आयरन की कमी बन सकती है गंभीर बीमारी की वजह, जानें लक्षण, कारण और बचाव के उपाय

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग थकान, कमजोरी, चक्कर आना या सांस फूलने जैसी परेशानियों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो शरीर में दिखने वाले ये छोटे-छोटे बदलाव कई बार किसी जरूरी पोषक तत्व की कमी का संकेत हो सकते हैं। इन्हीं जरूरी पोषक तत्वों में से एक है आयरन, जो शरीर के समुचित विकास और कार्यक्षमता के लिए बेहद आवश्यक माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, अगर शरीर में आयरन की कमी हो जाए, तो इससे सिर्फ सामान्य कमजोरी ही नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, शरीर में आयरन की कमी किसी भी उम्र के व्यक्ति में हो सकती है, चाहे वह बच्चा हो, युवा हो या फिर बुजुर्ग। सबसे चिंताजनक बात यह है कि, अगर इस कमी का समय रहते सही इलाज न किया जाए, तो लंबे समय में इसका सीधा और नकारात्मक असर शरीर की समग्र कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आयरन की कमी से आखिर कौन सी गंभीर बीमारी हो सकती है, इसके पीछे के कारण क्या हैं और इसके लक्षणों को कैसे पहचाना जा सकता है।

 एनीमिया

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर शरीर में आयरन की कमी लंबे समय तक बनी रहे, तो इसके परिणामस्वरूप ‘आयरन डेफिशियेंसी एनीमिया’ यानी आयरन की कमी से होने वाला रक्ताल्पता रोग हो सकता है। दरअसल, जब शरीर में आयरन की मात्रा कम हो जाती है, तो इसका सीधा असर हीमोग्लोबिन के निर्माण पर पड़ता है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने की प्रक्रिया के लिए एक बेहद अहम तत्व माना जाता है।

IronDeficiency

गौरतलब है कि हीमोग्लोबिन एक ऐसा प्रोटीन है, जो शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं यानी रेड ब्लड सेल्स में पाया जाता है। इसका मुख्य कार्य फेफड़ों से ऑक्सीजन को अवशोषित कर शरीर के अलग-अलग हिस्सों और अंगों तक पहुंचाना होता है। जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयरन उपलब्ध नहीं होता, तो स्वस्थ रेड ब्लड सेल्स का निर्माण प्रभावित हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर की विभिन्न कोशिकाओं और अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे व्यक्ति में एनीमिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

 क्यों होती है आयरन की कमी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में आयरन की कमी होने के पीछे कई अलग-अलग कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें सबसे आम और सामान्य कारण यह है कि, व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की डाइट में पर्याप्त मात्रा में आयरन युक्त आहार शामिल नहीं करता। असंतुलित और पोषण की कमी वाला भोजन इस समस्या की सबसे बड़ी वजह माना जाता है।

इसके अलावा कुछ खास समूहों में आयरन की कमी का खतरा स्वाभाविक रूप से अधिक होता है। इनमें छोटे बच्चे, मासिक धर्म से गुजर रही महिलाएं, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं शामिल हैं, क्योंकि इन सभी स्थितियों में शरीर को सामान्य से अधिक मात्रा में आयरन की जरूरत होती है, जिसकी पूर्ति न होने पर कमी का खतरा बढ़ जाता है।

इनके अलावा कुछ अन्य चिकित्सीय कारण भी आयरन की कमी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। जैसे कि सीलिएक रोग, सूजन आंत्र रोग या पेट की किसी सर्जरी के कारण भी शरीर में आयरन के अवशोषण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके अतिरिक्त अत्यधिक मासिक धर्म रक्तस्राव, पेट या आंत में होने वाली आंतरिक ब्लीडिंग, बार-बार रक्तदान करना या किसी सर्जरी के दौरान अत्यधिक खून बहना भी शरीर में आयरन की मात्रा को तेजी से कम कर सकता है।

शुरुआत में नहीं दिखते लक्षण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो शरीर में आयरन की कमी शुरुआती चरण में हमेशा स्पष्ट और साफ लक्षणों के रूप में सामने नहीं आती। इसी वजह से अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, धीरे-धीरे व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती जैसा अनुभव होने लगता है, जो इस कमी का सबसे शुरुआती और आम संकेत माना जाता है।

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इसके अलावा सांस फूलना, बार-बार चक्कर आना, सिरदर्द बना रहना, किसी भी काम में ध्यान लगाने में परेशानी होना और सामान्य कामकाज की क्षमता में कमी आना भी आयरन की कमी के महत्वपूर्ण लक्षण हो सकते हैं। कुछ मामलों में तो व्यक्ति की त्वचा पीली पड़ने लगती है, बाल असामान्य रूप से झड़ने लगते हैं और नाखून कमजोर होकर आसानी से टूटने लगते हैं।

इतना ही नहीं, कई लोगों को हाथों और पैरों में असामान्य ठंडक या सुन्नपन जैसा अनुभव भी हो सकता है। साथ ही मुंह या जीभ से जुड़ी कुछ खास परेशानियां, जैसे जीभ में सूजन या मुंह के छाले भी आयरन की कमी के संकेत माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक बना रहे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।

 आयरन की कमी की सटीक जांच

अगर किसी व्यक्ति को अपने शरीर में आयरन की कमी से जुड़े लक्षण महसूस होते हैं, तो डॉक्टर सबसे पहले उसके स्वास्थ्य इतिहास और खान-पान की आदतों से जुड़ी विस्तृत जानकारी लेते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार वे कुछ जरूरी ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर में आयरन के स्तर का सटीक आकलन किया जा सके।

इन जांचों में मुख्य रूप से सीबीसी यानी कंप्लीट ब्लड काउंट, सीरम आयरन टेस्ट, टीआईबीसी (टोटल आयरन बाइंडिंग कैपेसिटी) और फेरिटिन टेस्ट शामिल होते हैं। ये सभी टेस्ट मिलकर यह पता लगाने में मदद करते हैं कि शरीर में आयरन की कमी किस स्तर तक है। अगर डॉक्टरों को जरूरत महसूस होती है, तो वे आयरन की कमी के पीछे के असली कारण का पता लगाने के लिए पाचन तंत्र से जुड़े अन्य विशेष टेस्ट भी करा सकते हैं, ताकि सही और प्रभावी इलाज शुरू किया जा सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते आयरन की कमी की पहचान कर ली जाए और उचित खान-पान तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सभी उम्र के लोगों को अपने खान-पान में आयरन युक्त आहार को नियमित रूप से शामिल करने और शरीर में दिखने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को गंभीरता से लेने की सलाह देते हैं।

 

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