लोकसभा में लगातार हंगामा, प्रश्नकाल रुका, सदन 9 फरवरी तक स्थगित, स्पीकर बोले- 19 घंटे बर्बाद

नई दिल्ली। संसद का इस बार का बजट सत्र काफी हंगामेदार है या यूं कहें कि ये अब तक के सबसे हंगामेदार सत्रों में से एक बन चुका है। छह फरवरी दिन शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन भी लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस के सदस्यों ने जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही आज भी पूरी तरह से ठप हो गई। प्रश्नकाल शुरू होने के महज कुछ मिनटों बाद ही सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। जब दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो फिर से विपक्ष हंगामा शुरू कर दिया, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही को 9 फरवरी (सोमवार) तक के लिए स्थगित कर दिया।

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बर्बाद हो चुका है 19 घंटे से ज्यादा का समय

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बता दें कि, सदन में ये गतिरोध सोमवार 2 फरवरी यानी जिस दिन से सदन का सत्र शुरू हुआ है, तब से जारी है। अब तक लोकसभा का 19 घंटे 13 मिनट का कीमती समय बर्बाद हो चुका है। हालांकि, स्पीकर ओम बिरला ने बार-बार सदस्यों से अपील की, कि सदन 140 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों का केंद्र है, जहां चर्चा, संवाद और जनहित के मुद्दों पर बहस होनी चाहिए, न कि नारेबाजी और गतिरोध। उन्होंने साफ कहा, “यदि आप नियोजित तरीके से सदन की मर्यादाओं को तोड़ना चाहते हैं और गतिरोध पैदा करना चाहते हैं। तो ऐसा सदन मैं नहीं चला सकता।”

शुक्रवार का घटनाक्रम

सदन की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तुरंत प्रश्नकाल शुरू कराया और बीजेपी सांसद राजपाल सिंह का नाम पूरक प्रश्न पूछने के लिए पुकारा। जैसे ही नाम लिया गया, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य वेल में आ गए और जोर-जोर से नारे लगाने लगे। उन्होंने प्लेकार्ड्स दिखाए गए और सदन में अफरा-तफरी मच गई। स्पीकर ने तुरंत सदन को 12 बजे तक स्थगित कर दिया। दोपहर में सदन दोबारा शुरू हुआ, लेकिन विपक्ष का रुख नहीं बदला।

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नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन जारी रहा। ओम बिरला ने फिर अपील की और कहा “प्रश्नकाल सभी सदस्यों का साझा समय है। आज कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का प्रश्न भी सूचीबद्ध है। सदन की गरिमा बनाए रखें।” लेकिन कोई असर नहीं हुआ। अंततः सदन को सोमवार तक स्थगित कर दिया गया। स्पीकर ने सदस्यों को याद दिलाया कि, सदन जनता के प्रतिनिधियों का मंच है, जहां राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जनता ने आपको चर्चा करने के लिए चुना है, न कि सदन बंद करवाने के लिए।”

पूर्व सेना प्रमुख की किताब पर हंगामा

आपको बता दें कि, सदन में विवाद सोमवार को उस समय शुरू हुआ, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण Four Stars of Destiny के कुछ अंशों का हवाला दिया। राहुल गांधी ने दावा किया कि, किताब में 2020 के भारत-चीन लद्दाख स्टैंड ऑफ के दौरान राजनीतिक नेतृत्व की ओर से स्पष्ट निर्देश न मिलने के कारण सेना को कठिन स्थितियों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा, किताब में पीएम मोदी पर गंभीर आरोप हैं, जैसे रेचिन ला पास के पास चीनी टैंक जब भारतीय सेना की तरफ बढ़ रहे थे, तब भारतीय सेना को निर्देश के लिए दो घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ा। राहुल के बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई और कहा अप्रकाशित किताब या उस पर आधारित मैगजीन आर्टिकल का हवाला सदन में नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह नियम विरुद्ध है। रक्षामंत्री ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

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वेल में आया विपक्ष, स्पीकर पर फेंके कागज

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स्पीकर ने राहुल गांधी को बोलने से रोक दिया, जिससे विपक्ष भड़क गया। इस विवाद की वजह से 3 फरवरी को सदन में भारी हंगामा हुआ। विपक्षी सदस्यों ने कागज फाड़कर स्पीकर की ओर फेंके और आसन की अवमानना की। इसके बाद आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, सी किरण कुमार रेड्डी, अमरिंदर सिंह राजा वॉरिंग, मणिक्कम टैगोर, प्रशांत यादवराव पडोले, डीन कुरियाकोस और सीपीआई(एम) के एस वेंकटेसन शामिल हैं।

विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला और आवाज दबाने की साजिश बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने कहा कि यह सदन की मर्यादाओं का उल्लंघन है। गुरुवार को धन्यवाद प्रस्ताव हंगामे के बीच पारित हो गया, लेकिन लोकसभा में पीएम मोदी का भाषण नहीं हुआ। इसके बाद राज्यसभा में पीएम ने 97 मिनट का भाषण दिया।  यहां भी शुरुआत में विपक्ष ने हंगामा किया और वॉकआउट किया।

दो साल कर रही मंजूरी का इंतजार

जनरल नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ अभी प्रकाशित नहीं हुई है। ये किताब 2024 से रक्षा मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार कर रही है। कारवां मैगजीन में छपे अंशों के अनुसार, किताब में 31 अगस्त 2020 की रात का जिक्र है, जब चीन की सेना रेचिन ला पास की ओर टैंक लेकर बढ़ी थी। इसकी सूचना उत्तरी कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने जनरल नरवणे को सूचना दी। इसके बाद नरवणे ने राजनीतिक नेतृत्व से स्पष्ट आदेश मांगे, लेकिन आदेश के लिए उन्हें दो घंटे से ज्यादा समय तक इंतजार करना पड़ा। किताब में कहा गया है कि, राजनीतिक स्तर पर स्पष्टता की कमी से स्थिति बिगड़ी। राहुल गांधी ने इसे “राजनीतिक नेतृत्व की अनिर्णयता” बताया, जबकि सरकार ने कहा कि यह अपुष्ट और संवेदनशील मुद्दों को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश है। किताब में गलवान घाटी संघर्ष, अग्निवीर योजना और अन्य मुद्दों का भी जिक्र है।

लोकतंत्र की मजबूती पर सवाल

बजट सत्र 2026 का अब तक का काफी समय हंगामे की भेंट चढ़ चुका है, जिससे प्रश्नकाल, शून्यकाल, बजट चर्चा और अन्य महत्वपूर्ण एजेंडे प्रभावित हो रहे हैं। बजट 1 फरवरी को पेश हुआ था, लेकिन अब तक कोई गंभीर बहस नहीं हो पाई। सत्र 13 फरवरी तक रिसेस के लिए स्थगित होगा और 9 मार्च से फिर शुरू होगा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, चीन सीमा विवाद और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर बहस से भाग रही है। वहीं सत्ता पक्ष इसे “राजनीतिक स्टंट” और सदन के समय की बर्बादी” बता रहा है। स्पीकर ओम बिरला ने कहा, सदन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। जनता उम्मीद करती है कि सांसद जनहित के मुद्दों पर बात करें, न कि सदन बंद करवाएं। यह गतिरोध लोकतंत्र की मजबूती पर सवाल खड़े कर रहा है।

 

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