
भारत में तेजी से बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण फैटी लिवर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले इसे उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब युवा और यहां तक कि किशोरों में भी इसके केस सामने आ रहे हैं। आइए आपको आसान भाषा में समझाते हैं कि फैटी लिवर क्या है, इसके लक्षण क्यों नहीं दिखते और इससे कैसे बचा जा सकता है।
क्या है फैटी लिवर?
जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट यानि कि वसा जमा होने लगता है, तो इस स्थिति को फैटी लिवर कहा जाता है। सामान्य रूप से लिवर में थोड़ी मात्रा में फैट होता है, लेकिन जब यह मात्रा 5 से 10 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो यह बीमारी का रूप ले लेती है। फैटी लिवर मुख्य रूप से दो तरह का होता है पहला नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) – यह उन लोगों में होता है जो शराब का सेवन नहीं करते या बहुत कम करते हैं। दूसरा अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज – यह लंबे समय तक अधिक शराब पीने वालों में विकसित होता है।
आज भारत में सबसे ज्यादा मामले नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर के सामने आ रहे हैं, जिसका सीधा संबंध मोटापा, मधुमेह और खराब खानपान से है। फैटी लिवर को “साइलेंट डिजीज” भी कहा जाता है क्योंकि शुरुआती स्टेज में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। फिर भी कुछ सामान्य संकेत हो सकते हैं जैसे – हमेशा थकान महसूस होना, पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन, भूख कम लगना, अचानक वजन बढ़ना, कमजोरी महसूस होना।
अब हम आपको बताते है कि आखिर इसके लक्षण क्यों नहीं दिखते? दरअसल लिवर शरीर का ऐसा अंग है जो काफी समय तक बिना किसी परेशानी के काम करता रहता है। इसमें दर्द महसूस कराने वाली नसें बहुत कम होती हैं। इसलिए जब तक लिवर को गंभीर नुकसान नहीं होता, तब तक कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। कई बार लोगों को तब पता चलता है जब वे किसी और अन्य कारण से ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड करवाते हैं और जांच में लिवर एंजाइम बढ़े हुए मिलते हैं या अल्ट्रासाउंड में फैट जमा दिखाई देता है। इसी कारण डॉक्टर नियमित हेल्थ चेकअप कराने की सलाह देते हैं, खासकर उन लोगों को जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या मोटापा है। जब बीमारी बढ़ जाती है, तो लिवर में सूजन (हेपेटाइटिस) और फिर लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है।
फैटी लिवर होने के कारण
भारत में फैटी लिवर के बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार है :
पहला खराब खानपान: ज्यादा तला-भुना खाना, फास्ट फूड, मीठे पेय पदार्थ और जंक फूड का अधिक सेवन।
दूसरा मोटापा: पेट के आसपास ज्यादा चर्बी जमा होना फैटी लिवर का एक बड़ा कारण है। शारीरिक गतिविधि की कमी : लंबे समय तक बैठकर काम करना और व्यायाम न करना। मधुमेह (डायबिटीज) : ब्लड शुगर ज्यादा रहने से लिवर में फैट जमा होने लगता है।
अधिक शराब का सेवन: नियमित और अत्यधिक शराब पीने से लिवर की कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं।
हाई कोलेस्ट्रॉल: खून में वसा की मात्रा ज्यादा होने से लिवर पर असर पड़ता है।
क्या फैटी लिवर खतरनाक है?
शुरुआती स्टेज में फैटी लिवर को कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस और आगे चलकर सिरोसिस या लिवर फेलियर का कारण बन सकता है। कुछ मामलों में यह लिवर कैंसर तक का रूप ले सकता है।
फैटी लिवर से बचने के उपाय
अच्छी बात यह है कि फैटी लिवर लाइफस्टाइल सुधारकर ठीक किया जा सकता है। इसके लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं।
संतुलित आहार लें
हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और कम फैट वाला भोजन लें। जंक फूड और मीठे पेय पदार्थ से दूरी बनाएं
नियमित व्यायाम
रोज कम से कम 30 से 45 मिनट पैदल चलें, योग या हल्का व्यायाम करें।
वजन नियंत्रित रखें
अगर वजन ज्यादा है, तो धीरे-धीरे 5–10 प्रतिशत वजन कम करने से लिवर की स्थिति में सुधार आता है।
शराब से परहेज
शराब का सेवन सीमित करें या पूरी तरह बंद कर दें।
शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करें
डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह अनुसार दवा लें।
नियमित हेल्थ चेकअप
हर साल लिवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कराने से समय रहते बीमारी पकड़ में आ सकती है।
निष्कर्ष
फैटी लिवर एक आम लेकिन गंभीर बीमारी है, जो गलत खानपान और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण तेजी से फैल रही है। अच्छी बात यह है कि समय रहते पहचान और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इसे रोका और ठीक किया जा सकता है। अगर आपको लगातार थकान, पेट में भारीपन या डायबिटीज जैसी समस्या है, तो एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें। याद रखें, स्वस्थ लिवर ही स्वस्थ जीवन की नींव है।



