
देहरादून। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित नगरासू गुरुद्वारे में निहंग सिखों के डेरा जमाने से उपजा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामला इतना संवेदनशील हो गया है कि अब इसने राज्य की सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। इस पूरे घटनाक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत की और स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की अपील की।
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पंजाब सीएम भगवंत मान ने की धामी से बात
पंजाब के सीएम भगवंत मान ने इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उत्तराखंड के सीएम धामी को फोन किया। उन्होंने धामी से कहा कि, गुरुद्वारे में मौजूद निहंग सिखों की जो भी मांगें हैं, उन्हें पहले ध्यान से सुना जाना चाहिए। सीएम मान ने जोर देते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता हर हाल में खुला रहना चाहिए, क्योंकि किसी भी विवाद का समाधान केवल संवाद से ही निकाला जा सकता है।

भगवंत मान ने उत्तराखंड सरकार को पूरा सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने कहा कि, पंजाब सरकार की ओर से जो भी सहायता आवश्यक होगी, वह हर कदम पर साथ खड़ी है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब सरकार अपने स्तर पर सिख धर्म गुरुओं से बातचीत कर रही है, ताकि मामले को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण ढंग से निपटाया जा सके।
सीएम धामी का बयान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने भी इस पूरे प्रकरण पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की जाएगी। धामी ने कहा कि, उत्तराखंड देवभूमि है, जो हर धर्म और हर संस्कृति को समान आदर देती है। उन्होंने याद दिलाया कि, उत्तराखंड में हेमकुंड साहिब, नानकमत्ता साहिब और रीठा साहिब जैसे सिख धर्म के पवित्र तीर्थस्थल स्थित हैं, जो सिख गुरुओं की पावन विरासत का हिस्सा हैं।
सीएम धामी ने इस बात पर जोर दिया कि सभी धर्मों का सम्मान करना उत्तराखंड की संस्कृति और उसके मूल मूल्यों का अभिन्न अंग है। उनके इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि, राज्य सरकार इस मामले को संवेदनशीलता के साथ संभालना चाहती है, लेकिन किसी भी प्रकार की अराजकता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
ये है विवाद की जड़
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें 16 जून को हुई एक घटना में हैं। हेमकुंड साहिब के दर्शन कर लौट रहे कुछ निहंग श्रद्धालुओं का चमोली जिले के कर्णप्रयाग में स्थानीय व्यापारियों के साथ विवाद हो गया। शुरुआत में यह विवाद छोटी बात से हुआ, लेकिन देखते ही देखते यह इतना उग्र हो गया कि बात मारपीट तक जा पहुंची।

स्थिति तब और भी गंभीर हो गई जब दो निहंग श्रद्धालुओं ने तलवार निकाल ली और कई स्थानीय लोगों को घायल कर दिया। इस हिंसक घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो निहंग सिखों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस गिरफ्तारी के बाद से ही इलाके में तनाव का वातावरण बन गया।
निहंग सिखों ने सेवादारों को बनाया बंधक
कर्णप्रयाग की घटना के बाद 20 जून की शाम से रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में सात से आठ निहंग सिखों ने डेरा जमा लिया। पहले दिन यानी 20 जून को निहंग सिखों ने गुरुद्वारे के दो सेवादारों को बंधक बना लिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस व प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गए।

21 जून को लंबी मशक्कत के बाद निहंग सिखों ने दोनों सेवादारों को रिहा कर दिया। हालांकि, इसके बावजूद वे हथियारों के साथ गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर जमे रहे। पुलिस-प्रशासन की समझाइश के बाद 21 जून की शाम को एक निहंग सिख ने आत्मसमर्पण कर दिया। 22 जून को एक और निहंग सिख को उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह खाना लेने के लिए नीचे उतरा था। निहंग सिखों ने समय-समय पर गुरुद्वारे की छतों से नीचे मौजूद पुलिस और आईटीबीपी के जवानों पर पथराव भी किया, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
निहंग सिखों की मांग
नगरासू गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर डटे निहंग सिखों की मुख्य रूप से दो मांगें हैं। पहली यह कि कर्णप्रयाग की घटना में गिरफ्तार किए गए उनके दो साथियों को तत्काल रिहा किया जाए। दूसरी मांग यह है कि उस घटना में शामिल स्थानीय लोगों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
धारा 163 लागू
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कर्णप्रयाग और नगरासू दोनों इलाकों में धारा 163 लागू कर दी है। नगरासू गुरुद्वारे के आसपास स्थानीय पुलिस के साथ-साथ आईटीबीपी के जवानों की भी बड़ी संख्या में तैनाती कर दी गई है। फिलहाल इलाके में तनाव का माहौल बरकरार है। प्रशासन और पुलिस शांति बनाए रखते हुए बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश में लगी है। दोनों राज्यों की सरकारें इस मामले को जल्द से जल्द हल करने के प्रयास में हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
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