स्वाभिमान पर्व: प्रधानमंत्री मोदी ने शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया, सोमनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना

स्वाभिमान पर्व: प्रधानमंत्री मोदी ने शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया, सोमनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना

सोमनाथ (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया। यह यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों के सम्मान में निकाली गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत निकाली गई शौर्य यात्रा में 108 अश्वों की भव्य झांकी शामिल रही, जो वीरता, साहस और बलिदान का प्रतीक मानी जाती है। प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए शंख सर्कल से वीर हमीरजी गोहिल सर्कल तक यात्रा मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग और श्रद्धालु एकत्र हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहन पर खड़े होकर लगभग एक किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान जनता का हाथ हिलाकर अभिवादन किया।

यात्रा के दौरान युवा पुजारियों का एक समूह, जिन्हें जशि कुमार कहा जाता है, प्रधानमंत्री के वाहन के साथ चलते हुए भगवान शिव के वाद्ययंत्र डमरू का वादन करता रहा। एक विशेष क्षण में प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं एक पुजारी से दो डमरू लेकर वाहन पर खड़े होकर उन्हें बजाया, जिसे देखकर उपस्थित श्रद्धालुओं में उत्साह और उल्लास देखने को मिला।

शौर्य यात्रा के मार्ग में जम्मू-कश्मीर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने अलग-अलग मंचों पर अपनी पारंपरिक लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। यात्रा का समापन वीर हमीरजी गोहिल सर्कल पर हुआ, जहां से सोमनाथ मंदिर का मुख्य मार्ग शुरू होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यहां 1299 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत की सेना के आक्रमण के दौरान सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए बलिदान देने वाले वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास स्थापित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में सरदार पटेल की अहम भूमिका रही थी और उनके प्रयासों से ही वर्ष 1951 में यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोला गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में मुख्य पुजारी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धा और आस्था के साथ मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया।

गौरतलब है कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व उन अनगिनत नागरिकों की स्मृति में मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। यह पर्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रेरणा बना रहेगा। इतिहास में उल्लेख है कि लगभग एक हजार वर्ष पहले 1026 ईस्वी में महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था, जिसके दौरान अनेक वीरों ने अपने जीवन का बलिदान दिया।

पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के अनुसार, सदियों में कई बार नष्ट करने के प्रयासों के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज भी विश्वास, साहस और राष्ट्रीय गौरव का सशक्त प्रतीक बनकर खड़ा है। यह मंदिर अपनी प्राचीन महिमा में पुनः स्थापित करने के सामूहिक संकल्प और निरंतर प्रयासों का जीवंत उदाहरण है।

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