क्या आपको भी लगती है बार-बार भूख, किस बीमारी का है संकेत और क्या है उपाय

कहीं आपको भी तो खाने के बाद भूख नहीं लग जा रही या दिन भर कुछ न कुछ खाने की इच्छा बनी रहती है, अगर ऐसा है तो इसे सामान्य समझकर नजरंदाज न करें। अक्सर ऐसा होता कि, अधिकतर लोग इसे खान-पान की आदत समझते हैं और खाते रहे रहते, लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं होता। डॉक्टर कहते हैं कि, लगातार और असामान्य रूप से बढ़ी हुई भूख कई बार शरीर में छिपी किसी गड़बड़ी या बीमारी का संकेत भी हो सकती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि, आखिर बार-बार भूख लगने के पीछे क्या कारण होते हैं, यह किन बीमारियों की ओर इशारा कर सकती है और इससे निपटने के लिए क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं।

इसे भी पढ़ें- खामोशी से दिल पर दस्तक देती है ये जानलेवा बीमारी, समय रहते जानें लक्षण और इलाज

सामान्य भूख और असामान्य भूख में फर्क

 … तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि, हर बार भूख लगना बीमारी का संकेत नहीं होता। शारीरिक श्रम, कसरत, बढ़ती उम्र में शरीर की जरूरत या कम खाना खाने की वजह से भूख का बार-बार लगना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर पर्याप्त और संतुलित भोजन करने के बाद भी बार-बार तेज भूख लग रही है।

Frequent hunger

वजन में असामान्य बदलाव आ रहा है या भूख के साथ थकान, चिड़चिड़ापन और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो यह आपके स्वस्थ्य से जुड़ा हो सकता है।

बार-बार भूख लगने के प्रमुख कारण

डायबिटीज यानी मधुमेह, एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बार-बार और तेज भूख लगना डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं, तो रक्त में मौजूद ग्लूकोज ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं हो पाता, जिससे शरीर को बार-बार भूख का अहसास होता है। इसके साथ अगर बार-बार प्यास लग रही है, बार-बार पेशाब महसूस हो रही और अचानक से वजन घटने जैसे लक्षण भी दिख रहे हैं, तो बिना देरी किये डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए जांच करवानी चाहिए।

थायरॉइड ग्रंथि की गड़बड़ी 

हाइपरथायरॉइडिज्म यानी थायरॉइड ग्रंथि के जरूरत से ज्यादा सक्रिय होने की स्थिति में शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है, जिससे शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा और भोजन की जरूरत महसूस होने लगती है। इस स्थिति में भूख बढ़ने के साथ-साथ वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना और बेचैनी जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

नींद की कमी 

पर्याप्त नींद न लेने से शरीर में भूख को कंट्रोल करने वाले दो अहम हार्मोन घ्रेलिन और लेप्टिन का संतुलन बिगड़ जाता है। नींद की कमी से घ्रेलिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे भूख बढ़ने की समस्या भी बढ़ जाती है, जबकि पेट भरे होने का अहसास कराने वाला लेप्टिन हार्मोन स्लो हो जाता है। यही वजह है कि, जिस दिन नींद पूरी नहीं होती है उसके अगले दिन ज्यादा भूख महसूस होती है।

तनाव और कॉर्टिसोल हार्मोन 

व्यक्ति जब मानसिक तनाव में होता है तो शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो भूख को उत्तेजित करता है। यही कारण है कि कई लोग तनाव या चिंता में होने पर जरूरत से ज्यादा या बार-बार खाना खाते हैं। इस आम तौर पर भावनात्मक खानपान यानी इमोशनल ईटिंग कहा जाता है।

पोषक तत्वों की कमी वाला खाना

यदि भोजन में प्रोटीन, फाइबर और स्वस्थ वसा की मात्रा कम हो और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट व शक्कर की मात्रा अधिक हो, तो पेट भरने का एहसास नहीं होता और बार-बार भूख लगने की समस्या बढ़ जाती है। ऐसा भोजन रक्त शर्करा को तेजी से बढ़ाता और फिर तेजी से गिराता है, जिससे भूख का चक्र बार-बार दोहराया जाता है।

