
रियलिटी शोज का दौर अब उस मोड़ पर आ गया है जहां हर नया शो देखते वक्त दर्शक के मन में पहला सवाल यही उठता है, यार, यह पहले वाले से अलग कैसे होगा? प्राइम वीडियो ने इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए अपनी नई रियलिटी सीरीज ‘Alliance’ लॉन्च की है। इस शो में 16 खिलाड़ी एक अंडरग्राउंड बंकर में 42 दिनों तक दोस्ती, गद्दारी और रणनीति का खेल खेलेंगे। मजेदार बात यह है कि, यह शो नेटफ्लिक्स के ‘लॉक अप 2’ के साथ सीधे टक्कर में उतरा है। शुरुआती तीन एपिसोड्स देखने के बाद यह तस्वीर साफ हो गई है कि ‘Alliance’ का आइडिया और गेम का ढांचा तो दमदार है, लेकिन कंटेस्टेंट्स का रवैया देखकर बार-बार ‘बिग बॉस’ की पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। आइए 5 हिट और 5 मिस के जरिये समझते हैं कि यह शो कहां चमका और कहां धोखा दे गया।
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ये 5 चीजें रहीं एकदम HIT
कुणाल खेमू की कूल और कमाल होस्टिंग
इस पूरे शो का सबसे बड़ा सरप्राइज पैकेज खुद एक्टर कुणाल खेमू हैं। रियलिटी टीवी में होस्ट का मतलब आमतौर पर जरूरत से ज्यादा चीखना, चिल्लाना और ओवर-एक्टिंग होता है, लेकिन कुणाल यहां बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं।

वे बंकर के अंदर ‘कुणाल लोक’ के राजा बनकर आए हैं और बिना किसी फालतू ड्रामे के कंटेस्टेंट्स की हरकतों पर मजेदार और चुटीले तंज कसते हैं। उनकी रिलैक्स्ड स्टाइल और नेचुरल कमेंट्री शो को एक अलग ही ताजगी देती है। कुणाल का यह अवतार दर्शकों को पसंद आ रहा है और यही इस शो की सबसे बड़ी जीत है।
रोटेशन पॉलिसी
‘Alliance’ का गेम स्ट्रक्चर वाकई में इस भीड़भाड़ वाले रियलिटी स्पेस में एक ताजा हवा की तरह है। बाकी शोज में जो चेहरे पहले दिन घर में घुसते हैं, वही फिनाले तक खिंचते चले जाते हैं और शो धीरे-धीरे बोरिंग होता जाता है, लेकिन ‘Alliance’ में ऐसा नहीं होगा। यहां जो भी कंटेस्टेंट एलिमिनेट होगा, उसकी जगह तुरंत एक नया चेहरा बंकर में एंट्री लेगा ताकि खिलाड़ियों की संख्या हमेशा 16 बनी रहे। इस रोटेशन पॉलिसी से बंकर के अंदर के समीकरण पल-पल बदलते रहेंगे और दर्शकों की दिलचस्पी बनी रहेगी। यह दांव अगर सही तरीके से खेला गया तो शो को लंबे समय तक रोचक बनाए रख सकता है।
रवि किशन और बेटी का इमोशनल एंगल
भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार रवि किशन और उनकी बेटी रीवा की जोड़ी इस शो का सबसे इमोशनल और दिलचस्प हाईपॉइंट बनकर उभरी है। रवि किशन पूरे जोश और जिद के साथ आए हैं कि, वे अपनी बेटी को यह गेम जिताकर रहेंगे, जबकि रीवा के लिए यह मौका पिता के साथ ज्यादा वक्त बिताने का भी है। बाकी के युवा कंटेस्टेंट्स रवि किशन के कड़क और अनुभवी तेवरों से सहमे भी हैं और उनके स्टारडम के कायल भी दिखते हैं। यह बाप-बेटी की केमिस्ट्री शो में एक असली और दिल को छूने वाला रंग भरती है।
पुरानी हिस्ट्री और नया ड्रामा
