों से जुड़ी महंगाई का दबाव और भी अधिक बढ़ सकता है। यानी एक तरफ जहां सप्लाई चेन पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रही है, वहीं कमजोर मॉनसून की आशंका इस समस्या को और गंभीर बना सकती है।

आम आदमी पर पड़ेगा सीधा असर

RBI की इस ताजा चेतावनी से यह स्पष्ट हो रहा है कि, आने वाले महीनों में आम जनता को महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने की संभावना फिलहाल कम ही नजर आ रही है। रसोई से जुड़ी लगभग हर जरूरी चीजें जैसे चाहे अनाज हो, दाल हो, तेल हो या चीनी इन सभी की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि समय रहते सप्लाई चेन की समस्याओं को दूर करने और मौसम की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले त्योहारी सीजन में महंगाई की यह मार और अधिक गहरी हो सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों की नजरें आगामी महीनों में महंगाई के आंकड़ों और मौसम की स्थिति पर टिकी हुई हैं।

 

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