
आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हर किसी की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। जैसे ही सुबह आंख खुलती है हर किसी को मोबाइल चाहिए होता है या यूं कहें कि, अब सोते- जागते, उठते-बैठते यहां तक की बाथरूम में भी लोगों के हाथ में मोबाइल होता है। अब मोबाइल की स्क्रीन देखना और सुबह से लेकर रात तो उसी में डूबे रहना यह आदत अब आम बात हो गई है, लेकिन इस आदत ने एक नई स्वास्थ्य समस्या को जन्म दे दिया है, जिसे चिकित्सा जगत में ‘टेक्स्ट नेक सिंड्रोम’ के नाम से जाना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि, यह समस्या अब केवल बड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चे और किशोरों को भी अपनी चपेट में ले रही ही।
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क्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम एक ऐसी अवस्था है, जो लगातार सिर को नीचे झुकाकर मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप की स्क्रीन देखने से उत्पन्न होती है। जब व्यक्ति गर्दन को आगे की ओर झुकाकर लंबे समय तक स्क्रीन में देखता रहता है, तो गर्दन की मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डी और स्नायुबंधन यानी लिगामेंट्स पर असामान्य दबाव पड़ने लगता है।

चिकित्सक कहते हैं कि, सामान्य स्थिति में सिर का वजन लगभग पांच किलोग्राम के आसपास होता है, लेकिन जब गर्दन 60 डिग्री तक आगे झुक जाती है, तो रीढ़ पर पड़ने वाला दबाव कई गुना बढ़ जाता है। यही लगातार पड़ने वाला दबाव धीरे-धीरे गर्दन की प्राकृतिक बनावट को खराब कर देता है और फिर एक समय ऐसा आता है जब ये समस्या स्थायी रूप ले लेती है।
क्यों बढ़ रहे हैं मामले
एक्सपर्ट्स का कहना है कि, इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह है बदलती जीवनशैली। दफ्तरों में घंटों कंप्यूटर पर काम करना, बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई, सोशल मीडिया का बढ़ता चलन और मनोरंजन के लिए मोबाइल पर बिताया जाने वाला समय, इन सबने लोगों को स्क्रीन पर घंटों झुके रहने पर मजबूर कर दिया है। डॉक्टरों की मानें, तो एक औसत व्यक्ति दिनभर में कई घंटे मोबाइल स्क्रीन देखने में बिताता है। इस दौरान उसकी गर्दन झुकी ही रहती है।
प्रमुख लक्षण
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के लक्षण शुरुआत में मामूली लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले सकते हैं। ऐसे में इन्हें नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए
गर्दन में दर्द और अकड़न
यह सबसे आम और शुरुआती लक्षण है, जो अक्सर दिन के अंत तक बढ़ जाता है।
कंधों और पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द
गर्दन की मांसपेशियों पर दबाव कंधों तक फैल जाता है।
सिरदर्द
खासकर सिर के पिछले हिस्से से शुरू होकर माथे तक फैलने वाला दर्द।
हाथों में झनझनाहट या सुन्नपन
गर्दन की नसों पर दबाव पड़ने से यह लक्षण दिखाई देता है।
गर्दन की गति सीमित होना
गर्दन को घुमाने या झुकाने में कठिनाई महसूस होना।
मुद्रा में बदलाव
कंधे आगे की ओर झुकना और पीठ का कूबड़ जैसा आकार लेना।
थकान और नींद में गड़बड़ी
लगातार दर्द के कारण नींद प्रभावित होती है, जिससे दिनभर थकान महसूस होती है।

डॉक्टरों का कहना है कि, अगर इन लक्षणों अनदेखा किया जाता है तो आगे चलकर यह गर्दन की डिस्क खिसकने, रीढ़ की हड्डी के आर्थराइटिस और स्थायी मुद्रा दोष जैसी गंभीर समस्याओं का रूप ले सकता है।
किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा?