जब कुशाल टंडन और अर्सलान गोनी ने दोनों भाई, दोनों तबाही स्टाइल में बंकर में एंट्री ली तो माहौल में तुरंत एक अलग ही करंट दौड़ गया। इसकी असली वजह है कुशाल टंडन का पुराना किस्सा, कुशाल की एक्स-गर्लफ्रेंड गौहर खान अब जैद दरबार की पत्नी हैं। जब बंकर में जैद और कुशाल का आमना-सामना हुआ, तो जैद के चेहरे पर जो बेचैनी और असहजता झलकी, वह कैमरे से छुप नहीं पाई। और दर्शक? वे तो बस इसी मसाले का इंतजार कर रहे थे।
वफादारी से बड़ा गेम
शुरुआती एपिसोड्स में ही एक कंटेस्टेंट ने टीम की झूठी कसमों और बनावटी दोस्ती को परे रखकर सीधे अपने गेम को चुना और एक बड़ा और अनप्रेडिक्टेबल रिस्क ले लिया, जहां बाकी सब सेफ खेलने में व्यस्त थे, वहीं इस एक फैसले ने पूरी टीम की बाजी पलट दी। रियलिटी शोज में इसी तरह के सनकी और अचानक आने वाले फैसलों की जरूरत होती है जो दर्शकों की नींद उड़ा सकें। यह पल शो का अब तक का सबसे एक्साइटिंग मोमेंट रहा।
ये 5 चीजें रहीं मिस
घिसा-पिटा कंटेंट
गेम का फॉर्मेट भले ही नया और दमदार हो, लेकिन कंटेस्टेंट्स का बर्ताव वही सदियों पुराना है। ऐसा लगता है कि, सभी खिलाड़ी बाहर से पूरी तैयारी करके और रट्टा मारकर आए हैं कि, कैमरा देखते ही कैसे फुटेज खानी है। बंकर में घुसते ही वही पुरानी गॉसिप, गाली-गलौज, गर्ल पावर के खोखले नारे और एज-शेमिंग शुरू हो गई। यह सब इतना ज्यादा देखा-देखाया और बोरिंग लगता है कि रिमोट का बंद बटन दबाने का मन करता है।
पुराने दिग्गज फुस्स
निखिल चिनप्पा और मिनी माथुर जैसे टीवी के माने हुए और अनुभवी नामों को देखकर शुरुआत में काफी उत्साह था, लेकिन जैसे ही गेम का असली चक्कर शुरू हुआ, इन दोनों की हवा निकल गई।

सोशल मीडिया की नई और शोर मचाने वाली पीढ़ी के सामने ये पुराने और अनुभवी महारथी अपनी जगह बनाने में पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। उनसे जो उम्मीदें थीं, वे फिलहाल पूरी नहीं हो पाई हैं।
सोशल मीडिया स्टार्स का शोर
पायल धारे यानी पायल गेमिंग को लेकर उत्सुकता तो थी, लेकिन डॉली जावेद और वंशज सिंह जैसे कंटेस्टेंट्स बस स्क्रीन पर दिखने की भूख में जरूरत से ज्यादा लाउड और बेवजह चिल्लाते नजर आ रहे हैं। हर छोटी बात पर अपनी बड़ी राय थोपना और बिना वजह दूसरों को जज करना शो को रोचक बनाने के बजाय सिरदर्द में बदल देता है।
बनावटी दोस्ती के दावे
जैद दरबार और डेज़ी शाह का यह दावा कि, वे बिना शब्दों के एक-दूसरे को समझते हैं और नीती टेलर-रूही दोसानी का अपने बॉन्ड को लेकर बार-बार बड़ी-बड़ी बातें करना बेहद बनावटी और स्क्रिप्टेड लगता है। दर्शक अब इतने समझदार हो चुके हैं कि उन्हें असली दोस्ती और कैमरे के लिए रची गई दोस्ती का फर्क पल भर में समझ आ जाता है।
डेली हुक गायब
यह एक डेली शो है, इसलिए हर एपिसोड के अंत में एक ऐसा सस्पेंस या हुक होना चाहिए जो दर्शक को अगले दिन दोबारा स्क्रीन के सामने बैठने पर मजबूर कर दे, लेकिन ‘Alliance’ के शुरुआती तीन एपिसोड्स देखने के बाद भी वह असली रोमांच और पागलपन बंकर के अंदर दाखिल नहीं हो पाया। शो का कॉन्सेप्ट बेहतरीन है, गेम का ढांचा नया है, लेकिन अभी कंटेस्टेंट्स में वह चिंगारी नदारद है जो किसी शो को सच में ब्लॉकबस्टर बनाती है।


