
नई दिल्ली। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत में सख्त कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को रद्द कर दिया था। अब भारत इस निलबंन और भी पुख्ता करने के लिए इस दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है, जिससे पाकिस्तान में अफरा-तफरी मच गई है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में झेलम और चिनाब नदियों पर दो महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं पर काम जल्द शुरू होने वाला है।
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सिंधु जल संधि की वजह से थे लंबित

ये प्रोजेक्ट दशकों से सिंधु जल संधि की वजह से लंबित पड़े थे, लेकिन अब संधि के निलंबित हो जाने के बाद इन पर तेजी से काम शुरू होने की उम्मीद जगी है। इससे जम्मू शहर को पीने का पानी और कश्मीर में नेविगेशन व बिजली उत्पादन में बड़ी राहत मिलेगी। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार 10 फरवरी 2026 को विधानसभा में बताया कि, सिंधु जल संधि निलंबित होने से लंबे समय से अटकी इन परियोजनाओं पर अब काम शुरू हो सकता है।
उन्होंने कहा, हम भारत सरकार के साथ दो प्रमुख काम कर रहे हैं, पहला, सोपोर के पास झेलम नदी पर तुलबुल नेविगेशन बैराज का निर्माण और दूसरा, अखनूर के पास चिनाब नदी से पानी उठाकर जम्मू शहर में जल आपूर्ति, प्रयास जारी है और मुझे उम्मीद है कि, इन दोनों परियोजनाओं पर जल्द काम शुरू हो जाएगा।
सिंधु जल संधि का निलंबन
उल्लेखनीय है कि, साल 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि में भारत को पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास, सतलुज) और पाकिस्तान को पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चिनाब) का पानी निर्बाध बहाव सुनिश्चित किया गया था, लेकिन 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत के बाद भारत ने 23 अप्रैल 2025 को इस संधि को निलंबित कर दिया।
विदेश मंत्रालय ने कहा था कि, ये संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह बंद नहीं करता। यह फैसला भारत की ओर से पाकिस्तान को कड़ा संदेश था, क्योंकि संधि ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारत के पानी उपयोग को सीमित रखा था। उमर अब्दुल्ला ने लंबे समय से इसे सबसे अनुचित समझौता बता रहे हैं, जो जम्मू-कश्मीर के लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता रहा।
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तुलबुल नेविगेशन बैराज
तुलबुल नेविगेशन बैराज परियोजना 1980 के दशक की शुरुआत में तैयार की गई थी। 1984 में इसका काम शुरू हुआ, लेकिन पाकिस्तान की आपत्तियों के कारण 1987 में इसे रोक दिया गया। यह परियोजना सोपोर के पास वुलर झील पर झेलम नदी के बहाव को रेगुलेट करने के लिए ड्रॉप गेट्स बनाएगी। इससे न केवल नेविगेशन (नौवहन) आसान होगा, बल्कि सर्दियों में जल स्तर बढ़ने से डाउनस्ट्रीम पावर प्रोजेक्ट्स में बिजली उत्पादन बढ़ेगा और बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी। पाकिस्तान ने इसे “स्टोरेज” मानकर आपत्ति जताई थी, लेकिन अब संधि निलंबित होने से भारत को इस पर काम करने की राह मिल गई है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि, यह परियोजना कश्मीर की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।
जम्मू कश्मीर के लोगों को मिलेगा पर्याप्त पानी
जम्मू शहर की बढ़ती आबादी और पानी की मांग को देखते हुए चिनाब जल आपूर्ति योजना भी पुरानी हो चली है। इसके तहत अखनूर के पास चिनाब नदी से पानी उठाकर जम्मू शहर और आसपास के इलाकों में सप्लाई की जाएगा। वर्तमान में जम्मू को तवी नदी का पानी मिलता है, जो पर्याप्त नहीं है। उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा कि पहले एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) को प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन संधि की वजह से अनुमति नहीं मिली और प्रोजेक्ट बर्बाद हो गया। अब संधि के निलंबन से यह योजना फिर से जीवित हो सकती है, जिससे जम्मू के लोगों को अगले दो-तीन दशकों तक पर्याप्त पानी मिलेगा।
पाकिस्तान बोला- ICJ में ले जाएंगे मामला
इधर, सिंधु जल संधि के निलंबन से पाकिस्तान में भारी आक्रोश है। पाकिस्तान ने इसे युद्ध का कार्य करार दिया और कहा कि पानी रोकना अस्वीकार्य है। वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में मामला ले जाने की तैयारी कर रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि संधि में कोई एकतरफा निलंबन का प्रावधान नहीं है, लेकिन भारत इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर जायज ठहरा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि, यह निलंबन पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि चिनाब और झेलम उसकी मुख्य जीवनरेखा हैं। भारत की ओर से “न एक बूंद पानी पाकिस्तान को” जैसी बातें भी कही गई हैं। ये दोनों परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर के लिए वरदान साबित हो सकती हैं। तुलबुल बैराज से कश्मीर में नौवहन, बिजली और सिंचाई बेहतर होगी, जबकि चिनाब योजना से जम्मू की पानी समस्या हल होगी।
पानी के संकट से जूझेगा पाक
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ समन्वय से इन पर काम तेज होगा। यह कदम सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद भारत की रणनीतिक मजबूती दिखाता है, जहां आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख के साथ ही क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले महीनों में इन प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू होने से जम्मू-कश्मीर के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जबकि पाकिस्तान में पानी संकट की आशंका बढ़ गई है।
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