जंग के बीच पीएम मोदी का बड़ा एक्शन, खाड़ी देशों के शीर्ष नेतृत्व ने की बात

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान पर अमेरिका-इजरायल के भीषण सैन्य हमलों के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीतिक मोर्चे पर पूरी कमान संभाल ली है। मंगलवार, 3 मार्च को प्रधानमंत्री ने एक के बाद एक कई खाड़ी देशों के शीर्ष नेतृत्व से टेलीफोन पर उच्च-स्तरीय वार्ता की जिसका मुख्य एजेंडा न केवल क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर चर्चा करना था बल्कि वहां रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना भी था।

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हमलों की निंदा की

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार दोपहर बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक, कुवैत के युवराज शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से विस्तार से बातचीत की। यह कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय में आई है जब पूरा पश्चिम एशिया बारूद के ढेर पर बैठा है और भारत में रहने वाले परिवारों में अपने प्रियजनों की सलामती को लेकर गहरी चिंता व्याप्त है।

ईरान पर हुए हालिया हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है और युद्ध की यह आंच अब खाड़ी के अन्य देशों को भी अपनी चपेट में ले रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान और कुवैत के नेताओं से बातचीत के दौरान उनके देशों पर हुए हालिया हमलों और सुरक्षा उल्लंघनों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट शब्दों में इन हमलों की निंदा की। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार मोदी ने खाड़ी देशों के प्रति भारत की अटूट एकजुटता दोहराई क्योंकि ओमान, कुवैत और कतर न केवल भारत के रणनीतिक भागीदार हैं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

भारतीय समुदाय की सुरक्षा की अपील की

भारत सरकार के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया में रह रहे लगभग 90 लाख भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री ने तीनों प्रमुख नेताओं से व्यक्तिगत रूप से आग्रह किया कि वे वर्तमान संकटपूर्ण स्थिति में भारतीय समुदाय के कल्याण का विशेष ध्यान रखें और उन्हें सुरक्षा का हर संभव आश्वासन प्रदान करें। खाड़ी देशों के नेताओं ने भी प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया कि वे भारतीय नागरिकों को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए हर आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल केवल मंगलवार की बातचीत तक सीमित नहीं है बल्कि पिछले 48 घंटों में उन्होंने ‘शटल डिप्लोमेसी’ का परिचय देते हुए क्षेत्र के लगभग सभी प्रभावशाली नेताओं से संपर्क साधा है। इससे पहले उन्होंने बहरीन के शाह और सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान से बात कर हालिया हमलों की कड़ी निंदा की थी और कहा था कि भारत इस कठिन घड़ी में अपने मित्रों के साथ मजबूती से खड़ा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की।

आयात-निर्यात पर पड़ेगा बुरा असर

संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी स्थिति की गंभीरता पर संवाद किया जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत इस संघर्ष में शांति और संवाद का पक्षधर है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के बाद भारत की चिंताएं बहुआयामी हो गई हैं क्योंकि संघर्ष लंबा खिंचने पर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने का खतरा है जिससे भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर युद्ध का साया मंडराने से भारत के आयात-निर्यात पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह सक्रियता भारत को एक वैश्विक ‘शांति निर्माता’ के रूप में स्थापित करती है क्योंकि भारत के इजरायल और अरब देशों दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। प्रधानमंत्री का इन सभी नेताओं से सीधा संपर्क में होना यह दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग कर रहा है। विदेश मंत्रालय स्थिति पर 24 घंटे नजर रख रहा है और खाड़ी देशों में स्थित भारतीय दूतावासों को स्थानीय अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की इस ‘टेलीफोन डिप्लोमेसी’ ने खाड़ी देशों को यह कड़ा संदेश दिया है कि भारत अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमलों की निंदा करके और एकजुटता दर्शाकर मोदी ने साबित कर दिया है कि संकट के समय में भारत एक भरोसेमंद और सक्रिय वैश्विक शक्ति है। फिलहाल कोम जैसे सुरक्षित शहरों में भारतीय छात्रों का स्थानांतरण और खाड़ी नेताओं से प्रधानमंत्री की यह सीधी बातचीत लाखों भारतीयों के लिए राहत की बड़ी खबर बनकर आई है।

 

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