पानी पीते ही आने लगती है पेशाब, कहीं किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं, करवाएं ये जरूरी जांच

पानी पीने के बाद पेशाब आना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अगर थोड़ी-थोड़ी देर में टॉयलेट जाना पड़े या रात में बार-बार नींद टूटने लगे, तो इसे हल्के में लेना ठीक नहीं। कई बार इसकी वजह बहुत साधारण होती है, जैसे जरूरत से ज्यादा पानी, चाय या कॉफी पीना। लेकिन कुछ मामलों में यह बढ़ी हुई शुगर, यूरिन इन्फेक्शन या किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में सही कारण जानने के लिए समय पर जांच कराना जरूरी है।

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 कब जाएं डॉक्टर के पास

हर व्यक्ति के शरीर की जरूरत और आदतें अलग होती हैं। जो लोग दिनभर खूब पानी पीते हैं या चाय-कॉफी का ज्यादा सेवन करते हैं, उन्हें स्वाभाविक रूप से ज्यादा बार पेशाब जाना पड़ सकता है। चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन भी पेशाब की मात्रा बढ़ाता है। परेशानी तब मानी जाती है, जब पेशाब की आवृत्ति अचानक बढ़ जाए, रात की नींद बार-बार खराब होने लगे या इसके साथ प्यास, जलन, दर्द या सूजन जैसे दूसरे लक्षण भी दिखें। ऐसी स्थिति में खुद से अंदाजा लगाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

शुगर की जांच कराएं

अगर बार-बार पेशाब आने के साथ बहुत ज्यादा प्यास भी लगती है, तो ब्लड शुगर की जांच जरूर करानी चाहिए। शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने पर पेशाब की मात्रा भी बढ़ जाती है। इसके लिए डॉक्टर आमतौर पर दो तरह की जांच लिखते हैं। पहली है फास्टिंग ब्लड शुगर, यानी खाली पेट शुगर की जांच। दूसरी है एचबीए1सी (HbA1c) टेस्ट। इस टेस्ट से पिछले करीब दो से तीन महीनों की औसत शुगर का पता चलता है। इन जांचों की मदद से डायबिटीज की पहचान करने में आसानी होती है।

यूरिन टेस्ट से पता चलेगा इन्फेक्शन

अगर बार-बार पेशाब आने के साथ जलन, दर्द या बदबू भी महसूस हो, तो यह यूरिन इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर सबसे पहले यूरिन रूटीन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। जरूरत पड़ने पर यूरिन कल्चर टेस्ट भी किया जाता है, जिससे इन्फेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया की पहचान हो पाती है और सही दवा चुनने में मदद मिलती है।

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विशेषज्ञ इस बात पर खास जोर देते हैं कि, बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक दवाएं न लें। गलत या अधूरी दवा लेने से इन्फेक्शन ठीक होने के बजाय और जटिल हो सकता है।

कमजोर धार या ब्लैडर खाली न होने का एहसास

अगर पेशाब करते समय धार कमजोर रहती है, या पेशाब करने के बाद भी ऐसा लगता है कि, ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ, तो डॉक्टर यूरोफ्लोमेट्री टेस्ट कराने को कह सकते हैं। इस जांच से पता चलता है कि, पेशाब कितनी तेजी और किस रफ्तार से बाहर निकल रही है। कुछ मामलों में अल्ट्रासाउंड की मदद भी ली जाती है। इससे यह देखा जाता है कि, पेशाब करने के बाद ब्लैडर में कितना पेशाब बचा रह गया है। यह जानकारी डॉक्टर को समस्या की सही वजह तक पहुंचने में मदद करती है।

किडनी की जांच कब जरूरी

अगर बार-बार पेशाब आने के साथ पैरों या चेहरे पर सूजन दिखे या दूसरी परेशानियां भी हों, तो डॉक्टर किडनी की जांच कराने की सलाह देते हैं। किडनी फंक्शन टेस्ट से यह पता चलता है कि किडनी ठीक से काम कर रही है या नहीं। हालांकि घबराने की जरूरत नहीं है। बार-बार पेशाब आने का मतलब यह नहीं कि आपकी किडनी खराब हो गई है,  इसलिए पहले डॉक्टर को दिखाएं और फिर जांच रिपोर्ट के अनुसार ही इलाज का रास्ता चुनें।

डॉक्टर को क्या-क्या बताएं

डॉक्टर के पास जाते समय अपनी परेशानी को साफ और पूरी जानकारी के साथ बताना जरूरी है। उन्हें बताएं कि:

  • दिन में कितनी बार पेशाब आती है
  • रात में कितनी बार उठना पड़ता है
  • दिनभर में कितना पानी पीते हैं
  • चाय-कॉफी कितनी मात्रा में लेते हैं

अगर संभव हो, तो कुछ दिनों तक इसका रिकॉर्ड रखें। एक छोटी डायरी या मोबाइल नोट में पेशाब जाने का समय, पानी और चाय-कॉफी की मात्रा लिख लेना मददगार रहता है। इस रिकॉर्ड से डॉक्टर को आपकी आदतों और समस्या का पैटर्न समझने में आसानी होती है और वे सही जांच चुन पाते हैं।

इन हालात में तुरंत लें मेडिकल मदद

कुछ लक्षण ऐसे हैं, जिनमें देरी करना भारी पड़ सकता है। अगर इनमें से कोई भी स्थिति बने, तो तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करें।

  • पेशाब में खून आना
  • तेज बुखार होना
  • पेट या कमर में तेज दर्द होना
  • पेशाब बिल्कुल न होना

सावधानी ही बचाव

बार-बार पेशाब आना हर बार किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी समझदारी नहीं है। समय पर सही जांच कराने से शुगर, इन्फेक्शन, प्रोस्टेट या किडनी से जुड़ी समस्याओं की शुरुआती पहचान हो सकती है, और इलाज भी आसान रहता है। खुद से दवा लेने या इंटरनेट पर पढ़कर नतीजे निकालने के बजाय योग्य डॉक्टर से मिलें और उनकी सलाह के अनुसार ही आगे बढ़ें।

 

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