मायावती का तीखा हमला! बसपा को बदनाम करने की साजिश, बोलीं- पैसे से टिकट नहीं बंटते

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी के उम्मीदवार चयन और आर्थिक सहयोग को लेकर उठ रहे सवालों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे बसपा को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश बताया है। मायावती ने कहा कि, चुनाव नजदीक आने पर विरोधी दल और मीडिया का एक खास वर्ग बसपा के खिलाफ दुष्प्रचार का अभियान तेज कर देते हैं, जिसका मकसद पार्टी के बढ़ते जनाधार और संगठनात्मक मजबूती को कमजोर करना होता है।

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विपक्ष पर साधा निशाना

सोशल मीडिया पर शुक्रवार को जारी एक विस्तृत बयान में मायावती ने विपक्षी दलों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि, बसपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों पर आधारित एक ऐसी पार्टी है, जो किसी बड़े पूंजीपति या धनकुबेर के इशारों पर नहीं चलती। बसपा अपने समर्थकों के स्वैच्छिक सहयोग, समर्पण और मेहनत के बल पर आगे बढ़ती है।

Mayawati

उन्होंने कहा, पूंजीवादी ताकतों को बसपा की बढ़ती मजबूती रास नहीं आती। यही वजह है कि संकीर्ण सोच वाले, जातिवादी और पूंजीवादी तत्व लगातार बसपा के खिलाफ भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। मायावती का आरोप है कि, उम्मीदवार चयन को लेकर जानबूझकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जबकि पार्टी में टिकट वितरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और गंभीरता के साथ की जाती है।

कार्यकर्ताओं के सहयोग से चल रही पार्टी

मायावती ने याद दिलाया कि, बसपा सामाजिक न्याय, समता और बाबा साहेब आंबेडकर के सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है। यह दल दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और गरीब वर्गों के हितों की रक्षा के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि, बसपा कभी भी किसी पूंजीपति घराने या बड़े कारोबारियों की दया पर निर्भर नहीं रही। पार्टी का पूरा संगठन कार्यकर्ताओं और समर्थकों के छोटे-छोटे योगदान से चलता है, जो इसे अन्य पार्टियों से अलग और स्वतंत्र बनाता है।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर बसपा ने मिशन-2027 शुरू किया है। मायावती ने दावा किया कि, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल सहित पार्टी के सभी स्तर के पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस मिशन को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक कर काम कर रहे हैं। पार्टी संगठन को मजबूत करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और जनसम्पर्क बढ़ाने का काम तेजी से चल रहा है।

बेचैन हैं विरोधी

मायावती ने कहा कि बसपा की बढ़ती तैयारियों और जनसमर्थन को देखकर विपक्षी दलों में बेचैनी बढ़ गई है। यही वजह है कि वे लगातार भ्रामक खबरें, अफवाहें और दुष्प्रचार फैला रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसे प्रायोजित प्रचार से भ्रमित न हों और अपने मिशन पर दृढ़ रहें। विरोधी जानते हैं कि बसपा अगर मजबूत हुई तो उनकी राजनीति का खेल बिगड़ जाएगा, इसलिए वे हर तरीके से पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

उम्मीदवार चयन पर दी सफाई

उम्मीदवार चयन को लेकर उठ रहे सवालों पर मायावती ने साफ किया कि, बसपा में टिकट बांटने की प्रक्रिया बेहद सोच-विचार के बाद होती है। पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत, लोकप्रियता, सामाजिक समीकरण और जीत की संभावना को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाता है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर यह अफवाह फैला रहे हैं कि, बसपा में पैसे लेकर टिकट दिए जा रहे हैं, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्वासन देते हुए कहा कि, बसपा हमेशा अपनी मूल विचारधारा और सिद्धांतों पर अडिग रही है। पार्टी किसी भी तरह के गठबंधन या समझौते के चक्कर में नहीं पड़ेगी, बल्कि स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़कर बहुजन समाज को सशक्त बनाने का प्रयास करेगी।

गरमाई सियासत

उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने में अभी एक साल का समय बाकी है, लेकिन सियासी सरगर्मी पहले से ही शुरू हो गई है। बसपा, जो पिछले कुछ चुनावों में कुछ सीटों तक सिमट गई थी, अब फिर से अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है। मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी के अंदर और बाहर से उम्मीदवार चयन व फंडिंग को लेकर चर्चाएं हो रही हैं।

मायावती ने स्पष्ट किया कि बसपा का फोकस केवल सत्ता हासिल करने पर नहीं, बल्कि समाज के वंचित तबकों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने पर है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का जवाब तथ्यों से दें और पार्टी की एकता को बनाए रखें।

2027 में अच्छा प्रदर्शन करेगी पार्टी

अपने बयान के अंत में मायावती ने बसपा के सभी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और पदाधिकारियों से अपील की कि वे विरोधियों के नकारात्मक प्रचार से विचलित न हों। उन्होंने कहा, हमारा रास्ता साफ है। हम बाबा साहेब के दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं। हमें किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए। सिर्फ मेहनत और समर्पण से हम 2027 में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। मायावती का यह बयान बसपा के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने वाला माना जा रहा है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि, आगामी दिनों में बसपा विभिन्न जिलों में रैलियां, बैठकें और कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर अपने मिशन-2027 को और गति देगी। यह बयान बसपा की रणनीति को भी स्पष्ट करता है। पार्टी न तो किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा बनने जा रही है और न ही पूंजीपतियों के प्रभाव में आने वाली है। मायावती लगातार इस बात पर जोर दे रही हैं कि बसपा एक स्वतंत्र, विचारधारा आधारित और जन-आधारित पार्टी है।

 

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