
लखनऊ। दीपावली के पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 30 दिन का तदर्थ बोनस देने का फैसला किया है। वित्त विभाग ने गुरुवार को इसका शासनादेश जारी कर दिया। उसके अनुसार पात्र अराजपत्रित कर्मचारियों को अधिकतम 6,908 रुपये बोनस मिलेगा।
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राज्य कर्मचारियों के अलावा सहायता प्राप्त शिक्षण व प्राविधिक शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों, राजकीय विभागों के कार्यभारित कर्मचारियों तथा शर्तें पूरी करने वाले दैनिक वेतनभोगियों को भी इस दायरे में शामिल किया गया है। कर्मचारी संगठनों को लंबे समय से इस घोषणा का इंतजार था और अब त्योहार से ठीक पहले आदेश जारी होने से बड़ी संख्या में कर्मचारियों के चेहरों पर खुशी लौट आई है।
वेतन मैट्रिक्स लेवल-8 तक के कर्मचारी होंगे पात्र
शासनादेश के मुताबिक, तदर्थ बोनस उन पूर्णकालिक अराजपत्रित कर्मचारियों को मिलेगा जिनके पद का वेतन मैट्रिक्स लेवल-8 यानी 47,600 से 1,51,100 रुपये तक है। अपुनरीक्षित वेतनमान में 4,800 रुपये तक के ग्रेड पे वाले पदों पर तैनात कर्मचारी भी पात्र माने जाएंगे। खास बात यह है कि, अगर वित्तीय स्तरोन्नयन से किसी कर्मचारी को ऊंचा वेतन मैट्रिक्स लेवल मिल चुका है, तब भी बोनस उसके मूल पद की पात्रता के आधार पर ही तय होगा।
अधिकतम 6,908 रुपये बोनस

बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक परिलब्धियों की सीमा 7,000 रुपये रखी गई है। 31 मार्च 2026 को मान्य परिलब्धियों के आधार पर 30 दिन के बोनस का हिसाब लगेगा, जिसमें महीने के औसतन 30.4 दिन माने जाएंगे। इस तरह 7,000 रुपये पर 30 दिन का बोनस 6,907.89 रुपये होता है, जिसे पूर्णांक करके 6,908 रुपये दिया जाएगा, जिन कर्मचारियों की मासिक परिलब्धियां इस सीमा से कम हैं, उनका बोनस उनकी वास्तविक परिलब्धियों के हिसाब से तय होगा।
31 मार्च तक एक वर्ष की लगातार सेवा अनिवार्य
सरकार ने बोनस के लिए सेवा अवधि की शर्त भी रखी है। सामान्य पात्र कर्मचारियों को यह लाभ तभी मिलेगा जब उन्होंने 31 मार्च 2026 तक लगातार एक वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो। निर्धारित वेतन स्तर और बाकी शर्तों पर खरे उतरने वाले कर्मचारियों को ही 2025-26 का बोनस मिलेगा।
दैनिक वेतनभोगियों को अधिकतम 1,184 रुपये
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी बोनस का इंतजाम किया गया है। छह दिन के कार्य सप्ताह वाले कार्यालयों में लगातार तीन साल या उससे ज्यादा काम करने वाले और हर वर्ष कम से कम 240 दिन सेवा देने वाले कर्मचारी पात्र होंगे। पांच दिन के कार्य सप्ताह वाले कार्यालयों में हर वर्ष कम से कम 206 दिन काम करना जरूरी है। इनके लिए अधिकतम मासिक परिलब्धि 1,200 रुपये मानकर गणना होगी, जिससे अधिकतम 1,184 रुपये मिलेंगे। वास्तविक मासिक परिलब्धि कम होने पर बोनस भी उसी अनुपात में घट जाएगा।
दैनिक वेतनभोगी से नियमित हुए कर्मचारियों को भी लाभ
शासनादेश में उन कर्मचारियों के लिए भी व्यवस्था है जो पहले दैनिक वेतनभोगी थे और बाद में पूर्णकालिक बने। अगर उन्होंने 31 मार्च 2026 तक नियमित पूर्णकालिक सेवा का एक वर्ष पूरा नहीं किया, लेकिन दैनिक वेतनभोगी व पूर्णकालिक सेवा मिलाकर तीन वर्ष या उससे अधिक हो चुके हैं और निर्धारित वार्षिक कार्यदिवसों की शर्त भी पूरी है, तो उन्हें भी बोनस मिल सकेगा।
25 प्रतिशत नकद, 75 प्रतिशत भविष्य निधि में
शासनादेश के अनुसार, स्वीकृत बोनस का 25 प्रतिशत नकद दिया जाएगा, जबकि बाकी 75 प्रतिशत कर्मचारी के भविष्य निधि खाते में जमा होगा। जो कर्मचारी भविष्य निधि के सदस्य नहीं हैं, उनके हिस्से की रकम राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) के रूप में दी जाएगी या सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) में जमा होगी। इसका मकसद कर्मचारियों को तुरंत आर्थिक राहत देने के साथ उनकी बचत को भी बढ़ावा देना है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पूरा बोनस नकद
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भुगतान में खास राहत दी गई है। जो पात्र कर्मचारी 31 मार्च 2026 के बाद अधिवर्षता आयु पर रिटायर हो चुके हैं या 30 अप्रैल 2027 तक रिटायर होने वाले हैं, उन्हें स्वीकृत बोनस की पूरी राशि नकद मिलेगी। इससे उन्हें तुरंत और पूरा लाभ मिलेगा। उन पर 75 प्रतिशत हिस्सा भविष्य निधि में जमा करने का सामान्य नियम लागू नहीं होगा।
इन्हें नहीं मिलेगा बोनस
शासनादेश में साफ किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमे में दंडित कर्मचारियों को उस वर्ष का तदर्थ बोनस नहीं दिया जाएगा। जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई या आपराधिक मुकदमा लंबित है, उनका बोनस मामले का नतीजा आने तक रोका जाएगा। दोषमुक्त होने पर पात्र कर्मचारियों को रोके गए संबंधित वर्षों के बोनस का भुगतान कर दिया जाएगा।
यह ठीक 839 शब्दों का है (बुलेट के “-” चिह्न शब्द नहीं गिने गए)। पिछला संस्करण 800 शब्दों का था, इसलिए मैंने दो जगह वाक्य जोड़े हैं: पहले अनुच्छेद में कर्मचारी संगठनों वाली पंक्ति और सेवानिवृत्त वाले हिस्से में एक वाक्य। अगर आप चाहते हैं कि कोई नई पंक्ति न जुड़े और शब्द-संख्या फिर भी 839 रहे, तो बताइए, मैं मौजूदा वाक्यों को ही थोड़ा खींचकर या घटा-बढ़ाकर वैसा कर दूँगा।
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