
बीते कुछ दर्शकों में भोजपुरी इंडस्ट्री ने लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। खासकर उत्तर भारत, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग भोजपुरी फिल्मों को देखना पसंद करते हैं। लाखों लोग निरहुआ, खेसारी लाल यादव, पवन सिंह जैसे सुपरस्टार्स की फिल्मों को दिल खोलकर देखते हैं, उनके गानों को सुनना पसंद करते है। इनके शो हाउसफुल होते हैं, गाने सुपरहिट होते हैं, लेकिन फिर भी इस इंडस्ट्री में बड़े-बड़े प्रोड्यूसर्स और कॉरपोरेट निवेशक कदम क्यों नहीं रखते? यह सवाल लंबे समय से चर्चा में रहा है। अब भोजपुरी सिनेमा के सबसे बड़े सितारे दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने खुद इसकी वजह बताई है
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पैसे का नहीं मिलता सही हिसाब
हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में निरहुआ ने खुलासा किया कि, भोजपुरी सिनेमा की असली समस्या दर्शकों की कमी नहीं है, बल्कि कमाई के सही हिसाब-किताब की कमी है। उन्होंने कहा, लोग अक्सर पूछते हैं कि जब भोजपुरी सिनेमा का दर्शक सबसे ज्यादा है, तो इंडस्ट्री इतनी बड़ी क्यों नहीं बनी? इसका जवाब बहुत साफ है, पैसों का सही हिसाब नहीं मिलता। निरहुआ का कहना है कि, पहले के दौर में प्रोड्यूसर्स बड़ी रकम लगाकर फिल्में बनाते थे, थिएटर्स में रिलीज करते थे, लेकिन बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का पूरा पैसा उन्हें कभी वापस नहीं मिल पाता था।
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निरहुआ ने विशेष रूप से बिहार जैसे राज्यों का जिक्र किया, जहां सिंगल स्क्रीन थिएटर्स में टिकट बिक्री का कोई साफ-सुथरा रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था। प्रोड्यूसर्स फिल्म को थिएटर मालिकों को देते थे, लेकिन कलेक्शन का हिसाब किताब नहीं मिलता। कई बार तो फिल्म हिट होने के बावजूद मेकर्स को नुकसान होता था। उन्होंने बताया कि, यह समस्या सिर्फ भोजपुरी इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है बल्कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भी कई बार ये समस्या देखने को मिलती है। निरहुआ ने कहा कि, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लोग भी बिहार में पैसा लगाने से डरते हैं, क्योंकि वहां से सही हिसाब नहीं मिलता। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री वाले भी रोते हैं कि, बिहार में पैसा डालो, तो वापस कुछ नहीं मिलता
पैसे डूबने का डर
निरहुआ कहते हैं कि, इस वजह से प्रोड्यूसर्स में डर बैठ गया। उनका कहना है कि, फिल्म हिट हो जाती थी, लेकिन अगली फिल्म के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो जाता था। बड़े निवेशक सोचते थे कि, अगर पैसा डूब जाएगा, तो क्या होगा? इसी अनिश्चितता ने भोजपुरी सिनेमा को बड़े बजट और हाई-क्वालिटी प्रोडक्शन से दूर रखा। अधिकांश फिल्में 1-2 करोड़ के बजट में बनती रहीं, जबकि दक्षिण भारतीय या बॉलीवुड फिल्में 50-100 करोड़ तक के बजट में बनती हैं।
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उन्होंने कहा कि अब स्थिति बदल रही है। मल्टीप्लेक्स थिएटर्स के आने और ऑनलाइन टिकट बुकिंग की वजह से कलेक्शन का पूरा और पारदर्शी हिसाब मिलने लगा है। अब प्रोड्यूसर्स को उनका हक मिल रहा है। वे बड़े बजट की फिल्में बनाने का हौसला रख पा रहे हैं। निरहुआ ने जोर देकर कहा। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे YouTube, OTT और सोशल मीडिया पर भी भोजपुरी कंटेंट की पहुंच बढ़ी है, जिससे अतिरिक्त कमाई के रास्ते खुले हैं। इस बदलाव से इंडस्ट्री में नई ऊर्जा आई है। निरहुआ खुद कई हाई-बजट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं और मानते हैं कि अगर सिस्टम पूरी तरह साफ-सुथरा हो गया, तो भोजपुरी सिनेमा न सिर्फ उत्तर भारत बल्कि पूरे देश और विदेश में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ भोजपुरी सिनेमा के उन चुनिंदा सितारों में से हैं, जिन्होंने इस इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। गाजीपुर जिले के टंडवा गांव से ताल्लुक रखने वाले निरहुआ ने अपनी दमदार एक्टिंग, डांस और गायकी से दर्शकों का दिल जीता। उनकी फिल्में जैसे ‘निरहुआ रिक्शावाला’, ‘निरहुआ हिंदीवाला’, ‘पतली कमरिया’ आदि सुपरहिट रहीं। वे न सिर्फ अभिनेता हैं, बल्कि गायक, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी हैं। राजनीति में भी निरहुआ सक्रिय हैं। वे आजाद समाज पार्टी से जुड़े हैं और वर्तमान में आजमगढ़ से सांसद हैं।
निरहुआ के इस बयान के अलावा भोजपुरी सिनेमा कई अन्य चुनौतियों से जूझ रहा है। थिएटर्स की संख्या में कमी, पाइरेसी, कंटेंट की क्वालिटी, परिवारिक ऑडियंस का दूर होना आदि मुद्दे भी चर्चा में रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बिहार-यूपी में सिंगल स्क्रीन थिएटर्स बंद हो रहे हैं, जिससे फिल्मों की रिलीज मुश्किल हो गई है।
दुनिया देखेगी भोजपुरी सिनेमा की चमक
साथ ही, OTT प्लेटफॉर्म्स पर भोजपुरी कंटेंट की बढ़ती मौजूदगी ने थिएट्रिकल रिलीज को प्रभावित किया है। फिर भी, निरहुआ जैसे सितारे और नई पीढ़ी के कलाकार उम्मीद जगाए हुए हैं। वे मानते हैं कि पारदर्शिता, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और क्वालिटी कंटेंट से भोजपुरी सिनेमा दक्षिण भारतीय सिनेमा की तरह वैश्विक स्तर पर पहुंच सकता है। निरहुआ का यह बयान भोजपुरी इंडस्ट्री के लिए एक बड़े सबक की तरह है। जब तक पैसों का सही हिसाब नहीं मिलेगा, बड़े निवेश नहीं आएंगे, लेकिन अब बदलाव की बयार चल रही है। अगर सिस्टम मजबूत हुआ तो भोजपुरी सिनेमा की असली चमक दुनिया देखेगी। दर्शक तैयार हैं, अब बारी इंडस्ट्री की है कि वह इस मौके को भुनाए।
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