
अल्मोड़ा। उत्तराखंड की पावन भूमि अल्मोड़ा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कृषि संरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक आह्वान किया है। उन्होंने खेत बचाओ अभियान को महज एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे पूर्ण जनांदोलन बनाने का संदेश दिया। हवालबाग क्षेत्र में आयोजित राज्य स्तरीय इस भव्य कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने, मिट्टी की उर्वरा शक्ति को संरक्षित रखने और किसानों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
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सामूहिक संकल्प बना अभियान
कार्यक्रम में हजारों किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भारी भीड़ उमड़ी। यह आयोजन केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिट्टी, पानी और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प बन गया।

मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कहा कि अल्मोड़ा की इस उपजाऊ धरती पर आकर उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खेत बचाओ अभियान अब जनभागीदारी का अभियान बन चुका है, जिसमें हर किसान, हर गांव और हर परिवार को अपनी भूमिका निभानी होगी।
वैश्विक चुनौती है जलवायु परिवर्तन
वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती बनकर उभरा है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में अनियमित वर्षा, सूखा, भूस्खलन और बढ़ते तापमान ने पारंपरिक खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसी स्थिति में मिट्टी का संरक्षण और पारंपरिक फसलों का संवर्धन अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से मोटे अनाजों मांडुआ (रागी), झंगोरा, चौलाई और अन्य स्थानीय फसलों के संरक्षण तथा उनके उत्पादन को बढ़ाने का आह्वान किया। ये फसलें न केवल पौष्टिक हैं, बल्कि कम पानी और प्रतिकूल मौसम में भी अच्छी पैदावार देती हैं। इन्हें बढ़ावा देकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकते हैं।
मिट्टी मां के समान पूजनीय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सांस्कृतिक और भावनात्मक अपील भी की। उन्होंने कहा कि, भारतीय संस्कृति में मिट्टी केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि मां के समान पूजनीय है, इसलिए मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की जीवंतता खत्म हो रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे यथासंभव जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें। धामी ने भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वस्थ कृषि व्यवस्था छोड़ने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि देश की असली शक्ति और हिम्मत हैं। उनकी मेहनत पर ही पूरा राष्ट्र टिका हुआ है। इस दिशा में राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए बजट में 200 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है।
वैज्ञानिक शोध के आधार पर करें खेती
मुख्यमंत्री ने व्यावहारिक सुझाव भी दिए। उन्होंने किसानों से नियमित मिट्टी परीक्षण कराने, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने, कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेने और वैज्ञानिक शोध के आधार पर खेती करने की अपील की। बदलते मौसम के अनुरूप फसल चयन करना अब जरूरी है। उदाहरणस्वरूप, सूखा प्रतिरोधी और कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया। इकोलॉजी और इकोनॉमी दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने जल, जंगल, जमीन और प्रकृति संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वालों से प्रेरणा लेने की बात कही।
सरकारी योजनाओं का जिक्र
मुख्यमंत्री धामी ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का विस्तृत जिक्र किया। बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पॉलीहाउस, फल उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, मेगा फूड पार्क और सुगंधित फसलों की खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों का उत्पादन हो रहा है। मोटे अनाजों को भी विशेष पैकेज दिया गया है। सरकार का फोकस डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) पर है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे किसानों के खाते में पहुंच रहा है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है।

धामी ने गर्व के साथ कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के मामले में उत्तराखंड देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और राज्य सरकार की नीतियों की सफलता का प्रमाण है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जनपद में तारबाड़ योजना के तहत लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य कराए जाने की घोषणा भी की, जो स्थानीय किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी।
कृषि मंत्री और अन्य अधिकारियों ने रखे विचार
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि, प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाकर ही उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब तक 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री धामी के विजन के तहत ड्रैगन फ्रूट, कीवी, मिलेट जैसी नई फसलों को बढ़ावा मिल रहा है। खेती का क्षेत्रफल घटने के बावजूद उत्पादन में वृद्धि होना सरकार की योजनाओं की सफलता दर्शाता है।
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया। इस दौरान विधायक रानीखेत डॉ. प्रमोद नैनवाल, विधायक जागेश्वर मोहन सिंह मेहरा, विधायक सल्ट महेश जीना, जिला पंचायत अध्यक्षा हेमा गैडा, मेयर अजय वर्मा, कृषि सचिव सुरेंद्र नारायण पांडे, निदेशक कृषि और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
किसानों और महिलाओं ने लिया सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम में शामिल किसानों और महिला समूहों ने खेती को बचाने, मिट्टी संवर्धन करने और जलवायु अनुकूल कृषि अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया। यह आयोजन दर्शाता है कि कृषि मुद्दे अब राजनीतिक या प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन बन चुके हैं।

मुख्यमंत्री का यह आह्वान उत्तराखंड के कृषि भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि ‘खेत बचाओ अभियान’ वास्तव में जनांदोलन बन गया तो पहाड़ की मिट्टी अपनी उपजाऊ शक्ति वापस पा सकेगी, किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और आने वाली पीढ़ियां स्वस्थ खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगी। मिट्टी बचाना केवल खेती बचाना नहीं, बल्कि संस्कृति, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को बचाना है। इस अभियान की सफलता हर किसान, हर युवा और हर जागरूक नागरिक की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। अल्मोड़ा का यह कार्यक्रम एक शुरुआत है, जिसे पूरे राज्य में फैलाना होगा। खेत बचेंगे तो उत्तराखंड बचेगा, मिट्टी बचेगी तो भविष्य बचेगा।
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