माटी कला महोत्सव पहुंचे मंत्री धर्मवीर प्रजापति, कुम्हारों का बढ़ाया हौसला, की खरीदारी

लखनऊ। दीपावली से पहले मिट्टी के दीयों और बर्तनों की रौनक राजधानी के डालीबाग में बिखरी है। यहां लगे माटी कला महोत्सव का होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मवीर प्रजापति ने अवलोकन किया। उन्होंने खुद खरीदारी कर कुम्हारों का उत्साह बढ़ाया और लोगों से मिट्टी के बर्तन अपनाने की अपील की।

इसे भी पढ़ें- राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद पहली बार अयोध्या रवाना हुए हर्षवर्धन सिंह, लखनऊ में हुआ जोरदार स्वागत

मंत्री ने किया माटी कला का अवलोकन 

उत्तर प्रदेश के होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मवीर प्रजापति ने आज लखनऊ के डालीबाग स्थित माटी कला महोत्सव का अवलोकन किया। उन्होंने मेले के अलग-अलग स्टालों पर सजे मिट्टी के आकर्षक और उपयोगी उत्पादों की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने मिट्टी के बर्तनों और अन्य सामान की खरीदारी भी की।

Mati Kala Mahotsav

मंत्री ने महोत्सव में मौजूद कारीगरों और शिल्पकारों से बातचीत की और उनके हुनर व मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि, माटी कला भारतीय परंपरा, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है।

2020 से हर साल हो रहा आयोजन

धर्मवीर प्रजापति ने बताया कि, वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री ने उन्हें माटी कला बोर्ड का अध्यक्ष बनाया था। इसके बाद से वर्ष 2020 से हर साल यहां मेले का आयोजन हो रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से दुकानदार आते हैं।

उन्होंने कहा कि यहां खरीदारी करने से दुकानदारों का हौसला बढ़ता है और उनकी आय में इजाफा होता है, जिससे उनकी दीपावली भी बेहतर तरीके से मन पाती है। मंत्री के अनुसार, मेले में दीपावली की सजावट से लेकर पूजन सामग्री तक सारा सामान एक ही जगह उपलब्ध है।

लाखों परिवारों की आजीविका का आधार

मंत्री ने कहा कि मिट्टी के बर्तन बनाना सिर्फ पारंपरिक कला नहीं है, बल्कि लाखों कुम्हार परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन भी है। ऐसे महोत्सवों से कारीगरों को अपने उत्पाद दिखाने और बेचने का बेहतर मौका मिलता है। साथ ही आम लोग पारंपरिक हस्तशिल्प और मिट्टी के उत्पादों की विविधता से रूबरू होते हैं।

Mati Kala Mahotsav

प्रजापति ने लोगों से रोजमर्रा की जिंदगी में मिट्टी के बर्तनों और अन्य उत्पादों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे पारंपरिक विरासत बची रहेगी और स्थानीय कारीगरों व कुम्हार परिवारों को आर्थिक मजबूती मिलेगी। उनके मुताबिक, मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाना और खाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।

स्वदेशी अपनाने की अपील 

कारीगरों का हौसला बढ़ाते हुए मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पारंपरिक कला और शिल्प को बढ़ावा देने और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पाद अपनाने और स्थानीय कारीगरों के सामान को प्राथमिकता देने का भी आह्वान किया।

 

इसे भी पढ़ें- ‘तीसरी बार यूपी में सरकार बनी तो लागू करेंगे UCC…, लखनऊ में अमित शाह का बड़ा ऐलान

Related Articles

Back to top button