गलत तरीके से सोना पड़ सकता है भारी, स्लिप डिस्क से बचना है, तो अपनाएं ये आदतें

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कमर दर्द और स्लिप डिस्क की शिकायत अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। कम उम्र के लोग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन गलत तरीके से सोना भी एक बड़ी वजह माना जाता है। दिनभर की थकान के बाद रात की नींद शरीर को आराम देने के लिए होती है, मगर सोने का तरीका सही न हो तो यही नींद रीढ़ की हड्डी पर उल्टा असर डाल सकती है। अच्छी बात यह है कि सोने की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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क्या होती है स्लिप डिस्क

हमारी रीढ़ की हड्डी कई छोटी-छोटी हड्डियों यानी कशेरुकाओं से मिलकर बनी होती है। इन हड्डियों के बीच जैली जैसी संरचना वाली डिस्क होती है, जो झटकों को सोखने और रीढ़ को लचीला बनाए रखने का काम करती है। जब यह डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है और आसपास की नसों पर दबाव डालने लगती है, तो इसे स्लिप डिस्क कहा जाता है। इसका असर कमर दर्द के रूप में सामने आता है और कई बार दर्द पैरों तक भी पहुंच जाता है।

पीठ के बल सोते समय रखें यह सावधानी

जिन लोगों को पीठ के बल सोने की आदत है, उनके लिए घुटनों के नीचे एक पतला तकिया रखना फायदेमंद माना जाता है। इससे कमर का प्राकृतिक कर्व बना रहता है और रीढ़ की हड्डी पर दबाव कम पड़ता है।

Slip disc

इस पोजीशन में गद्दे की भूमिका भी अहम होती है। बहुत नरम गद्दे पर पीठ के बल सोने से कमर का हिस्सा नीचे की ओर धंस जाता है, जिससे डिस्क पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए ऐसा गद्दा चुनना चाहिए जो न बहुत सख्त हो और न बहुत मुलायम, ताकि रीढ़ अपनी सामान्य स्थिति में बनी रहे।

करवट लेकर सोने का सही तरीका

करवट लेकर सोना कमर के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन इसमें भी एक जरूरी बात का ध्यान रखना पड़ता है। दोनों घुटनों के बीच एक तकिया रखने से कूल्हे और रीढ़ की हड्डी एक सीध में रहते हैं, जिससे कमर पर मरोड़ नहीं पड़ता।

इसके उलट, बिना तकिए के करवट लेकर सोने पर ऊपर वाला पैर नीचे की तरफ खिंच जाता है। इससे रीढ़ में हल्का ट्विस्ट आ जाता है और यही आदत लंबे समय में स्लिप डिस्क का कारण बन सकती है। इसके अलावा समय-समय पर करवट बदलते रहना भी जरूरी है, ताकि शरीर के एक तरफ ज्यादा दबाव न बने।

पेट के बल सोने से बचें

पेट के बल सोना कमर के लिए सबसे कम फायदेमंद पोजीशन मानी जाती है। इसमें गर्दन को एक तरफ मोड़कर रखना पड़ता है और कमर के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है। नतीजा यह होता है कि गर्दन और कमर, दोनों पर एक साथ असर पड़ता है।

अगर किसी को यह पोजीशन ज्यादा आरामदायक लगती है और वह इसे तुरंत नहीं छोड़ पा रहा, तो पेट के नीचे एक पतला तकिया रखने से कमर पर पड़ने वाला दबाव थोड़ा कम किया जा सकता है। हालांकि जिन लोगों को पहले से कमर दर्द की शिकायत रहती है, उन्हें यह पोजीशन पूरी तरह अवॉइड करने की सलाह दी जाती है।

तकिए की ऊंचाई का भी रखें ध्यान

सिर्फ सोने की पोजीशन ही नहीं, तकिए की ऊंचाई भी रीढ़ की सेहत में बड़ी भूमिका निभाती है। बहुत ऊंचा या बहुत सपाट तकिया गर्दन और कमर के बीच तालमेल बिगाड़ सकता है।

Slip disc

विशेषज्ञों के मुताबिक पीठ के बल सोने वालों को पतला तकिया इस्तेमाल करना चाहिए, जबकि करवट लेकर सोने वालों के लिए थोड़ा मोटा तकिया बेहतर रहता है। मकसद यही है कि गर्दन और रीढ़ एक सीध में बनी रहें। सही तकिया चुनने से नींद के दौरान गर्दन में अकड़न और कमर दर्द, दोनों की समस्या कम हो जाती है।

इन बातों का भी रखे ध्यान

सोने का सही तरीका अपनाने के साथ दिनचर्या में कुछ और सावधानियां भी जरूरी हैं। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचें और बीच-बीच में उठकर टहलें। भारी सामान उठाते समय झुकने के बजाय घुटनों को मोड़कर उठाएं। नियमित रूप से हल्की कसरत और स्ट्रेचिंग करने से कमर की मांसपेशियां मजबूत रहती हैं, जो रीढ़ को सहारा देने में मदद करती हैं।

सुबह उठते समय भी जल्दबाजी न करें। पहले करवट लेकर धीरे से उठें, फिर हाथों के सहारे शरीर को ऊपर उठाएं। झटके से उठने पर कमर पर अचानक दबाव पड़ सकता है।

कब लें डॉक्टर की सलाह

अगर कमर दर्द लगातार बना रहता है, दर्द पैरों तक फैलता है, या पैरों में सुन्नपन और झुनझुनी महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में बिना देरी किए किसी योग्य डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। खुद से दवा लेने या घरेलू नुस्खों के भरोसे रहने से स्थिति बिगड़ सकती है।

स्लिप डिस्क जैसी समस्या से बचाव में सोने का सही तरीका एक अहम भूमिका निभाता है। पीठ के बल सोएं तो घुटनों के नीचे तकिया रखें, करवट लेकर सोएं तो घुटनों के बीच तकिया लगाएं, पेट के बल सोने से बचें और तकिया व गद्दा सही चुनें। ये छोटे बदलाव रीढ़ की हड्डी को सेहतमंद रखने में मददगार साबित हो सकते हैं। फिर भी, किसी भी तरह की परेशानी होने पर विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

 

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