
नई दिल्ली। इस बार जब से लोकसभा का बजट सत्र शुरू हुआ है, तब से लगातार हंगामा हो रहा है, जिसकी वजह से हर दिन सदन को स्थगित करना पड़ रहा है। आलम ये है एक भी दिन ऐसा नहीं गया जब सदन सुचारू रूप से चला हो और जनता के मुद्दे ढंग से उठाए गये हों। एक तरफ विपक्ष का आरोप है कि, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा है। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष की वजह से सदन नहीं चल पा रहा है।
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11 महिला सांसदों ने स्पीकर को लिखा पत्र
इसे लेकर अब भारतीय जनता पार्टी की 11 महिला सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है और विपक्षी सांसदों के ‘शर्मनाक व्यवहार’ पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस साझा पत्र में स्पीकर की प्रशंसा करते महिला सांसदों ने लिखा है, उन्होंने (स्पीकर) सदन की गरिमा बचाने के लिए धैर्य और मजबूती दिखाई, लेकिन विपक्ष पर शर्मनाक हरकत करने का आरोप लगाया।

इधर, कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने इस पत्र को ‘राजनीतिक ड्रामा’ करार दिया है और स्पीकर पर भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। इससे एक दिन पहले, कांग्रेस की महिला सांसदों ने भी स्पीकर को पत्र लिखकर उनके आरोपों को ‘बेसलेस और डिफेमेटरी’ बताया था। इस घटनाक्रम से संसद का बजट सत्र और भी उथल-पुथल भरा हो गया है। ऐसे में विपक्ष अब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
4 फरवरी को शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा विवाद 4 फरवरी 2026 को उस वक्त शुरू हुआ, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लोकसभा में जबर्दस्त हुआ। इसके बाद राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक का जिक्र करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर तीखे प्रहार किये। इस पर राहुल गांधी को ये कहते हुए सदन में बोलने से रोक दिया गया कि, अप्रकाशित किताब का हवाला देकर सदन में नहीं बोला जा सकता है। इस विपक्ष ने नाराजगी जताई और हंगामा कर दिया। BJP की महिला सांसदों के पत्र के अनुसार, कुछ विपक्षी महिला सांसद हाथों में बैनर और प्लेकार्ड लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट तक पहुंच गईं और ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़ीं, जहां वरिष्ठ मंत्री बैठे थे। पत्र में इसे ‘संसदीय इतिहास के सबसे काले पलों’ में से एक बताया गया है।
स्पीकर ओम बिरला की तारीफ़ की
सांसदों ने लिखा कि, इस घटना से वे ‘गहरे सदमे’ में हैं, लेकिन अपने वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर संयम बरता और कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने चिंता जताई कि, अगर संयम न रखा जाता, तो स्थिति और बिगड़ सकती थी। BJP की सांसदों, जिनमें प्रमुख नाम जैसे अपराजिता सारंगी, अन्नपूर्णा देवी और अन्य शामिल हैं…ने पत्र में स्पीकर ओम बिरला की जमकर तारीफ की है। उन्होंने लिखा, ‘आपने 4 फरवरी को धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान सदन की गरिमा, मर्यादा और पवित्रता को बनाए रखने के लिए अनुकरणीय तरीके से काम किया।’
सांसदों ने स्पीकर पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि, पिछले सात वर्षों में उन्होंने सदन के कामकाज को बेहतर बनाया और सभी सदस्यों को बिना भेदभाव के बोलने का मौका दिया। पत्र के अंत में मांग की गई कि, नियमों के तहत विपक्षी सांसदों पर ‘सख्त से सख्त कार्रवाई’ की जाए, क्योंकि ऐसे व्यवहार से लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि धूमिल होती है।
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स्पीकार पर पक्षपात का आरोप
पत्र में विशेष रूप से आरोप लगाया गया कि, विपक्षी सदस्य स्पीकर के चैंबर की ओर बढ़े और वहां से तेज आवाजें सुनाई दीं, जो ‘लोकसभा के पवित्र परिसर’ के लिए चिंताजनक है। यह पत्र ऐसे समय आया है जब विपक्ष स्पीकर बिरला पर हमलावर है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों ने स्पीकर पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है।

