
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मंगलवार को उस समय माहौल गर्मा गया जब बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास का घेराव कर दिया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से लखनऊ पहुंचे इन युवाओं की एक ही मांग थी वह थी लाइब्रेरियन के पदों पर लंबे समय से रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि, वर्ष 2016 के बाद से प्रदेश में लाइब्रेरियन के पद पर कोई नई भर्ती नहीं निकाली गई है। इसकी वजह से हजारों प्रशिक्षित युवा दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
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पहले भी कर चुके हैं प्रदर्शन
यह कोई पहला मौका नहीं है जब इन युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई हो। इससे पहले भी कई बार युवा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के मुख्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं।

मंगलवार को जब उनकी मांगें अनसुनी होती दिखीं, तो अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए वे सीधे डिप्टी सीएम के आवास तक पहुंच गये। बड़ी संख्या में जुटे इन युवाओं ने नारेबाजी करते हुए सरकार से जल्द से जल्द वैकेंसी निकालने की मांग रखी।
अप्रशिक्षित लोग चला रहे लाइब्रेरियां
आवास के बाहर जमा प्रदर्शनकारियों ने मीडिया से बातचीत में गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि, प्रदेश की तमाम सरकारी लाइब्रेरियों का संचालन ऐसे लोगों के हाथों में है, जिनके पास इस काम के लिए जरूरी डिग्री या प्रशिक्षण तक नहीं है। इसके उलट, जिन युवाओं ने विधिवत लाइब्रेरी साइंस की डिग्री हासिल की है, वे नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपील की कि, वैकेंसी जल्द से जल्द निकाली जाए, खासतौर पर हाल ही में हुई PET-2025 (प्रारंभिक पात्रता परीक्षा) के स्कोर के आधार पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। उनका तर्क है कि, अगर ऐसा होता है तो न सिर्फ मौजूदा अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी, बल्कि आने वाले समय में भी विद्यार्थियों को लाइब्रेरी साइंस जैसे कोर्स को अपनाने का प्रोत्साहन मिलेगा।
अभ्यर्थी बोले-
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थी अमित ने अपनी बात रखते हुए बताया कि, वे और उनके साथी लंबे अरसे से लाइब्रेरियन पद की भर्ती के लिए संघर्षरत हैं। उन्होंने बताया कि, इससे पहले भी वे 14 मई, 2 जून और 19 जून 2026 को पिकप भवन (जहां UPSSSC का कार्यालय स्थित है) का घेराव कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें विभाग के सचिव से मिलने नहीं दिया गया। उनके अनुसार, मौके पर मौजूद सहायक अधिकारी ही अभ्यर्थियों से बातचीत करते हैं और उन्हें आश्वासन देकर लौटा देते हैं।

अमित ने बताया कि, विभाग की ओर से पहले उन्हें सूचित किया गया था कि करीब 362 पदों की अधियाचना (रिक्वायरमेंट) पहले से ही आयोग के पास लंबित है। इसके बावजूद हर महीने यह कहकर टाल दिया जाता है कि, अगले महीने वैकेंसी जारी कर दी जाएगी, लेकिन यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि आखिरी बार लाइब्रेरियन पद की भर्ती वर्ष 2016 में निकाली गई थी, यानी करीब एक दशक से इस क्षेत्र में कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है।
अमित के मुताबिक, वे और उनके जैसे सैकड़ों युवा विधिवत कोर्स करके डिग्री हासिल कर चुके हैं, लेकिन नौकरी न मिलने से घर की स्थिति भी दबाव में आ गई है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि घरवाले हर दिन उनसे यही सवाल पूछते हैं कि, आखिर नौकरी कब लगेगी, लेकिन उनके और उनके जैसे हजारों युवाओं के पास इस सवाल का जवाब नहीं होता।
लाइब्रेरी एक्ट का पालन न होने का आरोप
प्रदर्शन में शामिल एक अन्य अभ्यर्थी मनीष ने भी सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2006 में लाइब्रेरी एक्ट (पुस्तकालय अधिनियम) पारित किया गया था, लेकिन धरातल पर इसका पालन होता नजर नहीं आता। उनके अनुसार, प्रदेश की तमाम लाइब्रेरियां ऐसे व्यक्तियों के भरोसे चलाई जा रही हैं जिनके पास इस क्षेत्र से जुड़ी कोई औपचारिक डिग्री या प्रशिक्षण नहीं है। मनीष का कहना है कि, जिन लोगों में इस काम को संभालने की जरूरी कुशलता ही नहीं है।
वही आज लाइब्रेरियों का संचालन कर रहे हैं, जबकि प्रशिक्षित और डिग्रीधारी युवा बेरोजगार बैठे हैं। मनीष ने आगे कहा कि, जिन युवाओं ने बरसों मेहनत करके लाइब्रेरी साइंस यानी पुस्तकालय विज्ञान में डिग्री हासिल की है, नौकरी न मिलने की वजह से उनका पूरा करियर अधर में लटक गया है।

उन्होंने दो टूक शब्दों में सरकार से मांग की कि या तो प्रदेश में लाइब्रेरी साइंस जैसे कोर्स को बंद करा दिया जाए, ताकि नए विद्यार्थी इस क्षेत्र में आकर अपना भविष्य बर्बाद न करें, या फिर सरकार तुरंत नई वैकेंसी निकालकर मौजूदा डिग्रीधारकों को नौकरी का अवसर दे। मनीष ने साफ चेतावनी दी कि जब तक सरकार की ओर से नई भर्ती की घोषणा नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।
त्वरित कार्रवाई की मांग
डिप्टी सीएम के आवास के बाहर जुटे इन युवाओं में सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि प्रदेश के दूर-दराज के जिलों से आए अभ्यर्थी भी शामिल थे। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि लाइब्रेरियन भर्ती को लेकर नाराजगी सिर्फ किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थी इस मुद्दे पर एकजुट हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से अपील की कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और लंबित पदों पर जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
फिलहाल इस पूरे मामले पर डिप्टी सीएम कार्यालय या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे इसी तरह अपना विरोध जारी रखेंगे और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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