सऊदी से 1.35 लाख मीट्रिक टन तेल लेकर भारत पहुंचा जहाज, होर्मुज में ईरान को दिया चकमा

मुंबई। मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच एक महत्वपूर्ण घटना ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को राहत प्रदान की है। सऊदी अरब से 1 लाख 35 हजार मीट्रिक टन (लगभग 135,000 MT) कच्चे तेल से लदा एक जहाज सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गया है। यह जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकरे और संवेदनशील जलमार्ग से गुजरते हुए ईरान की सख्त निगरानी और संभावित रोकथाम को चकमा देकर मुंबई बंदरगाह पर पहुंचा। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट से अधिकांश अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है।

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होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का सख्त नियंत्रण

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट्स में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इस 33 किलोमीटर चौड़े जलडमरूमध्य से वैश्विक स्तर पर लगभग 20-25 प्रतिशत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है।

सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का अधिकांश निर्यात इसी रास्ते से गुजरता है। हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर सख्त नियंत्रण बढ़ा दिया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कई जहाजों को रोकने, जब्त करने या हमला करने की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। ईरान ने धमकी दी है कि, जो देश इजराइल और अमेरिका के साथ खड़े हैं, उनके जहाजों को एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। परिणामस्वरूप, अधिकांश अंतरराष्ट्रीय टैंकरों ने इस रूट से बचना शुरू कर दिया है।

90 प्रतिशत घटी आवाजाही

जहाजों की आवाजाही 70-90 प्रतिशत तक घट गई है। वहीं कई टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इस संकट से वैश्विक तेल कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। सऊदी अरब जैसे देश अपने तेल को रेड सी के यानबु बंदरगाह के माध्यम से वैकल्पिक रूट से भेजने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह रूट सीमित क्षमता वाला है। सऊदी अरामको के सीईओ ने इसे तेल उद्योग की अब तक की सबसे बड़ी संकट बताया है, जिसमें यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।जहाज की यात्रा और ईरान को चकमायह जहाज, जो लिबेरियन फ्लैग वाला टैंकर है, सऊदी अरब के रास तनुरा पोर्ट से 1 मार्च को लोड होकर निकला था।

जहाज का नाम Shenlong या समान Suezmax क्लास का बताया जा रहा है, जिसकी क्षमता लगभग 1 मिलियन बैरल (लगभग 1,35,000-1,40,000 मीट्रिक टन) कच्चे तेल की है। जहाज का कप्तान एक भारतीय नागरिक होने की जानकारी भी सामने आई है, जिसने इस मिशन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जहाज ने 8 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश किया और वहां से गुजरते हुए ईरानी नौसेना की सतर्क निगरानी को सफलतापूर्वक पार किया। कई जहाजों को ईरानी बलों द्वारा रोका गया, हमला किया गया या जब्त कर लिया गया, लेकिन यह टैंकर बिना किसी रुकावट के गुजर गया।

10 मार्च को मुंबई पहुंचा जहाज

शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, जहाज ने स्ट्रेट से निकलकर अरब सागर का रास्ता पकड़ा और 10 मार्च को मुंबई पहुंचा। यह पहला ऐसा गैर-ईरानी टैंकर माना जा रहा है, जो युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज से भारत पहुंचा है। यह सफलता इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि अधिकांश जहाज अब होर्मुज से बच रहे हैं। ईरान ने केवल अपने शैडो फ्लीट या चीन जैसे कुछ सहयोगी देशों के जहाजों को अनुमति दी है। अन्य देशों के जहाजों पर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसमें ड्रोन, प्रोजेक्टाइल और जब्ती शामिल हैं। इस जहाज ने सतर्कता, तेजी और संभवतः डिप्लोमेटिक/तकनीकी चालाकी से ईरान की पकड़ से बच निकलने में सफलता हासिल की।

महंगाई से मिलेगी राहत

आपको बता दें कि, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, जहां लगभग 85-88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात पर निर्भर है। फरवरी 2026 तक भारत का औसत दैनिक आयात 5.2-5.8 मिलियन बैरल था, जिसमें से आधे से अधिक (लगभग 2.5-2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन) मध्य पूर्व से होर्मुज रूट के जरिए आता था। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत भारत के प्रमुख सप्लायर हैं।इस संकट से पहले भारत को होर्मुज पर निर्भरता के कारण बड़ा खतरा था। यदि रूट पूरी तरह बंद होता, तो तेल कीमतें आसमान छू सकती थीं, रुपया कमजोर पड़ता और महंगाई बढ़ती, लेकिन इस जहाज की सफल पहुंच से राहत मिली है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, अब भारत का 70 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज के बाहर से सुरक्षित हो रहा है।

रूस से आयात 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जबकि अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य स्रोतों से सप्लाई बढ़ाई जा रही है। यह कार्गो मुंबई के महुल रिफाइनरी समेत अन्य रिफाइनरियों को सप्लाई करेगा।

प्रभावित हो सकती है वैश्विक तेल आपूर्ति

माना जा रहा है कि यह सफलता भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति की मजबूती दिखाएगी, जहां विविधीकरण और वैकल्पिक स्रोतों पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि यह एक सकारात्मक विकास है, लेकिन होर्मुज संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर संघर्ष लंबा खिंचा, तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होगी। भारत सरकार और रिफाइनरी कंपनियां लगातार निगरानी कर रही हैं। सऊदी अरब रेड सी रूट और पाइपलाइनों का अधिक उपयोग कर रहा है, लेकिन इन सबकी क्षमता सीमित है।

 

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