कांवड़ यात्रा में उपद्रव: स्कूल वैन पर पथराव, बच्चे दहशत में, पुलिस बोली- मामूली टक्कर

राजधानी में हुई घटना का वीडियो वायरल, अभिभावकों ने जताई नाराजगी

लखनऊ। सावन का महीना शुरू हो गया है। इसी के साथ उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से भगवान शिव के भक्त अपने आराध्य का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ लेकर निकल पड़े हैं। सावन के इस पूरे एक महीने तक मन्दिरों, घरों और सड़कों पर “बोल बम” के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहता है, लेकिन इसी धार्मिक उत्साह की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व भी सक्रिय हो जाते हैं, जो कांवड़ यात्रा के पवित्र माहौल को अपनी उपद्रवी हरकतों से बिगाड़ने की कोशिश करते हैं।

ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला राजधानी लखनऊ के चौक थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित चरक चौराहे पर सामने आया है। यहां कांवड़ियों की वेशभूषा में मौजूद कुछ युवकों ने एक स्कूल वैन पर हमला बोल दिया और उसे क्षतिग्रस्त कर दिया।

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कैसे हुई घटना की शुरुआत

जानकारी के अनुसार, चरक चौराहे पर बाइक सवार कुछ युवक कांवड़ियों के भेष में गुजर रहे थे, तभी उसी दिशा से आ रही एक स्कूली वैन से उनकी बाइक की टक्कर हो गई। टक्कर मामूली रही, लेकिन इसके बाद जो हुआ वह कहीं ज्यादा गंभीर था। दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी शुरू हुई और देखते ही देखते मामला हाथापाई और पथराव तक जा पहुंचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि, उपद्रवियों ने न सिर्फ वैन पर पत्थर बरसाए, बल्कि डंडों से भी वाहन पर वार किए, जिससे वैन के शीशे चकनाचूर हो गए।

वैन में सवार थे बच्चे

इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि, घटना के वक्त वैन में छोटे-छोटे बच्चे थे जो स्कूल जा रहे थे। अचानक हुए पथराव और शीशे टूटने की आवाज से बच्चे बुरी तरह सहम गए और दहशत में आ गए।

Kanwar Yatra

हालांकि, राहत की बात यह रही कि, इस दौरान किसी भी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन मासूमों के मन पर इस घटना का सदमा जरूर गहरा असर छोड़ गया होगा। अभिभावकों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है, क्योंकि सवाल यह उठ रहा है कि, जब बच्चों से भरी वैन सड़क पर मौजूद हो, तब भी उपद्रवियों ने संयम नहीं बरता।

भीड़ जुटते ही फरार हुए उपद्रवी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही पथराव और हंगामे की खबर आसपास फैली, राहगीरों और स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा होने लगी। भीड़ को अपनी ओर आता देख कांवड़ियों के भेष में मौजूद सभी उपद्रवी वहां से फौरन फरार हो गए। इस पूरी घटना का वीडियो किसी राहगीर ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया और प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे।

पुलिस बोली- कोई पथराव नहीं हुआ

वीडियो वायरल होने के बाद जब इस मामले में चौक थाना प्रभारी नागेश उपाध्याय से बातचीत की गई, तो उनका बयान चौंकाने वाला रहा। थाना प्रभारी ने पथराव जैसी किसी भी घटना से पूरी तरह इनकार करते हुए कहा कि स्कूल वैन और कांवड़ियों की बाइक के बीच सिर्फ एक मामूली टक्कर हुई थी। उनके अनुसार, शुरुआती कहासुनी जरूर हुई, लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच आपसी सुलह हो गई और मामला वहीं शांत होकर खत्म हो गया। पुलिस के इस बयान ने घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के दावों के ठीक विपरीत तस्वीर पेश की, जिससे लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रत्यक्षदर्शी बोले- बच्चों को दी गईं गालियां

वहीं दूसरी तरफ, घटनास्थल पर मौजूद रहने वाले मोहित कश्यप नाम के एक स्थानीय युवक ने पुलिस के दावे को सिरे से खारिज करते हुए बिल्कुल अलग कहानी बयां की। मोहित का कहना है कि, कांवड़ियों के वेश में आए उपद्रवियों ने मामूली टक्कर के बाद सिर्फ कहासुनी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने वैन में सवार मासूम बच्चों को बेहद अभद्र और गंदी भाषा में गालियां दीं। इतना ही नहीं, इसके बाद उन्होंने आपा खोते हुए वैन पर जमकर पथराव किया, जिससे वाहन के शीशे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। प्रत्यक्षदर्शी के इस बयान ने पुलिस की मामूली टक्कर वाली थ्योरी को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

सवालों के घेरे में पुलिस की भूमिका

इस पूरे प्रकरण ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान घटना की गंभीरता की पुष्टि करते नजर आ रहे हैं। वहीं पुलिस का घटना को हल्का करके पेश करना कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है। लोगों का कहना है कि, यदि सच में कोई गंभीर घटना नहीं हुई थी, तो फिर वैन के शीशे किस वजह से टूटे और बच्चे इतने भयभीत क्यों हुए, इसका जवाब पुलिस को स्पष्ट रूप से देना चाहिए।

अभिभावकों में आक्रोश

घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली है। अभिभावकों का कहना है कि, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को अधिक सजग रहने की जरूरत है। खासकर त्योहारी और यात्रा के मौसम में जब सड़कों पर भीड़भाड़ और भावनात्मक माहौल अधिक होता है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि वीडियो के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

 श्रद्धालुओं की छवि खराब करती हैं ये घटनाएं

कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक और आस्था से जुड़े अवसर पर इस तरह की उपद्रवी घटनाएं न सिर्फ श्रद्धालुओं की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि आम जनता, खासकर मासूम बच्चों की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान खड़ा करती हैं। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के परस्पर विरोधाभासी बयानों के बीच सच्चाई क्या है, यह जांच का विषय बना हुआ है। फिलहाल स्थानीय लोग इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

 

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