पानी की कमी 

कई बार शरीर प्यास और भूख के संकेतों को एक जैसा महसूस करता है। ऐसे में डिहाइड्रेशन की स्थिति में भी लोग भूख समझकर बार-बार खाने लगते हैं, जबकि असल में शरीर को पानी की जरूरत होती है।

पीरियड्स से पहले 

महिलाओं में मासिक धर्म से पहले तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे भूख बढ़ जाती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव भूख और खाने की क्रेविंग को बढ़ा सकता है।

दवाओं का असर 

Frequent hunger

कुछ स्टेरॉयड, एंटी-डिप्रेसेंट और डायबिटीज की कुछ दवाएं साइड इफेक्ट के तौर पर भूख बढ़ा सकती हैं। अगर किसी दवा को शुरू करने के बाद भूख में असामान्य रूप से इजाफा होता है, तो इस बारे में डॉक्टर से जरूर डिसकस कर लेना चाहिए, नहीं तो इसके दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। 

आंतों में परजीवी संक्रमण

कुछ मामलों में आंतों में कीड़े या परजीवी संक्रमण होने पर भी शरीर को पोषक तत्व पूरी तरह नहीं मिल पाते, जिसकी वजह से बार-बार भूख का अहसास होता रहता है।  भले ही व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में भोजन कर रहा हो।

कब हो सकती है गंभीर समस्या

हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, अगर बार-बार भूख लगने के साथ कुछ और लक्षण भी दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 

ये हैं लक्षण

  • अचानक और बिना किसी कारण के वजन घटना या बढ़ना
  • लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
  • बार-बार प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना
  • हाथ-पैरों में कंपन या दिल की धड़कन तेज होना
  • नींद की गुणवत्ता में लगातार गिरावट
  • मूड में बार-बार उतार-चढ़ाव

बचाव और उपाय

बार-बार लगने वाली भूख को कंट्रोल करने के लिए एक्सपर्ट्स कुछ जरूरी सलाह दे रहे हैं। 

संतुलित आहार अपनाएं

भोजन में प्रोटीन, फाइबर और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ाएं, क्योंकि ये पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करते हैं और बार-बार भूख लगने की समस्या को कम करते हैं।

पर्याप्त पानी पिएं 

दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पियें, जिससे शरीर हमेशा हाइड्रेट रहे। कई बार शरीर डिहाइड्रेशन को भूख समझने की गलती करने लगता है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर ये गलती नहीं करेगा।

 पर्याप्त नींद लें 

रोजाना सात से आठ घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है।

तनाव को कंट्रोल करें

योग, ध्यान और नियमित व्यायाम की मदद से तनाव को नियंत्रित रखा जा सकता है, जिससे इमोशनल ईटिंग की आदत पर भी लगाम लगती है।

 समय पर भोजन करें 

लंबे समय तक भूखा रहने से बचें और दिन में तय समय पर छोटे-छोटे अंतराल पर संतुलित भोजन लेने की आदत डालें।

 नियमित जांच करवाएं

यदि भूख असामान्य रूप से बढ़ी हुई महसूस हो और यह लंबे समय तक बनी रहे, तो ब्लड शुगर, थायरॉइड और अन्य जरूरी जांचें करवाकर सही कारण का पता लगाना जरूरी है।

 बार-बार भूख लगना हमेशा चिंता की बात नहीं होती, लेकिन जब यह असामान्य स्तर पर पहुंच जाए और साथ में अन्य लक्षण भी जुड़ जाएं, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है। डायबिटीज, थायरॉइड की गड़बड़ी, नींद की कमी, तनाव और असंतुलित खानपान जैसे कारण इसके पीछे हो सकते हैं।

सही खानपान, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के जरिए इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। बहरहाल, अगर समस्या लगातार बनी रहे, तो आत्म-निदान करने के बजाय किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना सबसे बेहतर रास्ता है।

 

इसे भी पढ़ें- साइक्लोस्पोरा इन्फेक्शन: जानें क्या है यह बीमारी, कैसे फैलती है और कैसे करें बचाव

 नोट:  यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न समझा जाए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।

 

Related Articles

Back to top button