नई दिल्ली। महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन यानी UTI की समस्या आम मानी जाती है। आमतौर पर कम पानी पीना, साफ-सफाई में लापरवाही या गंदे शौचालय का इस्तेमाल इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजाना इस्तेमाल किया जाने वाला टॉयलेट पेपर भी यूटीआई की वजह बन सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक गलत किस्म के टॉयलेट पेपर से स्किन में जलन, रैशेज और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर मूत्र संक्रमण की समस्या पैदा कर सकता है।

टॉयलेट पेपर की क्वालिटी से जुड़ा है महिलाओं का स्वास्थ्य
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार टॉयलेट पेपर की क्वालिटी महिलाओं के मूत्रजनन स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है। सस्ते या खुशबूदार टॉयलेट पेपर में ब्लीचिंग एजेंट और केमिकल्स होते हैं, जो यूरिनरी ट्रैक्ट के आसपास की त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं। इस जलन के कारण ई.कोलाई जैसे बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और UTI का खतरा बढ़ जाता है।
घटिया टॉयलेट पेपर से कैसे बढ़ता है UTI का रिस्क
अगर टॉयलेट पेपर बहुत पतला, ज्यादा मोटा या आसानी से फटने वाला हो, तो सफाई के दौरान उसके छोटे-छोटे टुकड़े त्वचा पर रह जाते हैं। ये टुकड़े नमी और बैक्टीरिया को फंसा लेते हैं, जिससे संक्रमण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। सेंसिटिव स्किन वाली महिलाएं, डायबिटीज से पीड़ित लोग, मेनोपॉज के दौर से गुजर रही महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा देखा जाता है। वहीं, रंगीन और सुगंधित टॉयलेट पेपर वजाइनल पीएच बैलेंस को बिगाड़ सकते हैं, जिससे यूरिन इंफेक्शन का जोखिम और बढ़ जाता है।
UTI से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां
यूटीआई से बचने के लिए हमेशा मुलायम, बिना खुशबू और बिना रंग वाले टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल करें। बेहतर होगा कि वर्जिन पल्प या हाई क्वालिटी बैंबू से बने टॉयलेट पेपर को चुनें, जो त्वचा के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। सफाई करते समय हमेशा आगे से पीछे की ओर पोंछें, ताकि बैक्टीरिया यूरिनरी एरिया तक न पहुंचें। ज्यादा जोर से रगड़ने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और रोजाना पर्सनल हाइजीन का खास ध्यान रखें।
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