
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी में बड़े संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी तेजी से चल रही है। पार्टी से आने वाली अंदरूनी खबरों की मानें तो आने वाले दिनों में कांग्रेस कमेटी से लेकर राज्य स्तर तक बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाएंगे। चार महासचिवों की छुट्टी होगी, छह से सात राज्यों के प्रभारी बदले जाएंगे, तीन से चार राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष हटाए जाएंगे और करीब 26 राष्ट्रीय सचिवों को भी उनके पद से मुक्त किया जाएगा। यह फेरबदल आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी संगठन को नई ऊर्जा और नई दिशा देने के मकसद से किए जा रहे हैं।
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कांग्रेस फिलहाल संगठनात्मक रूप से कई मोर्चों पर दबाव में है। एक तरफ पार्टी के भीतर गुटबाजी की समस्या लगातार बनी हुई है, तो दूसरी तरफ 2027 में उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संगठन चुनाव से पहले पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त हो और जमीनी स्तर पर मजबूत हो। इसी सोच के साथ यह बड़ा संगठनात्मक उलटफेर किया जा रहा है।
चार महासचिवों की होगी विदाई
सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है उसके मुताबिक, कांग्रेस में इस बार सबसे बड़ा झटका महासचिव स्तर पर लगने वाला है। चार महासचिवों को उनके पद से हटाया जाएगा।

इन महासचिवों के हटने की वजह अलग-अलग है। कुछ महासचिव अब राज्यों में नई जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं, तो कुछ के कार्यकाल में पार्टी को अपेक्षित नतीजे नहीं मिले। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि, नए और ऊर्जावान चेहरों को यह जिम्मेदारी सौंपने से संगठन में नई जान फूंकी जा सकती है।
26 राष्ट्रीय सचिव भी हटेंगे
महासचिवों के साथ-साथ राष्ट्रीय सचिव स्तर पर भी बड़ी छंटनी होने की खबर है। फिलहाल कांग्रेस में 62 राष्ट्रीय सचिव हैं, जिनमें से करीब 26 को हटाया जाएगा। यह एक बड़ा और साहसिक फैसला है, क्योंकि एक साथ इतने बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय सचिवों की छंटनी कांग्रेस के हालिया इतिहास में कम देखने को मिली है। इस कदम से यह साफ संकेत मिलता है कि, पार्टी आलाकमान इस बार संगठन को महज दिखावटी मजबूती नहीं, बल्कि वास्तविक और कारगर मजबूती देना चाहता है।
इन प्रभारियों की हो सकती है छुट्टी
राज्य प्रभारियों के मोर्चे पर भी बड़े बदलाव होने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि, हरियाणा प्रभारी बीके हरिप्रसाद, महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला, छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट, तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडंकर और राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा को उनके पद से हटाया जा सकता है। इन सभी के हटने के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां जिम्मेदार हैं।
बीके हरिप्रसाद को हाल ही में कर्नाटक कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में वे एक साथ दो बड़ी जिम्मेदारियां नहीं संभाल सकते, इसलिए हरियाणा प्रभारी के पद पर उनकी जगह कोई नया चेहरा लाया जाएगा। रमेश चेन्निथला का मामला भी कुछ ऐसा ही है। केरल में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद वे राज्य मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं। अब वे सरकार में मंत्री हैं, इसलिए महाराष्ट्र का प्रभार संभालना उनके लिए संभव नहीं रहा।
महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में नया और सक्रिय प्रभारी नियुक्त किया जाएगा। तमिलनाडु का प्रभार संभाल रहे गिरीश चोडंकर को बीते दिनों गोवा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। ऐसे में AICC में उनकी तमिलनाडु प्रभारी की जिम्मेदारी से विदाई तय मानी जा रही है। इसी तरह केरल के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी जोसेफ भी अब राज्य सरकार में मंत्री बन चुके हैं, इसलिए संगठन में उनकी भूमिका भी बदलेगी और उनकी जगह नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति होगी।
इन राज्यों में बदलेंगे प्रदेश अध्यक्ष
राज्य स्तर पर प्रदेश अध्यक्षों में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। इनमें से पंजाब और उत्तर प्रदेश सबसे अहम हैं, क्योंकि इन दोनों राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करना और गुटबाजी पर लगाम लगाना पार्टी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
पंजाब में कांग्रेस लंबे समय से आंतरिक खींचतान से जूझ रही है। नेताओं के बीच गुटबाजी ने पार्टी को कमजोर किया है और इसका सीधा असर जमीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ा है। ऐसे में एक मजबूत और सर्वमान्य प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पार्टी के लिए बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। यहां पार्टी को अपनी जमीन वापस पाने के लिए संगठनात्मक स्तर पर ठोस काम करने की जरूरत है और नए प्रदेश अध्यक्ष को यही काम करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
चुनाव से पहले पार्टी को धार देने की कोशिश
दिल्ली में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को निराशाजनक नतीजों का सामना करना पड़ा था। ऐसे में राजधानी में संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की जरूरत महसूस की जा रही है। राजस्थान और तमिलनाडु में भी पार्टी संगठन को और प्रभावी बनाने के लिए नेतृत्व परिवर्तन किया जाएगा।
कुल मिलाकर कांग्रेस का यह संगठनात्मक फेरबदल पार्टी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि, आगामी चुनावों से पहले संगठन को ऊपर से नीचे तक एक नई धार दी जाए, गुटबाजी को खत्म किया जाए और नए व ऊर्जावान चेहरों को आगे लाया जाए। यह बदलाव कितने कारगर साबित होंगे, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस आलाकमान ने इस बार संगठन को झकझोरने का पूरा मन बना लिया है।
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