
नई दिल्ली। जब से संसद का बजट सत्र शुरू हुआ है, तब लगातार वहां हंगामा मचा हुआ है। स्पीकर के बार-बार अपील करने के बाद भी आज सत्र के नौवें दिन लोकसभा में हालात सामान्य नहीं हो सके। आज जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। वे वेल के एकत्र होकर नारे लगाने लगे, जिसके चलते लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। वे स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के नारे लगा रहे थे।
इसे भी पढ़ें- लोकसभा में बोले वाणिज्य मंत्री- ट्रेड डील से किसानों को नहीं होगा कोई नुकसान, विपक्ष फैला रहा भ्रम
स्पीकर ने की शांति की अपील
विपक्ष का आरोप है कि, सदन में राहुल गांधी को बोलने से रोका जा रहा है, आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन गलत है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित नहीं किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने लोकतंत्र की हत्या बंद करो, स्पीकर इस्तीफा दो और राहुल गांधी को बोलने दो जैसे नारे लगाए। स्पीकर ओम बिरला ने सदन में कई बार शांति की अपील की। उन्होंने कहा, संसद संवाद, विचार-विमर्श और रचनात्मक चर्चा का मंच है, न कि गतिरोध और हंगामे का।

नियमों के अनुसार हर सदस्य को बोलने का पूरा अधिकार है, लेकिन सदन को ठप करना या लगातार नारेबाजी करना संसदीय परंपराओं और गरिमा के खिलाफ है। बिरला ने विपक्ष से अनुरोध किया कि, वे अपनी बात सदन में शांतिपूर्ण तरीके से रखें और कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने दें। हालांकि, विपक्ष ने स्पीकर की अपील को नजरअंदाज करते हुए नारेबाजी जारी रखी। अब विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) लाने की तैयारी में जुट गया है।
राहुल को बोलने से रोकने का आरोप
रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि, इंडिया गठबंधन में शामिल पार्टियां, खासकर कांग्रेस के नेतृत्व में, स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण आचरण का आरोप लगाते हुए यह कदम उठा रही हैं। यह कदम बजट सत्र के दूसरे चरण में उठाया जा सकता है, क्योंकि नियमों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के लिए कम से कम 20 दिन का समय चाहिए होता है। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला सदन की कार्यवाही में पक्षपात कर रहे हैं, जिससे विपक्षी सांसदों को बोलने का मौका नहीं मिल रहा है।
विशेष रूप से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान बोलने से रोका गया। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देते हुए 2020 के भारत-चीन सीमा टकराव (गलवान और डोकलाम) पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि, डोकलाम में चीनी टैंक घुस आए थे और सरकार की ओर से स्थिति को छिपाया गया।
इसे भी पढ़ें- लोकसभा में बोले वाणिज्य मंत्री- ट्रेड डील से किसानों को नहीं होगा कोई नुकसान, विपक्ष फैला रहा भ्रम
स्पीकर के बयान पर नाराजगी
सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया, लेकिन स्पीकर ने राहुल गांधी को “अप्रकाशित साहित्य” का हवाला देने से रोक दिया और आगे बोलने की अनुमति नहीं दी। इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सदन में हंगामा हुआ, विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और आसन की ओर कागज उछाले। हंगामे के बीच स्पीकर ने अवमानना के आरोप में आठ विपक्षी सांसदों (ज्यादातर कांग्रेस के) को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया।

कांग्रेस ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” करार दिया और दावा किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने से रोका जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि, यह परंपरा का उल्लंघन है और लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। विवाद की दूसरी बड़ी वजह स्पीकर ओम बिरला का 5 फरवरी का बयान है।
पीएम का संबोधन न होने पर नाराजगी
दरअसल, स्पीकर ने सदन में खुलासा किया कि, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा में संबोधन देने से रोका था। बिरला ने कहा कि उन्हें पता चला था कि, कांग्रेस के कुछ सांसद खासकर महिला सांसद पीएम की कुर्सी के पास जाकर अप्रत्याशित और अप्रिय घटना कर सकते थे। उन्होंने कहा,अगर ऐसा होता तो लोकतंत्र के लिए काला दिन साबित होता। सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए मैंने पीएम से अनुरोध किया कि वे सदन में न आएं। पीएम मोदी को 4 फरवरी को धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, लेकिन आखिरी समय पर उनका संबोधन रद्द कर दिया गया और उन्होंने राज्यसभा में ही जवाब दिया। इस बयान पर विपक्ष ने तीखी आलोचना की। कांग्रेस ने इसे बेबुनियाद और राजनीतिक साजिश बताया।
अविश्वास प्रस्ताव में उठाए जाएंगे ये मुद्दे
कांग्रेस महिला सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखकर कहा कि, पीएम मोदी का सदन न आना डर का प्रतीक है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, लोकसभा में विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं बची है। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता कुछ भी बोल नहीं पा रहे, जबकि सत्ता पक्ष पर कोई रोक नहीं। विपक्ष का कहना है कि, स्पीकर द्वारा महिला सांसदों का नाम विशेष रूप से लेना, सत्ता पक्ष के कुछ सांसदों को विशेषाधिकार देना और विपक्षी सांसदों को निलंबित करना पक्षपात का स्पष्ट प्रमाण है। विपक्षी स्रोतों के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव में ये सभी मुद्दे शामिल किए जाएंगे। लेफ्ट फ्रंट के वरिष्ठ सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने पुष्टि की कि खड़गे निवास पर हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।
विपक्ष के पास नहीं है बहुमत
हालांकि, विपक्ष के पास लोकसभा में बहुमत नहीं। ऐसे में यह प्रस्ताव प्रतीकात्मक ही होगा, यह सरकार और स्पीकर पर सिर्फ दबाव बढ़ाने का काम करेगा। कांग्रेस ने कहा, कार्रवाई का इंतजार कीजिए। सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि स्पीकर ने सदन की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सही कदम उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष हंगामा करके सदन नहीं चलने दे रहा और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा से भाग रहा है। विपक्ष के हंगामे के कारण कई दिनों से लोकसभा की कार्यवाही ठप पड़ी है, जिससे महत्वपूर्ण चर्चाएं प्रभावित हो रही हैं।
इसे भी पढ़ें- चुनावी मोड में अखिलेश यादव, सभी लोकसभा-राज्यसभा सांसदों की आज बुलाई बैठक



