
सुबह आंख खुलते ही तकिए पर गीला निशान दिखना बहुत से लोगों के लिए आम बात है। ज्यादातर लोग इसे बिना सोचे नजरअंदाज कर देते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि कभी-कभार ऐसा होना सामान्य है, लेकिन अगर यह रोज की आदत बन जाए या इसके साथ खर्राटे, थकान और सांस की दिक्कत भी हो, तो इसकी वजह जानना जरूरी हो जाता है।
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सोते समय भी बनती रहती है लार
आमतौर पर दिन के मुकाबले रात में लार कम बनती है, लेकिन नींद के दौरान भी इसका बनना बंद नहीं होता। दिन में हम बिना ध्यान दिए इसे निगलते रहते हैं। नींद में मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं और मुंह थोड़ा खुला रह जाए, तो लार बाहर आ सकती है। करवट या पेट के बल सोने वालों में यह ज्यादा दिखता है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण लार को तकिए या बिस्तर की ओर खींच देता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि कभी-कभार ऐसा होना चिंता की बात नहीं है। चिंता तब शुरू होती है, जब यह रोज होने लगे या अचानक बढ़ जाए।
लार ज्यादा बनना या निगलने में दिक्कत
कुछ लोगों के मुंह में सामान्य से ज्यादा लार बनती है, या उन्हें उसे निगलने में तकलीफ होती है। ऐसे में नींद के दौरान लार मुंह से बाहर निकल जाती है। मुंह और दांतों से जुड़ी कुछ समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं। कुछ दवाओं का असर भी लार बढ़ा सकता है। अगर कोई नई दवा शुरू करने के बाद लार टपकना बढ़ा हो, तो डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
अगर दिन में भी बार-बार लार निकलती है या निगलने में परेशानी होती है, तो इसे हल्के में न लें। सही कारण पता चलने पर ही उचित इलाज हो सकता है।
नाक बंद होना और एलर्जी
सर्दी-जुकाम, एलर्जी या साइनस की वजह से नाक बंद हो तो व्यक्ति सोते समय मुंह से सांस लेने लगता है। मुंह खुला रहने पर लार तकिए पर गिरती है। विशेषज्ञ मुंह से सांस लेने को लार टपकने की एक बड़ी वजह मानते हैं।
नींद में नाक से सांस ले पाने पर लार टपकने की समस्या कम हो सकती है। इसलिए नाक की रुकावट का इलाज कराना अहम है। अगर यह परेशानी लंबे समय से बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
स्लीप एपनिया का संकेत भी हो सकता है
अगर लार टपकने के साथ तेज खर्राटे आते हैं, रात में बार-बार नींद खुलती है या सुबह उठकर भी थकान रहती है, तो यह नींद से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है। इसे स्लीप एपनिया कहते हैं। इसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है या सांस का रास्ता कुछ देर के लिए बंद हो जाता है।
चिकित्सकों के अनुसार स्लीप एपनिया में व्यक्ति ज्यादा हवा पाने के लिए मुंह से सांस लेने लगता है, जिससे लार जमा होकर बाहर निकल जाती है। गंभीर मामलों में सांस रात में सैकड़ों बार रुक सकती है।
इस बीमारी का सबसे बड़ा खतरा यह है कि कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें यह है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के अनुसार अमेरिका में करीब 2.35 करोड़ लोग स्लीप एपनिया से पीड़ित होने के बावजूद उसकी जांच से दूर हैं। घर के लोग अगर बताएं कि आप तेज खर्राटे लेते हैं, या आप अक्सर मुंह सूखा हुआ या तकिया गीला पाकर उठते हैं, तो इसे गंभीरता से लें।
दांत पीसने से भी जुड़ाव
नींद में दांत पीसने (ब्रक्सिज्म) के साथ भी अक्सर लार टपकती है। इसकी एक वजह यह है कि इसमें भी मुंह से सांस लेने की प्रवृत्ति देखी जाती है। खर्राटे, बेचैन नींद और कम सोना इसके आम जोखिम कारक बताए गए हैं।
क्या करें, क्या न करें
- सामान्य मामलों में कुछ आदतें मददगार हो सकती हैं
- नाक की रुकावट का समय पर इलाज कराएं।
- पीठ के बल सोने की कोशिश करें। इसके लिए थोड़ा सख्त या सहारा देने वाला तकिया उपयोगी हो सकता है।
- पर्याप्त पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी या खुले मुंह से सोने पर लार ग्रंथियां ज्यादा लार बना सकती हैं।
रात को भारी खाना खाकर तुरंत न लेटें। इससे एसिड रिफ्लक्स बढ़ सकता है, जो लार टपकने की एक वजह बन सकता है।
सोशल मीडिया पर मुंह पर टेप लगाकर सोने जैसे नुस्खे भी चर्चा में रहते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके फायदे अभी साबित नहीं हैं और खासकर स्लीप एपनिया के मरीजों के लिए नुकसान हो सकते हैं,इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसे प्रयोग से बचना चाहिए।
कब दिखाएं डॉक्टर को
कभी-कभार नींद में लार निकलना सामान्य माना जाता है। लेकिन इन स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
- लार लगातार रोज निकल रही हो।
- निगलने में परेशानी हो।
- बार-बार खांसी आती हो।
- तेज खर्राटे, रात में बार-बार नींद खुलना या दिन भर थकान जैसे लक्षण साथ हों।
- यह समस्या हाल में शुरू हुई हो और हर रात तकिया भीग रहा हो।
- किसी भी चिंता की स्थिति में कान-नाक-गला (ईएनटी) विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। वे जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी की सलाह दे सकते हैं।
इन लक्षणों में तुरंत लें इमरजेंसी मदद
अगर अचानक चेहरे का एक हिस्सा लटकने लगे, बोलने में परेशानी हो या शरीर के एक तरफ कमजोरी महसूस हो, तो देर न करें। ये लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
नींद में लार का निकलना ज्यादातर मामलों में नुकसानदेह नहीं होता और अक्सर सोने की मुद्रा या मुंह से सांस लेने से जुड़ा होता है। लेकिन अगर यह लगातार हो रहा है या इसके साथ खर्राटे, थकान और सांस की दिक्कत है, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं। समय पर जांच से स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं का पता चल सकता है और इलाज भी आसान हो जाता है।
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