गुजरात चुनाव में भी सुनाई देगी AIMIM की आवाज, नए साथी के साथ मिलकर बनाई नई रणनीति

AIMIM ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इस हलचल की वजह गुजरात निकाय चुनाव है, जिसमें AIMIM ने उतरने का ऐलान कर दिया है। केवल इतना ही नहीं, इस चुनाव को लड़ने के लिए AIMIM ने साथी भी खोज निकाला है। वह यह चुनाव भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के साथ मिलकर लड़ेगी। इस गठबंधन के साथ ही ओवैसी ने सूबे के मुस्लिम और आदिवासी वोटबैंक पर बड़ा डाका डाला है। AIMIM के फैसले ने कांग्रेस की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

AIMIM बीटीपी के साथ मिलकर लगे आगामी चुनाव

बताया जाता है कि गुजरात में आदिवासी और मुस्लिम वोट बैंक कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी इसी वोट बैंक के बलबूते पर गुजरात में अब की  सबसे बड़ी जीत हासिल की थी, उस वक्त उन्होंने 144 सीटें जीतकर मुख्यमंत्री का पद हासिल किया था।

बताया जाता है कि माधवसिंह सोलंकी ने उस चुनाव में KHAM थ्योरी बनाई थी। KHAM में K मतलब क्षत्रिय, H मतलब हरिजन, A मतलब आदिवासी और M मतलब मुस्लिम यानी सोलंकी के विधानसभा की 182 में से 144 सीट जीतने के रिकॉर्ड को आज तक कोई भी मुख्यमंत्री नहीं तोड़ पाया है।

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अब ऐसी ही रणनीति के तहत बीटीपी तथा AIMIM ने आगामी गुजरात चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इस बारे में जानकारी देते हुए बीटीपी के अध्यक्ष छोटू भाई वसावा ने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस पार्टी ने धोखा देने के लिए यह गठबंधन जरूरी है। वहीं, AIMIM नेता इम्तियाज़ ज़लील ने कहा कि BTP और AIMIM का एक साथ रहना गुजरात के लोगों की आवाज़ होगी।

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