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वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के संकल्प को बताया अहम
लखनऊ। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुए कामों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि 2017 में योगी सरकार बनने के बाद विकास, कानून-व्यवस्था और सुशासन के मोर्चे पर प्रदेश को नई ऊर्जा मिली है।
कोविन्द ने कहा, मुख्यमंत्री ने यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सपने के अनुरूप ‘उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश’ बनाने की कोशिशों को अभूतपूर्व गति दी है। उन्होंने भरोसा जताया कि चल रही विकास योजनाओं का लाभ रोजगार, शिक्षा और आर्थिक तरक्की के रूप में समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगा।
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पुस्तक विमोचन समारोह में बोले पूर्व राष्ट्रपति
कोविन्द बुधवार को अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा, मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और मेट्रो जैसी बड़ी परियोजनाओं से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के बीच आवाजाही आसान हुई है। सरकारी योजनाओं के असरदार क्रियान्वयन से अंत्योदय की भावना के मुताबिक गांवों के परिवारों और समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
पक्के घर ने दिया सम्मान और सुरक्षा
अपने बचपन को याद करते हुए कोविन्द ने बताया कि, कानपुर देहात के परौंख गांव में उनका घर बहुत साधारण था और बारिश में छत से पानी टपकता था। 2017 में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उन्हें उन परिवारों की याद आई, जो आज भी बेहतर कल का सपना देखते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार की कोशिशों से गरीब परिवारों को पक्का मकान मिला है और इसके साथ सम्मान और सुरक्षा का भरोसा भी मिला है। टपकती छत के नीचे जिंदगी गुजारने वाले ही पक्के घर की असली कीमत समझ सकते हैं।
पिता से मिली शिक्षा की सीख
कोविन्द ने बताया कि उनके पिता शिक्षा की अहमियत समझते थे। उन्होंने परिवार की खेती की जमीन अपने पास रखने के बजाय बेटों की पढ़ाई को तरजीह दी। ईमानदारी, करुणा, उदारता और न्यायप्रियता जैसे मूल्य उन्हें पिता से ही मिले। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि परौंख से राष्ट्रपति भवन तक का उनका सफर सिर्फ निजी उपलब्धि नहीं है। यह भारतीय गणतंत्र, संविधान के आदर्शों और करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं की जीत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में साधारण परिवार से आया व्यक्ति भी अपनी काबिलियत और मेहनत से सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। इसी व्यवस्था में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और उन्हें भी राष्ट्रपति पद तक पहुंचने का मौका मिला।
महाकुंभ ने दिखाई भारत की आध्यात्मिक ताकत
कोविन्द ने उत्तर प्रदेश को प्रभु श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान बुद्ध, महावीर, संत कबीर और संत रविदास की धरती बताया। उन्होंने कहा कि 2025 के प्रयागराज महाकुंभ ने दुनिया को भारत की आध्यात्मिक चेतना, आस्था और सामाजिक समरसता की ताकत का अहसास कराया। उनके अनुसार भारत की प्राचीन परंपराएं आज भी करोड़ों लोगों को एक सूत्र में बांधने की क्षमता रखती हैं।
युवाओं से राजनीति में आने का आह्वान
पूर्व राष्ट्रपति ने प्रदेश के युवाओं से राजनीति, शासन-प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिस्सेदारी केवल वोट डालने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अच्छे शासन के लिए ईमानदार, योग्य और संवेदनशील लोगों का राजनीति में आना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्रसेवा की भावना से काम करने और कभी हार न मानने की सीख दी।
वंचितों की आवाज रहे कोविन्द- डिप्टी सीएम
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कोविन्द का अभिनंदन करते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचकर भी उन्होंने अपनी सहजता और सरलता नहीं छोड़ी। उनके मुताबिक गरीबों, पीड़ितों और वंचितों की आवाज बनना कोविन्द के व्यक्तित्व और कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा रहा है। पाठक ने कहा कि समाज में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं, जो वंचित वर्गों की समस्याएं समझने के साथ उनका समाधान जमीन पर उतारने की कोशिश भी करते हैं।

उन्होंने कहा कि कोविन्द ने संसद में रहते हुए लगातार पीड़ितों और वंचितों की आवाज उठाई। बिहार के राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने अपनी कार्यशैली से अलग छाप छोड़ी। पाठक ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्य भारतीय गणतंत्र के इतिहास में अहम जगह रखेंगे। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर बनी समिति के अध्यक्ष के तौर पर उनकी भूमिका को भी उन्होंने उल्लेखनीय बताया।
केशव मौर्य बोले- पद बड़ा, पर अहंकार नहीं
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सार्वजनिक जीवन सबसे कठिन और जिम्मेदारी भरा क्षेत्र है, जो व्यापक पहचान भी देता है। उनके अनुसार इसमें व्यक्ति का पद कितना भी ऊंचा हो, उसे शुचिता बनाए रखनी चाहिए और अहंकार से दूर रहना चाहिए। मौर्य ने कहा कि कोविन्द का जीवन इसका उदाहरण है कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचकर भी व्यक्ति अपने मूल विचारों, संस्कारों और सहजता को कायम रख सकता है।
मौर्य ने बताया कि वे कोविन्द को तब से जानते हैं, जब वे राज्यसभा सदस्य और उत्तर प्रदेश भाजपा के महामंत्री थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद जब कोविन्द अपने गृह नगर कानपुर आए, तो उन्होंने अपने गुरु के चरण छूकर संस्कारों के प्रति निष्ठा दिखाई। देश के प्रथम नागरिक बनने के बाद भी उन्होंने पुराने साथियों और परिचितों से आत्मीय रिश्ते बनाए रखे और उनके व्यवहार में पद की वजह से न कोई दूरी दिखी, न अहंकार।
जमीन से जुड़े रहे कोविन्द- सतीश महाना
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि लोकतंत्र में राष्ट्रपति से बड़ा कोई संवैधानिक पद नहीं होता, लेकिन इतनी ऊंचाई पर पहुंचकर भी कोविन्द सदैव जमीन से जुड़े रहे। उनके अनुसार कोविन्द का जीवन सादगी, विनम्रता, दृढ़ संकल्प और आम लोगों से आत्मीय जुड़ाव की प्रेरक मिसाल है। महाना ने कहा कि उनके पास कोविन्द से जुड़ी कई यादें हैं, जो उनकी सहजता और संवेदनशीलता को दर्शाती हैं।
महाना ने इच्छा जताई कि कोविन्द की पुस्तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के सभी सदस्यों तक पहुंचे, ताकि वे भी उनके जीवन, संघर्ष और अनुभवों से परिचित हो सकें। इसके लिए उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति से विधानसभा सदस्यों के लिए 500 पुस्तकें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया और कहा कि इनका पूरा मूल्य वे खुद चुकाएंगे।
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