
अक्सर लोग धुंधली नजर को थकान, स्क्रीन टाइम या उम्र बढ़ने का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार वे सीधे चश्मा बदलने या आंखों की जांच करवाने की सोचते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, धुंधला दिखाई देना हमेशा आंखों की कमजोरी का नतीजा नहीं होता। यह शरीर में छिपी किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान में आंखों को ‘शरीर का आईना’ कहा जाता है, क्योंकि आंखें मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और रक्त वाहिकाओं से सीधे जुड़ी होती हैं, इसलिए, अन्य अंगों में होने वाली गड़बड़ी का प्रभाव सबसे पहले आंखों पर दिखाई देता है।
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बढ़ जाता है अंधेपन का खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि, अगर अचानक दृष्टि धुंधली हो जाए, एक आंख से कम दिखाई दे या नजर में अस्थायी बदलाव आए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह स्थिति न केवल स्थायी अंधापन का खतरा पैदा कर सकती है, बल्कि हृदय, मस्तिष्क या अन्य महत्वपूर्ण अंगों की गंभीर समस्या की चेतावनी भी हो सकती है।
डायबिटीज
धुंधली नजर का सबसे आम और खतरनाक कारण डायबिटीज यानी मधुमेह हो सकता है। भारत में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, शरीर में जब ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित रहता है, तो आंखों के लेंस में तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे दृष्टि अस्थायी रूप से धुंधली हो जाती है। लंबे समय तक हाई शुगर रहने पर ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी’ विकसित हो सकती है। इस स्थिति में रेटिना की बारीक रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और लीक होने लगती हैं या नसों को कमजोर करने लगती हैं।

शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन आगे चलकर फ्लोटर्स (काले धब्बे), रात में कम दिखाई देना, रंगों में फर्क न समझ पाना और अंत में पूर्ण दृष्टि हानि हो सकती है। नेत्र विशेषज्ञ कहते हैं कि, डायबिटीज से पीड़ित 80% से अधिक मरीजों में 10 साल या उससे अधिक समय बाद रेटिनोपैथी का खतरा बढ़ जाता है। अगर समय पर ब्लड शुगर कंट्रोल न किया जाए, तो यह भारत में अंधापन का प्रमुख कारण बन सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि, डायबिटीज के मरीजों को साल में कम से कम एक बार फंडस जांच (रेटिना की जांच) करवानी चाहिए।
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हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा
हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) न केवल हृदय रोग का कारण बनता है, बल्कि आंखों की नसों पर भी भारी दबाव डालता है। इससे रेटिना में रक्तस्राव या सूजन हो सकती है, जिसे ‘हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी’ कहा जाता है। अचानक धुंधला दिखना, दोहरी नजर या एक तरफ से दृष्टि चले जाना स्ट्रोक (लकवा) का प्रमुख संकेत हो सकता है। जब मस्तिष्क के ऑक्सिपिटल लोब या विजुअल पाथवे में रक्त आपूर्ति बाधित होती है, तो दृष्टि प्रभावित होती है।
चिकित्सकों का मानना है कि, ऐसे लक्षण ‘मेडिकल इमरजेंसी’ हैं। अगर धुंधलेपन के साथ सिरदर्द, चक्कर, बोलने में कठिनाई या कमजोरी हो, तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर इलाज से स्ट्रोक के स्थायी नुकसान को रोका जा सकता है।
ब्रेन ट्यूमर और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
मस्तिष्क में ट्यूमर या कोई असामान्य वृद्धि ऑप्टिक नर्व या विजुअल पाथवे पर दबाव डाल सकती है। इससे धुंधली नजर के अलावा तेज सिरदर्द, उल्टी, चक्कर या आंखों की गति में समस्या हो सकती है। ‘मल्टीपल स्केलेरोसिस’ (एमएस) जैसी ऑटोइम्यून बीमारियां भी ऑप्टिक नर्वाइटिस का कारण बनती हैं, जिसमें अचानक एक आंख की दृष्टि प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में शुरुआती जांच से ट्यूमर का पता चल सकता है और इलाज संभव होता है।
न्यूरोलॉजिस्ट और नेत्र रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि, अगर धुंधलापन लगातार बना रहे या अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखें, तो एमआरआई या सीटी स्कैन जैसी जांचे जरूरी हो जाती हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
एक्सपर्ट्स का कहना है कि, दृष्टि में किसी भी तरह के बदलाव को मामूली न समझें। नियमित आंखों की जांच के साथ ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी रखें। संतुलित आहार में विटामिन A (गाजर, पालक), ओमेगा-3 (मछली, अखरोट) और एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन शामिल करें। धूम्रपान छोड़ें, वजन नियंत्रित रखें और व्यायाम करें। अगर धुंधलेपन के साथ आंखों में दर्द, लाली, फ्लोटर्स या सिरदर्द हो, तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ या इमरजेंसी में संपर्क करें। समय पर पता चलने से कई गंभीर बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है और दृष्टि बचाई जा सकती है।
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