4 फरवरी के हंगामे के बाद स्पीकर ने सदन में बयान दिया था कि, उन्हें पुख्ता जानकारी मिली थी कि, कांग्रेस सदस्य प्रधानमंत्री की सीट की तरफ बढ़ सकते हैं और ‘कुछ अप्रत्याशित कर सकते हैं, इसलिए, उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया था। स्पीकर के इस बयान पर विपक्ष भड़क गया। इसके बाद कांग्रेस की महिला सांसदों ने 9 फरवरी को स्पीकर को तीन पेज का पत्र लिखा, जिसमें कहा गया कि स्पीकर ‘BJP के दबाव’ में हैं और उन्होंने महिला सांसदों पर ‘झूठे, बेसलेस और डिफेमेटरी’ आरोप लगाए हैं।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
कांग्रेस सांसद एस. जोथिमणि, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य ने लिखा, सदन में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति किसी धमकी की वजह से नहीं, बल्कि डर की वजह से थी, वे विपक्ष का सामना नहीं करना चाहते थे। पत्र ने महिला सांसदों ने स्पीकर से मांग की, कि वे निष्पक्ष रहें, संसदीय गरिमा बहाल करें और विपक्ष के अधिकारों का सम्मान करें। ये मुद्दा सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ। कांग्रेस समर्थक यूजर्स ने स्पीकर को ‘BJP के दबाव में’ बताया।
वहीं BJP समर्थकों ने विपक्ष को ‘अराजक’ करार दिया। एक पोस्ट में लिखा गया, “कांग्रेस महिला सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखकर आरोपों को खारिज किया और PM की अनुपस्थिति को डर बताया। “एक अन्य पोस्ट में लिखा गया कि स्पीकर को निष्पक्ष रहना चाहिए, लेकिन ‘यह असंभव है’।
अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी
इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक विश्लेषक भी अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक संजय के. झा ने X पर लिखा, “महिला सांसदों ने स्पीकर पर आरोप लगाया कि, वे मोदी सरकार के दबाव में हैं।” इस घटनाक्रम का बैकग्राउंड बजट सेशन से जुड़ा है, जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर है। INDIA ब्लॉक के फ्लोर लीडर्स ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ऑफिस में मीटिंग की और स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की।
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर विपक्षी सदस्यों को बोलने नहीं देते और नियमों का दुरुपयोग करते हैं। वहीं, BJP का कहना है कि विपक्ष सदन को बाधित कर रहा है। 4 फरवरी के हंगामे में विपक्षी सदस्यों ने पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवने की किताब का जिक्र कर सरकार पर सवाल उठाए, जिसके बाद सदन को स्थगित करना पड़ा।
स्पीकर ने नहीं दी प्रतिक्रिया
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि, यह विवाद संसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे हंगामे लोकतंत्र की जड़ें कमजोर करते हैं। BJP की ओर से यह पत्र विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का जवाब माना जा रहा है, जो स्पीकर को सपोर्ट देकर उनकी स्थिति मजबूत करने की कोशिश है। कांग्रेस ने इसे ‘डिफेंसिव मूव’ बताया और कहा कि स्पीकर को जवाब देना चाहिए।

कुल मिलाकर, यह घटना भारतीय संसद के इतिहास में एक और अध्याय जोड़ रही है, जहां आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। स्पीकर ओम बिरला ने अभी तक BJP के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, सदन में इस मुद्दे पर और बहस हो सकती है। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे संसद को चलने नहीं देंगे। वहीं, सरकार का कहना है कि सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इस घमासान से बजट सेशन के बाकी दिनों में और तनाव की आशंका है, जो देश की राजनीति पर असर डाल सकता है।
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