ओवैसी और केजरीवाल ने बढ़ाई अन्य दलों की मुश्किलें, यूपी में बढ़ गई दोनों की ताकत

अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने सूबे के अन्य राजनीतिक दलों के माथे पर चिंता की लकीरे पीड़ा कर दी है। इसकी वजह हाल ही में हुए यूपी पंक हायत चुनाव हैं। इस चुनावी संग्राम में आप और AIMIM कोई बड़ा उतर्फे करने में भले ही कामयाब न हो सकी हो, लेकिन इस चुनाव में दोनों ही दलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर अन्य दलों को सोंचने पर जरूर मजबूर कर दिया है।

ओवैसी और केजरीवाल ने बनाई बढ़त

दरअसल, यूपी पंचायत चुनाव में आप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह कशेर गोरखपुर में जिला पंचायत की एक-एक सीट पर अपना कब्जा जमाया है। इसके अलावा AIMIM ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ और यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के प्रयागराज में सीटों को अपने पाले में किया है।

यह पहला मौका था जब आप ने यूपी पंचायत चुनाव में हिस्सा लिया था। इस बार अप ने सूबे में जिला पंचायत, ग्राम प्रधान और बीडीसी पद के लिए बड़ी संख्या में अपने प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था। भले ही इस चुनाव में जिला पंचायत पर पर उतरे अप के ज्यादातर प्रत्याशियों को हार का मुंह देखना पड़ा हो लेकिन फिर भी पार्टी ने सूबे की 3050 जिला पंचायत की सीटों में से 64 सीटों पर कब्ज़ा जमा लिया।  

वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने सूबे के तकरीबन 220 जिला पंचायत सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें से 22 सदस्य जीत दर्ज करने में सफल रहे हैं। इससे पहले AIMIM ने वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में भी हिस्सा लिया था। उस चुनाव में AIMIM के चार जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए थे।

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यूपी में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस पंचायत चुनाव में केजरीवाल की आप और ओवैसी की AIMIM ने उत्तर प्रदेश में जबरदस्त एंट्री की है। इन दोनों दलों की इस एंट्री ने अन्य दलों की चिंताएं जरूर बढ़ा दी है। इन दोनों दलों की इस एंट्री को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि इन दोनों दलों की वजह से आगामी विधानसभा चुनाव की रोचकता और और बढ़ गई है।  

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