
नई दिल्ली। केंद्रीय राजनीति में इन दिनों हलचल तेज़ हो गई है। गुरुवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल और विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं ज़ोर पकड़ रही हैं। इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रपति मुर्मू से मिल चुके हैं। दो दिनों के भीतर देश के दो सबसे बड़े संवैधानिक पदाधिकारियों की इन अहम मुलाकातों ने मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों को और हवा दे दी है।
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सोशल मीडिया पर आई तस्वीर
राष्ट्रपति भवन ने इस मुलाकात की आधिकारिक पुष्टि करते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक पर बैठक की तस्वीर साझा की। साथ में कैप्शन में लिखा, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। हालांकि, इस बैठक का कोई आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया से जोड़कर देखा। यह कोई सामान्य सौजन्य मुलाकात नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में देखी जा रही है।

राजनीतिक दृष्टि से यह बात बेहद महत्वपूर्ण है कि, महज दो दिनों के अंतराल में पहले प्रधानमंत्री मोदी और फिर गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति से अलग-अलग मुलाकात की। भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में मंत्रिमंडल के गठन या विस्तार के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी ज़रूरी होती है। ऐसे में यदि मंत्रिपरिषद में किसी प्रकार का फेरबदल होना हो, तो इस तरह की उच्चस्तरीय मुलाकातें स्वाभाविक रूप से उससे पहले होती हैं, इसीलिए राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, ये दोनों मुलाकातें महज औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाले किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका हो सकती हैं।
बीजेपी नेता ने दिया इस्तीफा
मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं की एक बड़ी वजह केरल से भाजपा के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन का मंत्रिपरिषद से इस्तीफा भी है। कुरियन केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री का दायित्व भी संभाल रहे थे।
उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया और पार्टी ने उन्हें उच्च सदन के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के कारण उन्हें मंत्रिपद से इस्तीफा देना पड़ा। उनके जाने से मंत्रिपरिषद में कम से कम एक महत्वपूर्ण पद रिक्त हो गया है, जिसे भरने के लिए नई नियुक्ति अनिवार्य है।

जॉर्ज कुरियन के अलावा रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की स्थिति भी अनिश्चितता के दौर से गुज़र रही है। वह रेल मंत्रालय के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे हैं। रवनीत सिंह अगस्त 2024 में राजस्थान से राज्यसभा के लिए चुने गए थे, लेकिन उनका कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है और उन्हें भी उच्च सदन के लिए दोबारा नामित नहीं किया गया है। ऐसे में उनके मंत्री पद पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इन दोनों मंत्रियों के पद रिक्त होने या अनिश्चित होने की वजह से मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल की ज़रूरत और भी प्रबल हो गई है।
नए चेहरों को मिल सकती है जगह
मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं को और अधिक बल देने वाली एक और बात यह है कि हाल के दिनों में कुछ केंद्रीय मंत्रियों को उनके गृह राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। भाजपा में यह एक जानी-मानी रणनीति रही है, जब किसी नेता को मंत्रिमंडल में बदलाव से पहले संगठन में समायोजित करना हो, तो उसे पहले पार्टी की ज़िम्मेदारी दी जाती है, इसीलिए राजनीतिक विश्लेषक इन संगठनात्मक बदलावों को भी मंत्रिमंडल फेरबदल के संकेत के रूप में देख रहे हैं। यदि कुछ मंत्रियों को संगठन की तरफ भेजा जाता है, तो उनकी जगह नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा।

फिलहाल सरकार की तरफ से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन परिस्थितियां खुद बहुत कुछ कह रही हैं। पीएम मोदी और अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात, दो मंत्रियों के पद रिक्त होना और कुछ मंत्रियों को संगठनात्मक दायित्व मिलना, ये सभी संकेत मिलकर यही बता रहे हैं कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में जल्द ही कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री मोदी इस बार मंत्रिपरिषद में किन नए चेहरों को जगह देते हैं और किन पुराने मंत्रियों की भूमिका में बदलाव होता है। राजनीतिक हलकों में इस फैसले का बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है।
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