
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी दल जीत की जोर आजमाइश में जुट गए हैं और अपनी-अपनी गोटियां बिछा रहे हैं। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस कथित तौर पर ‘प्लान B’ के तहत काम कर रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान भी सामने आ रही है। इधर, भाजपा के राजनीतिक इकोसिस्टम में खींचतान को प्रायोजित बताया जा रहा। भाजपा के एक पूर्व विधायक का दावा है कि, भाजपा को हराने के लिए ये समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की साजिश है।
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हिन्दू मतों को बांटने की साजिश

भाजपा के पूर्व विधायक बृजेश मिश्र सौरभ ने दावा किया है कि, सपा-कांग्रेस गठबंधन की आड़ में हिंदू मतों को बांटने की साजिश रच रही है, ताकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा की मजबूत पकड़ को कमजोर किया जा सके। बता दें कि, ये आरोप ऐसे समय में आया है, जब दोनों दलों (कांग्रेस-सपा) के बीच सीट बंटवारे पर खींचतान चल रही है और बीजेपी इसे ‘प्रायोजित ड्रामा’ बता रही है। हालांकि, समाजवादी पार्टी इस दावे को ख़ारिज कर रही है।
इधर, राजनीतिक गलियारों में सपा-कांग्रेस के ‘प्लान B’ की चर्चा जोरों पर है। पूर्व भाजपा विधायक बृजेश मिश्र सौरभ का कहना है कि, “सपा और कांग्रेस के पास भाजपा से लड़ने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। उनकी पूरी रणनीति योगी सरकार के पक्ष में एकजुट हिंदू वोट बैंक को तोड़ने की है।”
2029 के चुनाव को प्रभावित करेगा प्लान बी
भाजपा विधायक ने दावा किया कि, दोनों दल आपसी दुश्मनी का दिखावा करके अलग-अलग चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे एक-दूसरे की मदद करेंगे। खासतौर पर, कांग्रेस सवर्ण चेहरों को मैदान में उतारकर भाजपा के वोट काटेगी, जिससे सपा उम्मीदवारों की जीत आसान हो जाएगी। इसका दूरगामी लक्ष्य 2029 लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को मजबूत बनाना है। बृजेश मिश्र ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि, वहां राजद-कांग्रेस गठबंधन से कोई फायदा नहीं हुआ और यूपी में भी कांग्रेस का आधार सीमित है। फिर भी, यह फॉर्मूला सपा की मदद कर सकता है।
सोशल मीडिया पर भी हो रही चर्चा
उन्होंने जोर देकर कहा, “भाजपा के खिलाफ सवर्ण, पिछड़े और दलित उम्मीदवारों को उतारकर एनडीए के वोट बांटे जाएंगे।” सपा-कांग्रेस के प्लान बी की चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हो रही है। एक यूजर ने एक्स पर लिखा, कांग्रेस का ये स्मार्ट कैंपेन 2027 में भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है और 2029 के लोकसभा चुनाव को प्रभावित कर सकता है। एक अन्य यूजर ने लिखा, ऊपरी जातियों के वोट्स को बांटने की स्पष्ट रणनीति है, जहां हिंदू वोट्स की डिविजन और मुस्लिम वोट्स की कंसोलिडेशन 2024 लोकसभा चुनाव में देखी गई थी। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “इस तरह की बातें निराधार हैं। 2027 में सपा और कांग्रेस एक साथ चुनाव लड़ेंगे। सीट बंटवारा शीर्ष नेतृत्व तय करेगा और सभी सीटों पर संयुक्त रणनीति होगी।”
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हिन्दू एकता को निशाना बना रहा विपक्ष
फखरुल हसन ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि, ऐसे दावे सिर्फ विपक्ष को बदनाम करने के लिए किये जाते हैं। हालांकि, भाजपा खेमा इस बात से चिंतित है कि, सपा-कांग्रेस का अलग-अलग चुनाव लड़ना ‘प्लान B’ का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद भाजपा के जातीय समीकरणों को ध्वस्त करना है। योगी आदित्यनाथ की सरकार में कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर भाजपा मजबूत दिख रही है, लेकिन विपक्ष हिंदू एकता को निशाना बना रहा है।
हाल की घटनाओं ने इस साजिश के आरोपों को हवा दी है। बनारस में मणिकर्णिका और अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को विपक्ष ने भुनाने की कोशिश की। कांग्रेस नेता अजय राय और अविनाश पांडे ने इस मुद्दे पर खुलकर समर्थन दिया, जबकि सपा भी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ खड़ी नजर आई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, यह ब्राह्मण नाराजगी का नैरेटिव प्रायोजित है, जो हिंदुत्व की राजनीति को कमजोर करने का प्रयास है। बृजेश मिश्र का कहना है कि, “तुष्टिकरण की राजनीति से हिंदू समाज भाजपा के साथ एकजुट है। विपक्ष की कोशिश इसी एकता को तोड़ने की है, क्योंकि उनके पास और कोई मुद्दा नहीं है।”
भाजपा से नाराज दिख रहे स्वर्ण

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, कुछ सवर्ण और पिछड़े समूह भाजपा से नाराज दिख रहे हैं और विपक्ष इसका फायदा उठाना चाहता है, लेकिन सफलता की संभावना कम है। 2014 से भाजपा का नैरेटिव मजबूत है, हालांकि, 2024 में संविधान मुद्दे से थोड़ा कमजोर पड़ा था, लेकिन अब वह फिर से मजबूत हो रहा है। हालांकि, सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स की एक पोस्ट,जिसमें बीएसपी की चर्चा है, इस पोस्ट में कहा गया है कि बीएसपी ब्राह्मणों को अपने में मिलाकर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है, ये उसकी पुरानी रणनीति है। एक अन्य यूजर ने BSP-BJP गठजोड़ की बात की है। इसने लिखा है, BSP ब्राह्मणों को लुभाकर कांग्रेस-सपा को बाहर रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन इससे जनरल कैटेगरी वोटर्स प्रभावित हो सकते हैं।
बीएसपी निभाएगी अहम भूमिका
भाजपा के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि, विपक्ष की यह रणनीति 2024 लोकसभा चुनाव में मिले सबक से मिली है, जहां जातीय गठजोड़ों ने कुछ सीटों पर असर डाला था, लेकिन योगी सरकार की सख्ती और विकास योजनाओं ने हिंदू वोट बैंक को मजबूत रखा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के राहुल गांधी के बीच हाल की मुलाकातों से गठबंधन की संभावना बनी हुई है, लेकिन सीट बंटवारे पर विवाद ने ‘प्लान B’ की अफवाहों को जन्म दिया।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि, यूपी की राजनीति जातीय समीकरणों पर टिकी है और बिना इन्हें तोड़े विपक्ष की जीत मुश्किल है। BSP की भूमिका भी अहम होगी, जैसा कि एक X पोस्ट में कहा गया कि BSP 200 सीटों पर मजबूत दिख सकती है, जबकि भाजपा 100 और सपा 70 पर।
कुल मिलाकर, 2027 चुनाव से पहले यह घमासान विपक्ष की एकजुटता और भाजपा की रणनीति को परखेगा। अगर ‘प्लान B’ सही साबित हुआ, तो यूपी की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है, लेकिन फिलहाल, योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व भाजपा को मजबूत स्थिति में रखता है।
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