थायराइड रिपोर्ट में छिपे हैं सेहत के संकेत: TSH, T3 और T4 का मतलब समझिए

आज के दौर में थायराइड की समस्या काफी आम हो गई है। घर-घर में कोई न कोई इससे जूझता नजर आता है, लेकिन जांच रिपोर्ट हाथ में आने के बाद भी कई मरीज असमंजस में रहते हैं कि TSH, T3 और T4 के आंकड़ों का मतलब क्या है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्ट की बुनियादी समझ हो, तो मरीज अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सजग रह सकते हैं और डॉक्टर से बेहतर संवाद कर सकते हैं।

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थायराइड जांच में क्या देखा जाता है?

थायराइड की जांच में मुख्य रूप से तीन हॉर्मोन का स्तर देखा जाता है। टीएसएच (TSH), टी3 (T3) और टी4 (T4)। इनमें टीएसएच की भूमिका सबसे अलग है। यह हॉर्मोन मस्तिष्क की पिट्यूटरी ग्रंथि से निकलता है और थायराइड ग्रंथि को हॉर्मोन बनाने का संकेत देता है। आसान शब्दों में कहें तो टीएसएच एक तरह से ‘कंट्रोल रूम’ का काम करता है, जबकि टी3 और टी4 वे हॉर्मोन हैं, जो थायराइड ग्रंथि बनाती है।

Thyroid TSH, T3 and T4

अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर के इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर रोहित शर्मा के अनुसार, जब थायराइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो इन हॉर्मोन के स्तर में बदलाव आने लगता है। यही बदलाव रिपोर्ट में दर्ज होते हैं और बीमारी का संकेत देते हैं।

हाइपोथायराइडिज्म: जब थायराइड हो जाए सुस्त

डॉक्टर शर्मा बताते हैं कि, अगर रिपोर्ट में टीएसएच का स्तर बढ़ा हुआ और टी4 कम आए, तो यह हाइपोथायराइडिज्म का संकेत हो सकता है। इसका मतलब है कि, थायराइड ग्रंथि कम सक्रिय हो गई है और जरूरत के मुताबिक हॉर्मोन नहीं बना पा रही।

इस स्थिति में मरीज को कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।

  • लगातार थकान महसूस होना
  • वजन बढ़ना
  • ठंड ज्यादा लगना
  • कब्ज की शिकायत
  • बाल झड़ना

अक्सर लोग इन लक्षणों को रोजमर्रा की थकान या तनाव का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि कई बार बीमारी देर से पकड़ में आती है।

हाइपरथायराइडिज्म: जब थायराइड हो जाए जरूरत से ज्यादा सक्रिय

इसके उलट, अगर रिपोर्ट में टीएसएच कम हो और टी3 या टी4 बढ़े हुए हों, तो हाइपरथायराइडिज्म की आशंका रहती है। इसमें थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती है। ऐसे में मरीजों में ये लक्षण दिख सकते हैं।

  • वजन कम होना
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • घबराहट महसूस होना
  • ज्यादा पसीना आना
  • नींद न आना

दोनों स्थितियों के लक्षण एक-दूसरे से काफी अलग हैं। इसलिए रिपोर्ट के आंकड़ों के साथ-साथ शरीर में दिख रहे लक्षणों पर भी ध्यान देना जरूरी होता है।

सिर्फ एक रिपोर्ट से नहीं होता पक्का निदान

विशेषज्ञ साफ तौर पर आगाह करते हैं कि केवल एक रिपोर्ट के आधार पर किसी बीमारी का निश्चित निदान नहीं किया जा सकता। कई बार टीएसएच में मामूली बदलाव होता है, जबकि टी3 और टी4 सामान्य बने रहते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत को देखते हुए कुछ समय बाद दोबारा जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

इसके अलावा, थायराइड की रिपोर्ट कई दूसरे कारणों से भी प्रभावित हो सकती है। इनमें गर्भावस्था, कुछ खास दवाओं का सेवन और अन्य बीमारियां शामिल हैं। यानी रिपोर्ट में दिख रहा हर बदलाव जरूरी नहीं कि थायराइड की बीमारी ही हो।

घबराएं नहीं, डॉक्टर से लें परामर्श

डॉक्टर शर्मा की सलाह है कि, रिपोर्ट में हॉर्मोन का स्तर सामान्य सीमा से कम या ज्यादा आने पर घबराने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। रिपोर्ट को इंटरनेट पर देखकर खुद ही नतीजे पर पहुंच जाना सही तरीका नहीं है, क्योंकि हर मरीज की स्थिति अलग होती है।

बिना सलाह दवा लेना पड़ सकता है भारी

विशेषज्ञों ने इस बात पर खास जोर दिया है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के थायराइड की दवा शुरू नहीं करनी चाहिए। इसी तरह दवा की खुराक अपने मन से बदलना या बीच में दवा बंद कर देना भी नुकसानदायक हो सकता है। कई मरीज थोड़ा आराम मिलते ही दवा छोड़ देते हैं, जबकि इलाज की अवधि और खुराक तय करना डॉक्टर का काम है।

 

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