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राहुल जी, आजादी की खातिर जेल सिर्फ नेहरू नहीं गए थे, मसुरियादीन भी गए- सीएम योगी
प्रयागराज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को स्वतंत्रता सेनानी महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। योगी ने कहा, राहुल गांधी को यह जानना चाहिए कि आजादी की खातिर जेल की यातना सिर्फ नेहरू जी ने नहीं सही थी, मसुरियादीन पासी भी सलाखों के पीछे गए थे। योगी ने बताया कि, मसुरियादीन ने कोई एक-दो या चार-छह महीने नहीं, बल्कि 1932 से 1944 के बीच कुल नौ साल जेल में काटे। समय के प्रवाह में ऐसे महान सेनानी को भुला दिया गया।
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योगदान को इतिहास में नहीं मिली जगह
मुख्यमंत्री तेलियरगंज में महाशय मसुरियादीन स्मारक इंटर कॉलेज और टीवी कॉलोनी चौराहे के पास आयोजित प्रतिमा अनावरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी पुष्पांजलि दी।

योगी ने कहा कि मसुरियादीन का जन्म 2 अक्टूबर 1911 को हुआ था, यानी वही तारीख जो महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती की है। फिर भी इतिहास में उनके योगदान को जगह नहीं मिली। अब उनकी भव्य प्रतिमा लगाकर सरकार ने उनकी यादों को फिर से जीवंत करने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि विरासत को सहेजने और विकास को आगे बढ़ाने में भरोसा रखने वाली भाजपा की डबल इंजन सरकार अपने महापुरुषों को कभी नहीं भूल सकती। महापुरुषों का सम्मान किसी परिवार की निजी संपत्ति नहीं है, और जिन्होंने वंचितों-दलितों को सम्मान दिलाने की लड़ाई लड़ी, वे भी पूरे आदर के हकदार हैं।
नेहरू के साथ संसद पहुंचे थे मसुरियादीन
योगी ने कहा कि, महाशय मसुरियादीन ने अपना पूरा जीवन देश की आजादी और समाज की उन्नति को समर्पित कर दिया। करीब 66-67 साल की उम्र में से नौ साल उन्होंने जेल में गुजारे। जेल से बाहर रहने पर भी वे आजादी के आंदोलन के लिए लोगों को जगाने में लगे रहे। जनता के इसी भरोसे और सम्मान का नतीजा था कि, 1946 में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने। आजाद भारत में 1952 से 1972 के बीच वे चार बार लोकसभा के लिए चुने गए।
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि, 1952 में एक ही सीट से दो सांसद चुने जाते थे। उसी व्यवस्था में पंडित जवाहरलाल नेहरू और महाशय मसुरियादीन पासी साथ-साथ चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि, आजादी की लड़ाई में ऐसे अनगिनत महापुरुषों ने योगदान दिया है, जिनकी स्मृतियों को उचित सम्मान मिलना चाहिए।
जरायम पेशा कानून के खिलाफ उठाई आवाज
योगी ने कहा कि, 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों को चुनौती देने वाली कई जातियों को नीचा दिखाने के इरादे से ब्रिटिश हुकूमत ने 1871 में जरायम पेशा कानून बनाया। पासी समाज समेत कई जातियों को इसके दायरे में डाल दिया गया। 1952 में संसद पहुंचने के बाद महाशय मसुरियादीन ने इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई।

उन्होंने कहा कि, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और महाशय मसुरियादीन पासी ने इस काले कानून को खत्म कराने के लिए संघर्ष किया। इसी लड़ाई की बदौलत पासी, सोनकर और अन्य वंचित समाजों को इज्जत की जिंदगी जीने और देश की मुख्यधारा से जुड़ने का मौका मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि, ऐसे महापुरुषों के योगदान की जानकारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाई जानी चाहिए।
हर महापुरुष को मिलना चाहिए सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि, देश और समाज के लिए जीवन खपाने वाले हर महापुरुष को सम्मान मिलना चाहिए, और यह सम्मान किसी एक परिवार की सीमा में नहीं बंध सकता, जिन्होंने दलितों और वंचितों की आवाज बुलंद की और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष किया, उनकी यादों को जिंदा रखना जरूरी है। महापुरुषों का आदर करके ही समाज आगे बढ़ता है। अतीत का सम्मान होगा, तो वर्तमान सुधरेगा, और वर्तमान सुधरेगा तो भविष्य भी रोशन होगा।
