उत्तराखंड में बड़ा हादसा: पीपलकोटी सुरंग में फंसे 22 मजदूर, 7 की मौत, CM धामी पहुंचे

देहरादून/चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले से एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ है। यहां निर्माणाधीन पीपलकोटी सुरंग में अचानक पानी और मलबा घुसने से सात मजदूरों की मौत हो गई जब 14 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए है। यह हादसा गुरुवार, 13 अगस्त की शाम एक जलविद्युत परियोजना स्थल पर उस समय हुआ, जब सुरंग के भीतर निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा था। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक और बचाव अमला मौके पर पहुंचा और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया।

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सुरंग में फंसे थे 22 मजदूर

घटना के वक्त सुरंग के भीतर कुल 22 मजदूर काम कर रहे थे, तभी अचानक से भारी मात्रा में पानी और मलबा अंदर घुस गया जिससे मजदूर अंदर ही फंस गए। बचाव दलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इनमें से 20 श्रमिकों को सुरंग से बाहर निकाल लिया गया और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने छह को मृत घोषित कर दिया। बाकी चौदह घायल श्रमिकों का इलाज शुरू हुआ।

Major accident in Uttarakhand

हादसे के वक्त सुरंग के अंदर रह गये शेष दो श्रमिकों के बारे में शुरुआत में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई थी, जिसके बाद तलाशी अभियान और तेज कर दिया गया। बाद में मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों की कुल संख्या सात तक पहुंच गई।

THDC परियोजना स्थल पर हुआ हादसा

अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा पीपलकोटी क्षेत्र में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) लिमिटेड की जलविद्युत परियोजना स्थल पर हुआ। यह सुरंग परियोजना के तहत निर्माणाधीन थी और मजदूर वहां नियमित निर्माण कार्य में जुटे हुए थे।

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घटना के वक्त अचानक जलस्रोत फूटने या रिसाव के कारण भारी मात्रा में पानी और मलबा सुरंग के भीतर प्रवेश कर गया, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई और कई श्रमिक उसकी चपेट में आ गए। हादसे के तत्काल बाद परियोजना स्थल पर हड़कंप मच गया और सुरक्षाकर्मियों व स्थानीय प्रशासन ने राहत कार्य में तेजी दिखाई।

सीएम धामी पहुंचे घटनास्थल

हादसे की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लिया और स्वयं चमोली के लिए रवाना हो गए। वे घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का प्रत्यक्ष जायजा लेंगे और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह सतर्क हो गया है और घटनास्थल पर सुरक्षा एवं व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

मृतकों में कई राज्यों के मजदूर

इस दुखद हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों में देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग शामिल हैं, जो रोजी-रोटी की तलाश में उत्तराखंड के इस दुर्गम क्षेत्र में मजदूरी करने पहुंचे थे। मृतकों में टिहरी जिले के गेंवाल गांव निवासी प्रदीप सिंह पवार, चमोली निवासी मुकेश, बिहार निवासी दुर्लभ शर्मा,  झारखंड निवासी विजय और जितेंद्र कुमार का नाम शामिल है। इसके अलावा लोकेश्वर और भुनेश्वर नामक दो अन्य मृतकों के बारे में भी जानकारी सामने आई है, हालांकि उनके पूरे परिचय और पते की पुष्टि के लिए प्रशासन अभी जानकारी जुटाने में जुटा है।

 नजदीकी अस्पताल में चल रहा इलाज

हादसे में घायल हुए 14 मजदूरों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घायलों में छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के निवासी सुनील दीवान शामिल हैं। इसके अलावा झारखंड राज्य से हाबिल गुड़िया, निस्तार भिंगरा, विनोद सावना, दीना बैगरा और खेला राम बिसरा नामक श्रमिक घायल हुए हैं। पंजाब से छब्बा सिंह, हिमाचल प्रदेश से तिलक राज, और बिहार से चन्दन कुमार, अवधेश तथा नन्दलाल भी घायलों की सूची में शामिल हैं। इनके अलावा रोहित पाण्डे तथा छत्तीसगढ़ से पेन सिंह और गोविंद भी इस हादसे में घायल हुए मजदूरों में शामिल हैं।

एक घायल डिस्चार्ज, एक श्रीनगर रेफर

राहत की बात यह है कि, घायलों में से गोविंद नामक श्रमिक की हालत स्थिर होने पर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। वहीं रोहित पांडे की चोटें अपेक्षाकृत अधिक गंभीर बताई जा रही हैं, जिसके चलते उन्हें बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर रेफर किया गया है। बाकी सभी घायल श्रमिकों का इलाज गोपेश्वर स्थित जिला अस्पताल में चल रहा है, जहां चिकित्सकों की टीम उनकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए है।

राहत-बचाव कार्य जारी

घटना के बाद से ही स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और सुरक्षा एजेंसियां लगातार मौके पर मौजूद हैं। सुरंग के भीतर से मलबा हटाने और यह सुनिश्चित करने का काम जारी है कि कोई और श्रमिक अंदर फंसा हुआ तो नहीं है। साथ ही, हादसे के कारणों की जांच के लिए भी विशेषज्ञों की एक टीम गठित किए जाने की संभावना है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरंग में पानी और मलबा किन परिस्थितियों में और क्यों घुसा।

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इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में चल रही बड़ी निर्माण परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा और सुरंग निर्माण के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ मृतकों और घायलों के परिजन भी इस हादसे से गहरे सदमे में हैं और प्रशासन से उचित मुआवजे तथा जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। फिलहाल पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल है, और सभी की निगाहें आगे की जांच रिपोर्ट तथा प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।

 

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