
आज के दौर में उपवास सिर्फ धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रह गया है। अब बड़ी संख्या में लोग अपनी सेहत और फिटनेस को बेहतर बनाने के लिए हफ्ते में एक दिन उपवास रखना पसंद कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि, एक निश्चित समय तक खान-पान से दूरी बनाने से पाचन तंत्र को थोड़ा आराम मिल सकता है। साथ ही यह खानपान पर नियंत्रण बनाए रखने में भी मददगार साबित हो सकता है। हालांकि, उपवास हर व्यक्ति पर एक जैसा असर नहीं डालता, इसलिए इसके फायदों को समझने के साथ-साथ जरूरी सावधानियों के बारे में भी जानकारी होती है।
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पाचन तंत्र को मिलती है राहत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति सही और संतुलित तरीके से सप्ताह में एक दिन उपवास रखता है, तो इससे पाचन तंत्र को कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है। कई लोगों में यह देखा गया है कि, उपवास रखने से कैलोरी सेवन पर स्वाभाविक रूप से नियंत्रण बना रहता है, जिससे वजन प्रबंधन में मदद मिलती है।

उपवास के दौरान अधिकतर लोग स्वाभाविक रूप से तले-भुने और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन से दूरी बना लेते हैं, जिसका सीधा असर उनकी खानपान की आदतों पर पड़ता है, जिसका सकारात्मक असर उनकी सेहत पर पड़ता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि, कुछ खास तरीकों से किया गया उपवास, जिसे इंटरमिटेंट फास्टिंग भी कहा जाता है, ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी रहता है कि, इन फायदों को हासिल करने के लिए केवल उपवास रखना ही काफी नहीं है, बल्कि इसके साथ पौष्टिक भोजन और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी बेहद आवश्यक है।
शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी
उपवास को लेकर विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि, पूरे दिन पानी न पीना या जरूरत से ज्यादा भूखे भी नहीं रहना चाहिए। शरीर को पूरे दिन हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी होता है और इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए। अगर किसी का उपवास इसकी अनुमति देता है, तो इस दौरान फल, दही, दूध, मेवे और हल्के पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भी अपने खाने पीने में शामिल कर लेना चाहिए, जिससे शरीर को जरूरी ऊर्जा और पोषण मिलता रहे।
यहां इस बात का भी DHY उपवास खोलते समय एक साथ बहुत ज्यादा भोजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि लंबे समय बाद अचानक भारी भोजन करने से पाचन संबंधी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं। इसके साथ ही चाय, कॉफी, मीठे पेय पदार्थों और तले हुए खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन भी फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए इन चीजों के सेवन में भी संयम बरतना जरूरी है।
ये लोग न रखें उपवास
विशेषज्ञों का कहना है कि, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को बिना डॉक्टर की सलाह के उपवास नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा टाइप-वन डायबिटीज या किसी अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए भी बिना चिकित्सकीय परामर्श के उपवास रखना जोखिम भरा हो सकता है।
जो लोग नियमित रूप से कोई दवा लेते हैं, उन्हें भी उपवास शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि खाली पेट कुछ दवाओं का असर बदल सकता है। विशेषज्ञों की यह भी सलाह है कि यदि उपवास के दौरान किसी व्यक्ति को चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, अत्यधिक थकान या ब्लड शुगर कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत अपना उपवास तोड़ देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि, सही तरीके से और संतुलित आहार के साथ किया गया उपवास कुछ लोगों के लिए निश्चित रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। यह पाचन तंत्र को आराम देने से लेकर वजन प्रबंधन और बेहतर खानपान की आदतें विकसित करने तक, कई तरह से मददगार हो सकता है।
विशेषज्ञ से लें सलाह
हालांकि, इसके साथ ही यह समझना भी उतना ही जरूरी है कि, उपवास को हर व्यक्ति के लिए एक समान और सार्वभौमिक स्वास्थ्य उपाय नहीं माना जा सकता। हर इंसान का शरीर, उसकी सेहत की स्थिति और उसकी जरूरतें अलग-अलग होती हैं, इसलिए किसी भी तरह का उपवास शुरू करने से पहले अपनी व्यक्तिगत स्थिति को समझना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे बेहतर तरीका माना जाता है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो हफ्ते में एक दिन उपवास रखना कई लोगों के लिए सेहत के लिहाज से लाभकारी साबित हो सकता है, बशर्ते इसे सही तरीके से और जरूरी सावधानियों को ध्यान में रखते हुए किया जाए। शरीर को पर्याप्त हाइड्रेशन देना, पौष्टिक आहार का चुनाव करना और अपने शरीर के संकेतों को समझना, यह सभी बातें उपवास को सुरक्षित और असरदार बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। खासतौर पर बीमार, गर्भवती, बुजुर्ग या दवा लेने वाले लोगों को बिना डॉक्टरी सलाह के इस तरह के किसी भी प्रयोग से बचना चाहिए, ताकि सेहत सुधारने की कोशिश किसी नुकसान का कारण न बन जाए।
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