
नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव तैयारियां तेज हो गई हैं। सभी पार्टियां चुनाव जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने का फैसला लिया है। पार्टी इसे साल मार्च के महीने में चुनावी अभियान की शुरुआत करेगी।
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पीडीए भागीदारी रैली
खबर है कि, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अध्यक्ष अखिलेश यादव 28 मार्च 2026 को नोएडा से 2027 के विधानसभा चुनाव प्रचार का आगाज करेंगे। इस दिन नोएडा में एक बड़ी पीडीए भागीदारी रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत करने और टिकट वितरण की रणनीति का ऐलान होने की संभावना है। यह रैली सपा के लिए न केवल प्रचार का शुरुआती बिंदु होगी, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी स्थिति मजबूत करने का महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगी।
2027 में बेहतर परिणाम की उम्मीद

अखिलेश यादव लगभग 11 महीने पहले ही 2027 के विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकने जा रहे हैं। नोएडा (गौतमबुद्ध नगर जिला) को चुनना कोई संयोग नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में इस जिले की सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कब्जा जमाया था। सपा को यहां एक भी सीट नहीं मिली थी। पश्चिमी यूपी में सपा का प्रदर्शन कमजोर रहा है, जहां यादव वोटरों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। पार्टी अब उन क्षेत्रों पर फोकस कर रही है, जहां उसका वोट बैंक कमजोर है, ताकि 2027 में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें।
पीडीए फार्मूले पर लड़ेगी विधानसभा चुनाव
सपा का मानना है कि, नोएडा जैसे शहरी-औद्योगिक क्षेत्र में विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर पीडीए वोटबैंक को एकजुट किया जा सकता है। रैली के जरिए पार्टी पीडीए फॉर्मूले को और मजबूत करेगी, जिसमें पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक (मुख्य रूप से मुस्लिम) शामिल हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में पीडीए रणनीति से सपा को बड़ा फायदा हुआ था और अब विधानसभा स्तर पर इसे और विस्तार देने की तैयारी है।
28 मार्च को नोएडा में होने वाली इस रैली को ‘पीडीए भागीदारी रैली’ नाम दिया गया है। इसमें अखिलेश यादव मुख्य वक्ता होंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, रैली में पीडीए फॉर्मूले के तहत टिकट वितरण की रणनीति का खुलासा हो सकता है।
बीजेपी को देगी चुनौती
सपा पहले से ही पीडीए को अपनी मुख्य राजनीतिक पहचान बना चुकी है, जो मुस्लिम-यादव (एमवाई) फॉर्मूले से आगे बढ़कर अधिक समावेशी बन गई है। इस रैली में विभिन्न जातियों और समुदायों के प्रतिनिधियों को मंच पर बुलाया जाएगा, ताकि संदेश स्पष्ट हो कि सपा अब सभी पिछड़े वर्गों की पार्टी है। इसके अलावा, टिकट वितरण में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का फॉर्मूला और स्पष्ट किया जा सकता है। पार्टी का लक्ष्य है कि 2027 में पीडीए वोटों का एकजुट करना और बीजेपी की ‘सबका साथ, सबका विकास’ वाली छवि को चुनौती देना।
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गुर्जर नेताओं के साथ बैठक
सपा की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर समाज को साधना है। इस क्षेत्र में गुर्जर, मुस्लिम और दलित वोट बैंक मजबूत है, लेकिन यादव वोटर कम हैं। गुर्जर समाज योगी सरकार से नाराज बताया जा रहा है। उनका आरोप है कि, आबादी के अनुपात में सरकार में उनका प्रतिनिधित्व कम है। सपा इस नाराजगी का फायदा उठाना चाहती है। मार्च के पहले हफ्ते में दादरी (ग्रेटर नोएडा) में गुर्जर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें 142 विधानसभाओं से गुर्जर प्रतिनिधि शामिल होंगे।
हाल ही में ग्रेटर नोएडा के शफीपुर गांव में 30 जिलों के गुर्जर नेताओं की बैठक हुई थी, जहां रैली की तैयारियां चर्चा में रहीं। सपा का दावा है कि गुर्जर समाज के साथ जुड़ाव से पश्चिमी यूपी की कई सीटें जीती जा सकती हैं। मुस्लिम वोटर पहले से ही सपा के मजबूत समर्थक हैं, जबकि दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश जारी है।
‘अग्निपरीक्षा’ है 2027 का चुनाव
सपा 2027 चुनाव को ‘अग्निपरीक्षा’ बता रही है और उसी हिसाब से तैयारी करने की योजना बना रही है। अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं पीडीए फॉर्मूला ही बीजेपी को प्रदेश की सत्ता से बेदखल करेगा। लोकसभा चुनाव में पीडीए की सफलता के बाद पार्टी अब विधानसभा स्तर पर इसे लागू करने में जुटी है। रैली के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ ही भाजपा को विपक्षी की एकता और उसकी ताकत दिखाना है। अखिलेश की रैली को लेकर बीजेपी की तरफ से अभी कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बीजेपी द्वारा पश्चिमी यूपी में गुर्जर और अन्य ओबीसी समुदायों पर फोकस बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है।
2027 के चुनाव में उठाए जाएंगे ये मुद्दे
समाजवादी पार्टी की ये रैली 2027 के महासंग्राम की शुरुआत का संकेत है। इस महासंग्राम में जातीय समीकरण, विकास और सामाजिक न्याय समेत कई और प्रमुख मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जायेगा। नोएडा रैली की सफलता सपा के लिए बेहद अहम है। इस रैली के जरिये अगर वह पीडीए वोटबैंक एकजुट कर लेती है, तो पश्चिमी यूपी में बीजेपी की पकड़ कमजोर कर सकती है। इसके लिए सपा अभी से ही जमीनी स्तर पर बैठकें, सम्मेलन और रैलियां कर रही है। सपा जिस तरह से इस क्षेत्र को साधने में जुटी है, उससे स्पष्ट है कि ये क्षेत्र राजनीतिक लिहाज से उसके लिए काफी अहम है।
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