योगी ने मसुरियादीन की पुत्री कमला कुमारी और पौत्र सचिन कुमार को भरोसा दिलाया कि उनके सम्मान पर किसी तरह की आंच नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मसुरियादीन का सम्मान दरअसल देश के सभी स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान है।
चौराहे को मिलेगा मसुरियादीन का नाम
मसुरियादीन की यादों को स्थायी रूप देने के लिए योगी ने अहम घोषणा की। उन्होंने महापौर से कहा कि, जिस चौराहे पर प्रतिमा लगी है, उसका नाम महाशय मसुरियादीन पासी के नाम पर रखने का प्रस्ताव भेजा जाए। इसके अलावा प्रयागराज की किसी एक प्रमुख संस्था का नाम भी उनके नाम पर होगा और वहां उनकी भव्य प्रतिमा भी लगाई जाएगी, ताकि मौजूदा और आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें।
महाराजा बिजली पासी के किले का जीर्णोद्धार करा रही सरकार
पासी समाज की वीरता का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि महाराजा बिजली पासी ने 12वीं सदी में लखनऊ और आसपास के इलाकों में 12 गढ़ बनवाए थे। ये किले विदेशी हमलावरों से लोहा लेने के लिए बनाए गए थे। उन्होंने बताया कि, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2000 में महाराजा बिजली पासी की प्रतिमा स्थापित कराई थी। अब डबल इंजन सरकार लखनऊ स्थित उनके किले का जीर्णोद्धार करा रही है, जिसके लिए धनराशि उपलब्ध करा दी गई है।
मुख्यमंत्री ने मक्का पासी और वीरांगना ऊदा देवी के बलिदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि मक्का पासी के शहीद होने के बाद उनकी पत्नी ऊदा देवी ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला और लड़ते-लड़ते बलिदान हो गईं। लखनऊ में बनने जा रही महिला पीएसी बटालियन का नाम वीरांगना ऊदा देवी पासी के नाम पर रखा जा रहा है, और उनकी भव्य घुड़सवार प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।
गरीबों के लिए समर्पित है भाजपा सरकार- डिप्टी सीएम
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महाशय मसुरियादीन पासी महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने चार बार इसी क्षेत्र से लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया और छोटे से छोटे गरीब की बात सुनकर उसकी समस्या सुलझाने की कोशिश की। ऐसे व्यक्तित्व की प्रतिमा का मुख्यमंत्री योगी के हाथों अनावरण होना उनके योगदान को दिया गया सम्मान है। मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार गरीबों के लिए समर्पित है, और डबल इंजन सरकार महापुरुषों को आदर और सम्मान देने का काम कर रही है।
सचिन ने की सीएम के प्रयासों की सराहना
महाशय मसुरियादीन स्मारक समिति के मंत्री और उनके पौत्र सचिन कुमार ने कहा कि अंग्रेजी शासन में दलित जातियों को जरायम पेशा घोषित कर उन पर अत्याचार किया गया। इस कानून को समाप्त कराने में महाशय मसुरियादीन का अहम योगदान रहा। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों को सम्मान दिलाने के मुख्यमंत्री योगी के प्रयासों की सराहना की। समारोह में आयोजकों ने मुख्यमंत्री का स्वागत हनुमान जी की प्रतिमा भेंट कर किया। सचिन कुमार ने उन्हें भगवान बुद्ध की प्रतिमा और पुष्पगुच्छ भेंट किए।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
समारोह में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, सांसद प्रवीण पटेल, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, गुरु प्रसाद मौर्य, दीपक पटेल, पीयूष रंजन निषाद, वाचस्पति पासी, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, सुरेंद्र चौधरी, महापौर गणेश केसरवानी, भाजपा गंगापार जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान सहित कई जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और महाशय मसुरियादीन पासी के परिवारजन मौजूद रहे।
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