
वास्तु टिप्स: भारतीय संस्कृति में घर को मंदिर के समान माना जाता है, जहां परिवार के सदस्य आस्था और श्रद्धा के साथ ईश्वर की आराधना करते हैं। पूजा घर न केवल आध्यात्मिक केंद्र होता है, बल्कि यह परिवार में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि का स्रोत भी माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा स्थान का निर्माण और व्यवस्था यदि सही दिशाओं और नियमों के अनुरूप हो, तो पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। वहीं, गलत दिशा या अनुचित व्यवस्था मानसिक अशांति, काम बाधा और नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकती है।
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वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि घर में पूजा घर की स्थापना से जुड़े नियम प्राचीन ग्रंथों जैसे विष्णु पुराण, वास्तु शास्त्र और अन्य शास्त्रीय स्रोतों पर आधारित हैं। इन नियमों का पालन करने से घर में सात्विक ऊर्जा का संचार होता है, जो परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य, धन और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
पूजा घर के लिए सर्वोत्तम दिशा
वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को पूजा घर के लिए सबसे शुभ और आदर्श माना गया है। यह दिशा पूर्व और उत्तर के शुभ प्रभावों से युक्त होती है, जहां सूर्योदय की ऊर्जा और चंद्रमा की शीतलता का संतुलन रहता है। ईशान कोण को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है, इसलिए यहां पूजा स्थल बनाने से सत्व गुण प्रधान ऊर्जा का प्रभाव सदैव बना रहता है। इससे साधक को मानसिक स्पष्टता, शांति और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है।

यदि ईशान कोण उपलब्ध न हो, तो पूर्व या उत्तर दिशा में पूजा घर बनाया जा सकता है। पूर्व दिशा नई शुरुआत और ज्ञान का प्रतीक है, जबकि उत्तर दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दक्षिण दिशा में पूजा घर कभी न बनाएं, क्योंकि यह यम की दिशा मानी जाती है और अशुभ प्रभाव डाल सकती है।
पूजा करते समय मुख की दिशा
दक्षिण-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम जैसे कोणों में भी पूजा स्थल से बचना चाहिए।
पूजा या ध्यान करते समय भक्त का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वास्तु ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि, उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और आत्मिक विकास में वृद्धि होती है।
देवताओं की मूर्ति या तस्वीर का मुख पूर्व या पश्चिम की ओर होना चाहिए, ताकि भक्त पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके पूजा कर सके। उत्तर की ओर मुख करके पूजा धन प्राप्ति के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है, जबकि पूर्व की ओर ज्ञान और चमत्कारिक फल प्रदान करती है। दक्षिण की ओर मुख करके पूजा करने से बचें, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है।
दिशाओं के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा का विधान
वास्तु में प्रत्येक दिशा का अपना अधिपति देवता होता है, इसलिए विशिष्ट दिशा में उसी देवता की आराधना अधिक फलदायी होती है।
उत्तर-पूर्व (ईशान कोण): शिव परिवार, राधा-कृष्ण, विष्णु या किसी भी मुख्य देवता की पूजा के लिए सर्वोत्तम।
पूर्व दिशा: भगवान राम, विष्णु, सूर्य देव या अन्य सूर्य से जुड़े देवताओं की उपासना।
उत्तर दिशा: गणेश जी, लक्ष्मी जी और कुबेर की आराधना से धन और वैभव की वृद्धि।
दक्षिण दिशा: देवी दुर्गा, काली या हनुमान जी की पूजा से सुरक्षा और शक्ति प्राप्ति।
पश्चिम दिशा: गुरु, महावीर स्वामी, बुद्ध या ईसा मसीह जैसे आध्यात्मिक गुरुओं की पूजा।
पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम: मां सरस्वती की पूजा शिक्षा और विद्या के लिए शुभ।
दक्षिण-पश्चिम: पूर्वजों (पितरों) की श्राद्ध-तर्पण आदि के लिए उपयुक्त।
इन दिशाओं में संबंधित देवताओं की पूजा से घर में सौभाग्य, सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक सद्भाव बढ़ता है।
ऊर्जा संतुलन के लिए उपाय
पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए सुबह-शाम दीपक जलाना, शंख बजाना और अगरबत्ती जलाना आवश्यक है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध रहता है। पूजा स्थल के रंग हल्के और सात्विक होने चाहिए, जैसे हल्का हरा, पीला, जामुनी, सफेद या क्रीम। गहरे रंगों से बचें, क्योंकि वे तमोगुण बढ़ा सकते हैं। नियमित रूप से पूजा घर की सफाई और सुगंधित फूलों का उपयोग भी ऊर्जा को संतुलित रखता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा घर के ऊपर या नीचे शौचालय, बाथरूम या किचन नहीं होना चाहिए।
- खंडित, टूटी या जीर्ण मूर्तियां और तस्वीरें कभी न रखें।
- महाभारत, रामायण के युद्ध दृश्य, हिंसक प्राणी-पक्षियों के चित्र या दिवंगत व्यक्तियों की तस्वीरें पूजा स्थल में न लगाएं।
- पूजा घर में धन, गहने या संपत्ति छिपाकर रखना अशुभ है।
- दक्षिण-पश्चिम दिशा में पूजा कमरे का उपयोग न करें, क्योंकि यह संबंधों और स्थिरता की दिशा है।
- पूजा घर को हमेशा स्वच्छ और व्यवस्थित रखें, अनियमित उपयोग से ऊर्जा प्रभावित होती है।
वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि ये नियम आस्था के साथ अपनाने से घर में देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है और परिवार सुख-समृद्धि से भरपूर जीवन जीता है। यदि घर की संरचना में कोई दोष हो, तो वास्तु उपाय जैसे यंत्र स्थापना या दिशा सुधार से लाभ लिया जा सकता है।
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