बैरागीवाला हत्याकांड: सीएम धामी से मिला पीड़ित परिवार, लगाई मदद की गुहार

देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून जिले के बैरागीवाला गांव में 13 जून को हुए एक दर्दनाक हत्याकांड का मामला अब सीधे मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंच गया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया था और अब पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लेकर राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंचा है।

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सरकारी नौकरी और न्याय की मांग

आज बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री धामी के देहरादून स्थित कैम्प कार्यालय पर जाकर उनसे मुलाकात की और न्याय की गुहार लगाई।  इसके साथ ही परिवार ने आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की।

Bairagiwala massacre

यह मुलाकात किसी एक नेता की पहल नहीं थी, बल्कि यह एक सामूहिक और संगठित प्रयास था जो पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में उठाया गया। इस महत्वपूर्ण मुलाकात का नेतृत्व भाजपा देहरादून ग्रामीण की जिलाध्यक्ष मीता सिंह और नगर पालिका अध्यक्ष नीरू देवी ने सामूहिक रूप से किया।

उनके साथ पूर्व जिलाध्यक्ष संजय गुप्ता और ओबीसी मोर्चा के प्रदेश मंत्री नीरज कश्यप भी पूरी तत्परता के साथ उपस्थित रहे। इन सभी नेताओं ने पीड़ित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मुख्यमंत्री के समक्ष उनकी पीड़ा, मांगें और उनकी बेबसी रखी। परिवार के सदस्य भी इस मुलाकात के दौरान स्वयं उपस्थित थे ताकि वे अपनी तकलीफ सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा सकें।

क्या था बैरागीवाला हत्याकांड

ओबीसी मोर्चा प्रदेश मंत्री नीरज कश्यप ने मुख्यमंत्री को पत्र सौंपते हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तृत और तथ्यपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि, 13 जून को बैरागीवाला गांव में एक अत्यंत भयावह घटना घटित हुई। गांव के कुछ मुस्लिम ने भगवत प्रसाद के घर पर धावा बोल दिया। इस जानलेवा हमले में न केवल घर को निशाना बनाया गया, बल्कि परिवार के सदस्यों पर भी क्रूर आक्रमण किया गया। इस हमले में भगवत प्रसाद के पुत्र विनोद कुमार की निर्मम हत्या कर दी गई।

यह घटना न केवल पीड़ादायक है, बल्कि इस पूरे परिवार को रातोंरात बेसहारा कर दिया। विनोद कुमार अपने पीछे अपने वृद्ध माता-पिता, अपनी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं। परिवार के ये सभी सदस्य पूरी तरह से विनोद कुमार पर आश्रित थे। वही इस पूरे परिवार का एकमात्र सहारा, एकमात्र कमाने वाले और एकमात्र आधार थे। विनोद की मौत से परिवार के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।

असहाय हो गया है परिवार

विनोद कुमार की हत्या के बाद उनके परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय, दर्दनाक और असहाय हो गई है। बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए कोई नहीं रहा, पत्नी के भरण-पोषण का कोई जरिया नहीं बचा और दो छोटे बच्चों के भविष्य पर अंधेरा छा गया है। परिवार के पास आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है, कोई दूसरा कमाने वाला नहीं है और कोई सहारा नहीं है।

ऐसे विकट और असहाय समय में जब परिवार टूटा हुआ था और दिशाहीन था, तब भाजपा के स्थानीय नेताओं ने पहल की और परिवार को न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री तक पहुंचने में मदद की। यह कदम न केवल राजनीतिक संवेदनशीलता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पीड़ित परिवार पूरी तरह अकेला नहीं है।

मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान जिलाध्यक्ष मीता सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष नीरू देवी, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय गुप्ता और प्रदेश मंत्री नीरज कश्यप ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के सामने कई महत्वपूर्ण मांगे रखीं।

आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग

पहली और तत्काल मांग यह थी कि पीड़ित परिवार को बिना किसी देरी के पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि परिवार इस गहरे संकट की घड़ी में अपना दैनिक जीवनयापन कर सके और बच्चों की परवरिश में कोई बाधा न आए।

Bairagiwala massacre B

दूसरी मांग यह थी कि, मृतक विनोद कुमार की पत्नी को मृतक आश्रित के रूप में बैरागीवाला गांव स्थित सरकारी विद्यालय में सरकारी नौकरी प्रदान की जाए। यह मांग इसलिए भी उचित है क्योंकि परिवार की पूरी जिम्मेदारी अब उन्हीं के कंधों पर आ गई है। सरकारी नौकरी मिलने से न केवल परिवार को आर्थिक सहारा मिलेगा, बल्कि बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित हो सकेगा और वृद्ध माता-पिता की देखभाल भी संभव हो सकेगी।

तीसरी मांग है कि, हत्याकांड के जो आरोपी घटना के बाद से अब तक फरार हैं, उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि, पीड़ित परिवार को न्याय तभी मिलेगा जब दोषियों को सजा मिलेगी।

 सीएम धामी ने दिया आश्वासन

मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार की पूरी बात अत्यंत ध्यान और संवेदनशीलता के साथ सुनी। उन्होंने परिवार को पूर्ण आश्वासन दिया कि यथासंभव शीघ्र मदद की जाएगी। सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि, हत्याकांड के जो आरोपी अभी तक फरार हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता के साथ करेगा।

मुख्यमंत्री के इस आश्वासन से पीड़ित परिवार को कुछ राहत और उम्मीद की किरण जरूर मिली है, लेकिन परिवार की असली राहत और वास्तविक न्याय तभी संभव होगा जब फरार आरोपी गिरफ्तार हों, अदालत में दोषी सिद्ध होकर सजा पायें और परिवार को सरकारी सहायता वास्तव में और समय पर मिले।

 

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