
देहरादून। प्राकृतिक सुंदरता, मनोरम पहाड़ी नजारों, ऐतिहासिक स्थलों और शूटिंग के अनुकूल माहौल के चलते उत्तराखंड बड़े फिल्म निर्माताओं की पसंद बनता जा रहा है। राज्य में इन दिनों कई बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स की शूटिंग चल रही है। अभिनेता अक्षय कुमार मसूरी और लैंढौर क्षेत्र में शूटिंग कर रहे हैं, तो जाह्नवी कपूर नैनीताल में कैमरे के सामने हैं। बड़े प्रोजेक्ट्स के उत्तराखंड पहुंचने से राज्य की फिल्म-अनुकूल छवि को मजबूती मिली है। साथ ही पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
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फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि, उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध भौगोलिक परिस्थितियों के कारण फिल्म निर्माण के लिए अपार संभावनाएं रखता है। उन्होंने कहा कि, राज्य सरकार का प्रयास उत्तराखंड को एक प्रमुख फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना है।
इसके लिए सरकार का जोर तीन बातों पर है। पहला, फिल्म निर्माताओं को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना। दूसरा, शूटिंग की अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाना। तीसरा, स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देना। मुख्यमंत्री ने कहा, इन तीनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर
धामी ने कहा कि, फिल्म शूटिंग सिर्फ राज्य के पर्यटन स्थलों को बड़ी पहचान दिलाने का जरिया नहीं है। इससे स्थानीय युवाओं, कलाकारों, तकनीशियनों, होटल व्यवसायियों, परिवहन संचालकों और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी बनते हैं। उन्होंने कहा कि, सरकार फिल्म पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

जब किसी फिल्म की यूनिट किसी जगह पहुंचती है, तो उसके साथ सैकड़ों लोगों का काफिला आता है। ठहरने, खाने-पीने, आने-जाने और स्थानीय सेवाओं की मांग बढ़ती है, जिसका सीधा फायदा स्थानीय कारोबारियों को मिलता है। यही वजह है कि, सरकार फिल्म गतिविधियों को आर्थिक अवसर के रूप में देख रही है।
फिल्म नीति 2024 से सुगम हुई प्रक्रिया
राज्य सरकार फिल्म निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए उत्तराखंड फिल्म नीति 2024 के तहत अनुकूल माहौल तैयार कर रही है। सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम के जरिए शूटिंग से जुड़ी अनुमतियों को सरल और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया जा रहा है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत सात दिन के भीतर शूटिंग की अनुमति उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इससे फिल्म निर्माताओं को अलग-अलग विभागों से तालमेल बैठाने में सुविधा मिलती है।
फिल्म नीति के जरिए राज्य में फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देने, स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को मौके देने तथा पर्यटन स्थलों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। फिल्म यूनिटों के आने से होटल, परिवहन, खान-पान, स्थानीय सेवाओं और अन्य संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना भी मजबूत होती है।
पहले भी मिल चुकी है पहचान
उत्तराखंड को फिल्मकारों के अनुकूल राज्य के रूप में पहले भी सराहना मिल चुकी है। साल 2022 में घोषित 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में उत्तराखंड को ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट (स्पेशल मेंशन)’ का पुरस्कार मिला था। उस समय उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के अधिकारियों ने बताया था कि, पिछले पांच साल में ही छह सौ से ज्यादा फिल्मों और धारावाहिकों की शूटिंग राज्य में हो चुकी है। साल 2015 से तब तक राज्य में शूटिंग के लिए कुल 784 अनुमति प्रमाण-पत्र जारी किए गए थे।
इसके बाद नवंबर 2023 में मुख्यमंत्री धामी ने मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री के निर्माताओं, निर्देशकों और कलाकारों से मुलाकात कर घोषणा की थी कि राज्य में हिंदी फिल्म और वेब सीरीज की शूटिंग पर सरकार तीन-तीन करोड़ रुपये का अनुदान देगी।
फिल्म पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल
उत्तराखंड में एक साथ कई बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स की शूटिंग राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर दिखाने का मौका देती है। फिल्मों के जरिए मसूरी, लैंढौर और नैनीताल जैसे पर्यटन स्थल बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच सकते हैं। इससे भविष्य में इन इलाकों में पर्यटकों की दिलचस्पी बढ़ने और स्थानीय कारोबारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
स्क्रीन पर किसी जगह की खूबसूरती दिखने का असर अक्सर पर्यटन पर भी पड़ता है। दर्शक जब किसी फिल्म में पहाड़ी वादियां, झीलें और हिल स्टेशन देखते हैं, तो उनमें वहां जाने की इच्छा जगती है। इसीलिए सरकार फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि पर्यटन के प्रचार का जरिया भी मान रही है।
फिल्म विकास परिषद की भूमिका
उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को फिल्मों के जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए काम कर रही है। परिषद फिल्म निर्माताओं को जरूरी सहयोग और सुविधाजनक माहौल उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय है। परिषद का कहना है कि राज्य में बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स की शूटिंग उत्तराखंड को फिल्म निर्माण और फिल्म पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों को नई गति दे रही है।
नीतिगत संवाद और डिजिटल पोर्टल की पहल
फिल्म उद्योग से संवाद का सिलसिला भी जारी है। जून 2025 में देहरादून में राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम और उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद ने संयुक्त रूप से एक कार्यशाला आयोजित की थी। इसमें फिल्म निर्माण के लिए अनुकूल नीतियों और क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। कार्यशाला में बताया गया कि निर्माताओं की सहूलियत के लिए एक डिजिटल पोर्टल विकसित करने की पहल भी हो रही है, जिसमें शूटिंग लोकेशन, उपकरण, कलाकार और लॉजिस्टिक्स की जानकारी एक जगह मिलेगी। उसी महीने अभिनेता सुनील शेट्टी ने भी देहरादून में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर प्रदेश की फिल्म नीति पर चर्चा की थी।
फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बना उत्तराखंड
राज्य सरकार की कोशिश है कि सरल अनुमति प्रक्रिया, स्थानीय भागीदारी और बेहतर सुविधाओं के जरिए उत्तराखंड को फिल्म निर्माताओं के लिए पहली पसंद बनाया जाए। मसूरी और नैनीताल में चल रही शूटिंग से स्थानीय स्तर पर रौनक बढ़ी है। अगर यह सिलसिला बना रहा, तो आने वाले समय में फिल्म पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा बन सकता है।
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