- यह समस्या अब हर आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही है, लेकिन कुछ समूह विशेष रूप से जोखिम में हैं।
- लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करने वाले दफ्तर के कर्मचारी
- ऑनलाइन क्लास और मोबाइल गेमिंग में घंटों बिताने वाले छात्र और बच्चे
- सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर अत्यधिक समय बिताने वाले युवा
- ड्राइविंग के दौरान बार-बार मोबाइल देखने वाले लोग
बचाव के उपाय
राहत की बात यह है कि सही आदतों को अपनाकर टेक्स्ट नेक सिंड्रोम से बचा जा सकता है। इसके लिए हेल्थ एक्सपर्ट्स कुछ खास तरह की सलाह दे रहे हैं
स्क्रीन को आंखों की सीध में रखें
मोबाइल या लैपटॉप को नीचे की ओर देखने के बजाय आंखों के स्तर तक ऊपर उठाकर देखें, ताकि गर्दन झुकाने की जरूरत न पड़े।
नियमित ब्रेक लें
हर 20-30 मिनट में स्क्रीन से नजर हटाकर गर्दन और कंधों को हल्का घुमाएं। 20-20-20 नियम अपनाना फायदेमंद रहता है, यानी हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें।
सही मुद्रा अपनाएं
बैठते समय पीठ सीधी रखें, कंधे तने हुए हों और गर्दन सीधी स्थिति में रहे। कुर्सी और डेस्क की ऊंचाई ऐसी हो कि झुकना न पड़े।4.
मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करें
खासकर सोने से पहले और लेटकर मोबाइल देखने की आदत से बचें, क्योंकि इस मुद्रा में गर्दन पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है।
गर्दन और कंधों की एक्सरसाइज करें
नियमित रूप से गर्दन को धीरे-धीरे घुमाना, कंधों को ऊपर-नीचे करना और हल्की स्ट्रेचिंग करना मांसपेशियों को लचीला बनाए रखता है।
एर्गोनॉमिक सहायक उपकरणों का प्रयोग करें
लैपटॉप स्टैंड, अलग से कीबोर्ड और सही ऊंचाई की कुर्सी का इस्तेमाल मुद्रा सुधारने में मदद करता है।
बच्चों की स्क्रीन टाइम पर नजर रखें
अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों के मोबाइल और टैबलेट इस्तेमाल के समय को सीमित करें और उन्हें सही मुद्रा में बैठने की आदत सिखाएं।
उपचार के विकल्प
यदि टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के लक्षण गंभीर हो जाएं, तो चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी हो जाता है। डॉक्टर आमतौर पर ये इलाज बताते हैं
फिजियोथेरेपी
गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और लचीलापन बढ़ाने के लिए विशेष व्यायाम।
दर्द निवारक दवाएं
अत्यधिक दर्द की स्थिति में डॉक्टर की सलाह पर सीमित समय के लिए दवाएं।
हीट या कोल्ड थेरेपी
सूजन और अकड़न कम करने के लिए गर्म या ठंडी सिकाई।
मसाज थेरेपी
मांसपेशियों में तनाव कम करने के लिए मसाज थेरेपी।
गंभीर मामलों में विशेषज्ञ परामर्श
यदि नसों में दबाव या डिस्क संबंधी समस्या हो, तो हड्डी रोग विशेषज्ञ (ऑर्थोपेडिक) या न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह आवश्यक हो जाती है।
विशेषज्ञों की मानें तो टेक्स्ट नेक सिंड्रोम कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिससे बचा न जा सके। यह पूरी तरह से हमारी दैनिक आदतों से जुड़ी समस्या है और जागरूकता व सही मुद्रा अपनाकर इसे रोका जा सकता है। डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल को पूरी तरह छोड़ना संभव नहीं, लेकिन उन्हें सही तरीके से और सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना जरूर हमारे हाथ में है। समय रहते सतर्क हो जाना ही इस आधुनिक स्वास्थ्य समस्या से बचने का सबसे कारगर उपाय है।
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नोट_ यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।



