
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर में बाल चिकित्सालय के निर्माण में बरती जा रही हीला-हवाली पर नाराजगी जताते हुए बड़ा एक्शन लिया है। यूपी सिडको ने बाल चिकित्सालय का निर्माण कार्य कर रही फर्म आरसीबी इन्फ्राकान्स का अनुबंध निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सिडको ने ये अनुबंध जन उपयोगी निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण न करने की वजह से निरस्त किया है।
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5 साल के लिए ब्लैक लिस्ट हुई कंपनी
यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक संजीव सिंह ने फर्म के पंजीकरण के दौरान फर्जी दस्तावेज पेश करने और फर्म निदेशक के खिलाफ दर्ज मुकदमों की जानकारी छिपाने के आरोप में कंपनी को पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इसके अलावा अस्पताल निर्माण में हुई देरी और लापरवाही के चलते फर्म के दूसरे चरण के अनुबंध को रद्द कर दिया गया है और 55 लाख रुपये की सिक्योरिटी व परफॉर्मेंस गारंटी जब्त कर ली गई है। काम की अहमियत को देखते हुए बाल चिकित्सालय का बाकी निर्माण कार्य निगम खुद डीसीयू पैटर्न पर जल्द से जल्द पूरा कराएगा। इस जिम्मेदारी के लिए मुख्य अभियंता (पूर्व) एके निर्मल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
अभियंता पर विभागीय कार्रवाई
एमडी ने आदेश दिया कि निगम के अभियंताओं द्वारा फर्म को दी गई अग्रिम राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाए। बाल चिकित्सालय के निर्माण में लापरवाही बरतने और काम पूरा कराने से पहले ही फर्म को आंशिक भुगतान जारी करने के दोषी तत्कालीन अधीक्षण अभियंता राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता मनीष कुमार श्रीवास्तव तथा सहायक अभियंता धर्म शंकर त्रिपाठी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जा रही है।
एमडी संजीव सिंह ने कहा कि, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म का पंजीकरण कराने और गलत निविदा प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रथमदृष्टया दोषी पूर्व अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता (सेवानिवृत्त) पंकज चोपड़ा के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल निर्माण के लिए त्रुटिपूर्ण टेंडर प्रक्रिया अपनाकर अनुबंध करने वाले तत्कालीन अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता (पूर्व) केजी दुबे के विरुद्ध भी विभागीय जांच चल रही है।
मुख्य अभियंता से छीने गए कार्य
फर्मों के पंजीकरण और नवीनीकरण से जुड़े सभी कार्य मुख्य अभियंता मुख्यालय केजी दुबे से तुरंत प्रभाव से छीन लिए गए हैं। इस मामले को देखते हुए निगम में फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और अन्य कागजातों के आधार पर पंजीकरण कराने वाली अन्य कंपनियों की भी पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।
दोषी पाए जाने पर उन्हें भी ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। सरकार ने पूरे राज्य में चल रहे निर्माण कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। जनहित से जुड़े कार्यों में देरी या लापरवाही करने वाली फर्मों और अभियंताओं पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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