
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को यूजीसी के नए नियमों ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ। सवर्ण मोर्चा के बैनर तले सड़क पर हजारों लोग उतरे और सरकार विरोधी नारे लगाये। परिवर्तन चौक पर जुटे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने नियमों को ‘काला कानून’ करार देते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें इको गार्डन थाने भेज दिया। इस घटना से क्षेत्र में कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल बना रहा। हालांकि कोई बड़ी घटना नहीं घटी।
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परिवर्तन चौक पर एकत्र हुए लोग

सवर्ण मोर्चा के आह्वान पर दोपहर 12 बजे के आसपास परिवर्तन चौक पर बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्वक धरना दिया। इस दौरान ‘काला कानून वापस लो’, ‘सवर्ण हितों पर हमला बंद करो’, ‘यूजीसी नियम रद्द करो’ जैसे नारे लगाए। उनका कहना है कि, यूजीसी के नए नियम सवर्ण (जनरल कैटेगरी) समाज के हितों के खिलाफ हैं और उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं।
ये नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए थे, जिनमें सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी कमेटी गठित करने, एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों के खिलाफ जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतों के लिए 24×7 हेल्पलाइन और इक्विटी सेंटर स्थापित करने का प्रावधान है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, नियमों में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल एससी/एसटी/ओबीसी तक सीमित है, जिससे जनरल कैटेगरी के छात्रों को सुरक्षा नहीं मिलती और झूठी शिकायतों का खतरा बढ़ जाता है।वे इसे ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ बता रहे हैं और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाला मानते हैं।
अलंकार अग्निहोत्री की मौजूदगी ने भरा जोश
प्रदर्शन में ट्विस्ट तब आ गया जब हाल ही में सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने वाले पूर्व बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री मौके पर पहुंचे। अग्निहोत्री ने जनवरी में यूजीसी नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए इस्तीफा दे दिया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि ये नियम उच्च शिक्षा में जाति-आधारित असंतोष पैदा कर सकते हैं। अलंकर की मौजूदगी से प्वेरदर्शनकारी जोश में आ गये और परिवर्तन चौक से हजरतगंज की ओर मार्च निकालने की कोशिश में जुट गए।
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पुलिस ने पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी और भारी बल तैनात था, जिसमें RAF (रैपिड एक्शन फोर्स) के जवान भी शामिल थे। जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ने की कोशिश करते नजर आए और कुछ लोग बैरिकेड पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए स्थिति संभाली और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए लोगों को बसों से इको गार्डन थाने पहुंचाया गया।
मची अफरा तफरी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए यह कदम उठाया गया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण शुरू हुआ था, लेकिन मार्च की कोशिश से अफरातफरी मच गई। फिलहाल परिवर्तन चौक पर भारी पुलिस बल तैनात है और यातायात प्रभावित रहा। प्रशासन पूरे मामले पर नजर रखे हुए है।
यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए हैं। इनमें इक्विटी कमेटी में एससी/एसटी/ओबीसी, महिलाओं और लोक निर्माण विभाग सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि, ये नियम एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों की शिकायतों को संबोधित करने के लिए हैं, जहां पिछले वर्षों में ऐसी शिकायतें 118% बढ़ी हैं। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भेदभाव नहीं होगा और नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।
देश भर में हो रहे प्रदर्शन

हालांकि, नये कानून के खिलाफ जनवरी से ही देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। उत्तर प्रदेश में लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज समेत कई शहरों में छात्रों, सवर्ण संगठनों (जैसे करणी सेना, सवर्ण सेना) ने प्रदर्शन किए। कई BJP नेता और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे दिए। सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल हुई, जिसमें नियमों को असंवैधानिक बताया गया। 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने नियमों पर स्टे लगा दिया और केंद्र से जवाब मांगा। विरोधियों का कहना है कि, नियम अस्पष्ट हैं और जनरल कैटेगरी के छात्रों को निशाना बनाया जा सकता है।
सवर्ण मोर्चा ने सरकार को दी चेतावनी
प्रदर्शन के बाद सवर्ण मोर्चा ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा। वे 19 मार्च को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का हवाला देते हुए कह रहे हैं कि नियम वापस लिए जाने चाहिए। कुछ नेताओं ने इसे ‘सवर्ण समाज की एकजुटता’ का प्रतीक बताया। यह प्रदर्शन यूजीसी नियमों के खिलाफ चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा है, जो अब राजनीतिक रंग ले चुका है। लखनऊ में आज की घटना से साफ है कि मुद्दा अभी ठंडा नहीं हुआ है। प्रशासन ने स्थिति को संभाल लिया है, लेकिन आगे क्या होगा, यह देखना बाकी है।
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