
नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने बेहद कठिन हालात से निकलकर अपनी पहचान बनाई है। गरीबी, संघर्ष और अभाव के बीच पले-बढ़े इन आउटसाइडर्स ने मेहनत और धैर्य के दम पर न सिर्फ बॉलीवुड में जगह बनाई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने में भी कामयाबी हासिल की। ऐसी ही प्रेरक कहानी है 31 साल के एक अभिनेता की, जिसने बचपन में मां को दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करते और पिता को सड़कों पर नारियल बेचते देखा, लेकिन आज वही चेहरा इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर भारत का नाम रोशन कर रहा है।
कांस से ऑस्कर तक पहुंची फिल्म, फिर टूट गया सपना
यह संघर्षशील अभिनेता कोई और नहीं बल्कि विशाल जेठवा हैं। विशाल की फिल्म होमबाउंड को कांस फिल्म फेस्टिवल में जबरदस्त सराहना मिली थी और वहां इसे 9 मिनट का स्टेंडिंग ओवेशन मिला। इसके बाद यह फिल्म भारत की ओर से ऑस्कर 2026 के लिए शॉर्टलिस्ट भी हुई। हालांकि, ऑस्कर नॉमिनेशन के बेहद करीब पहुंचकर फिल्म अंतिम सूची में जगह नहीं बना सकी, लेकिन विशाल के करियर के लिए यह एक बड़ा मुकाम साबित हुआ।
किरदार से जुड़ी अपनी असली जिंदगी की कहानी
होमबाउंड में विशाल का किरदार ऐसे युवक का है, जिसकी आंखों में बड़े सपने हैं, लेकिन आर्थिक हालात बेहद कमजोर हैं। इस फिल्म को लेकर विशाल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह खुद गरीब परिवार से आते हैं, इसलिए किरदार से गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि कांस में वह आत्मविश्वास से इसलिए खड़े हो पाए, क्योंकि उन्हें अपनी जड़ों पर गर्व है।
घर-घर काम करती थीं मां, पिता बेचते थे नारियल पानी
विशाल जेठवा ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर खुलकर बताया है कि उनकी मां लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा किया करती थीं और एक समय सुपरमार्केट में सैनिटरी पैड भी बेचे। वहीं उनके पिता नारियल पानी बेचकर परिवार का गुजारा करते थे। विशाल का कहना है कि उन्होंने बचपन में यह सब बहुत करीब से देखा है और वही अनुभव आज उनके अभिनय में सच्चाई लाता है। उन्होंने माना कि आज उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है और यह उनके लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं है।
बिना क्रेडिट फिल्म से शुरुआत, मर्दानी-2 से बदली किस्मत
विशाल जेठवा ने साल 2014 में फिल्म डर @ द मॉल से अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन इस फिल्म में उन्हें क्रेडिट तक नहीं मिला। इसके बाद 2017 में उन्होंने इरफान खान की फिल्म में एक चाय बेचने वाले का छोटा सा किरदार निभाया। लंबे संघर्ष के बाद विशाल को असली पहचान रानी मुखर्जी की फिल्म मर्दानी-2 से मिली, जहां उन्होंने एक खौफनाक सीरियल किलर का किरदार निभाया। उनके इस अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा और यहीं से उनके करियर की दिशा बदल गई।
संघर्ष से स्टारडम तक का सफर
झुग्गियों और तंग गलियों से निकलकर कांस और ऑस्कर जैसे मंच तक पहुंचने वाले विशाल जेठवा आज उन कलाकारों में गिने जाते हैं, जिनकी कहानी लाखों युवाओं को प्रेरणा देती है। उनका सफर यह साबित करता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, मेहनत और जिद के दम पर सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है।



