योगी का ऐलान: यूपी के निजी स्कूल शिक्षकों को भी मिलेगा कैशलेस इलाज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव आने में अभी कुछ महीनों का समय बाकी है, लेकिन प्रदेश में राजनीतिक रस्साकशी तेज हो गई है। दावों वादों की बाढ़ आ गई है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने शिक्षा क्षेत्र के लिए शानदार पहल की है। अभी तक राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ उपलब्ध करा रही थी, लेकिन अब सरकार ने इस सुविधा का दायरा बढ़ाते हुए प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी इसके दायरे में लाने की तैयारी शुरू कर दी है।

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सरकार ने मांगा आंकड़ा 

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश के करीब 35 हजार निजी स्कूलों से जुड़ा आंकड़ा सरकार ने मांग लिया है, ताकि इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को भी सरकारी शिक्षकों की तरह मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा दी जा सके। इस योजना का लाभ न सिर्फ शिक्षकों को बल्कि उनके परिवार के आश्रित सदस्यों को भी मिलेगा, जिससे लाखों परिवारों को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है।

बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश

बेसिक शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि, वे अपने-अपने क्षेत्र में स्थित प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का विधिवत पंजीकरण सुनिश्चित कराएं।

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इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए शिक्षा निदेशालय की ओर से एक निर्धारित प्रोफार्मा भी सभी जिलों को भेजा जा चुका है, जिसके आधार पर संबंधित स्कूलों से शिक्षकों की जानकारी एकत्र की जाएगी। विभाग का मानना है कि, इस तरह के सुव्यवस्थित तंत्र से डाटा संकलन में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की आशंका कम होगी।

 क्या है पूरी प्रक्रिया

सरकार ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए एक विशेष पोर्टल विकसित किया है, जिस पर कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ पाने के इच्छुक शिक्षकों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों को अपने और अपने आश्रित परिजनों से जुड़ी सभी जानकारियां आधार कार्ड में दर्ज विवरण के अनुसार ही भरनी होंगी, ताकि किसी भी तरह की विसंगति या गलत जानकारी की गुंजाइश न बचे।

यह पूरी प्रक्रिया एक बहुस्तरीय सत्यापन प्रणाली के तहत संचालित होगी। सबसे पहले शिक्षक द्वारा भरा गया आवेदन संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक के पास सत्यापन के लिए भेजा जाएगा। प्रधानाध्यापक द्वारा जानकारी की जांच और पुष्टि किए जाने के बाद यह आवेदन आगे संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी के पास भेजा जाएगा, जो इसका दोबारा परीक्षण करेंगे।

इस पूरी प्रक्रिया के अंतिम चरण में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि आवेदन को अंतिम स्वीकृति देने का अधिकार उन्हीं के पास होगा। इस तरह की बहुस्तरीय जांच प्रक्रिया अपनाए जाने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र शिक्षकों तक ही पहुंचे और किसी भी स्तर पर इसका दुरुपयोग न हो सके।

एक साल में पांच लाख तक मुफ्त इलाज

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि, इसके तहत पंजीकृत होने वाले प्रत्येक शिक्षक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम पांच लाख रुपये तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। यानी शिक्षक और उनके आश्रित परिजनों को किसी भी गंभीर बीमारी या आकस्मिक चिकित्सा जरूरत के समय अस्पताल में भर्ती होने पर अपनी जेब से पैसे खर्च करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

यह सुविधा खासतौर पर उन शिक्षक परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगी, जो अब तक महंगे इलाज के खर्च को वहन करने में आर्थिक रूप से जूझते रहे हैं। सरकारी शिक्षकों को यह सुविधा पहले से ही मिल रही है, और अब निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी इसी दायरे में शामिल किए जाने से शिक्षा क्षेत्र में एक तरह की समानता स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

बच्चों को भी मिलेगी आर्थिक मदद

शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना के साथ-साथ योगी सरकार प्रदेश के सरकारी परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए भी एक अहम योजना पर काम कर रही है। सरकार की योजना के अनुसार, प्रदेशभर के करीब 10 लाख विद्यार्थियों को ड्रेस और जूते खरीदने के लिए जल्द ही 12-12 सौ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

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यह राशि सीधे लाभार्थी विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी प्रणाली के माध्यम से भेजी जाएगी, ताकि इसमें किसी भी तरह की बिचौलियागिरी या गड़बड़ी की संभावना न रहे और पूरी राशि सीधे संबंधित परिवारों तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सके।

शिक्षकों में उत्साह

बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि, निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को लंबे समय से कैशलेस चिकित्सा सुविधा जैसी किसी भी सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था, जिसके चलते वे अक्सर स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में आर्थिक संकट का सामना करते थे। ऐसे में योगी सरकार का यह नया कदम निजी स्कूलों के शिक्षक समुदाय के बीच व्यापक स्तर पर सराहा जा रहा है। शिक्षक संगठनों की तरफ से भी इस पहल का स्वागत किया गया है और उम्मीद जताई जा रही है कि, सरकार इस योजना को जल्द से जल्द अमल में लाकर अधिक से अधिक शिक्षकों को इसका लाभ पहुंचाएगी।

 तेजी से बढ़ेगी सत्यापन प्रक्रिया

सरकार की योजना है कि, जैसे ही सभी जिलों से प्राइवेट स्कूलों और वहां कार्यरत शिक्षकों का पूरा डाटा एकत्र हो जाएगा, वैसे ही पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया को तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि पात्र शिक्षकों को जल्द से जल्द इस योजना का लाभ मिलना शुरू हो सके।

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि, आने वाले महीनों में इस योजना को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा, जिससे प्रदेश के लाखों निजी स्कूल शिक्षकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का एक मजबूत कवच मिल सकेगा। कुल मिलाकर, योगी सरकार की यह दोहरी पहल शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज और विद्यार्थियों के लिए आर्थिक सहायता प्रदेश के शिक्षा तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

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