Tanvi Patri Story: यूथ ओलंपिक में छाईं 15 साल की बैडमिंटन स्टार तन्वी पात्री, जानें उनकी दिलचस्प कहानी

Tanvi Patri Story: भारत की युवा बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी पात्री ने यूथ ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन कर दिया है। मात्र 15 साल की उम्र में तन्वी ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के महिला सिंगल्स के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है और देश के लिए मेडल पक्का कर लिया है। इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे उनकी और उनके परिवार की कड़ा संघर्ष और त्याग की कहानी जुड़ी है।

सेनेगल के डकार में खेले गए रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में तन्वी ने जापान की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी युजुनो वातानाबे को 21-14, 11-21, 21-19 से शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही वह यूथ ओलंपिक में बैडमिंटन का मेडल पक्का करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं।

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बेटी के सपनों के लिए पिता ने छोड़ी लाखों की नौकरी

ओडिशा के बालासोर में जन्मी तन्वी का बैडमिंटन से जुड़ाव चीन में हुआ था। उनके पिता रबिनारायण चीन में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल कार्यरत थे और उनकी मासिक सैलरी करीब 5 से 6 लाख रुपए थी। खुद बैडमिंटन के शौकीन रहे रबिनारायण ने जब 7 साल की तन्वी को कोर्ट पर रुचि लेते देखा, तो उन्होंने उसके खेल को निखारने का फैसला किया। बेटी के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अपनी मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़ दी।

तन्वी ने चीन में रहकर वहां के दिग्गज कोचों झांग लेई, श्यू शू और वू यु से खेल की बारीकियां सीखीं। पिता के अनुसार, चीन का मजबूत बैडमिंटन इंफ्रास्ट्रक्चर तन्वी के शुरुआती विकास में बहुत मददगार साबित हुआ।

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तन्वी अपने पिता (व्हाइट शर्ट), मां और चीन के 2 कोच साथ।

कोविड के दौरान भारत वापसी और संघर्ष

साल 2020 में कोविड महामारी के दौरान रबिनारायण अपने परिवार के साथ भारत लौट आए, हालांकि उन्होंने भारत से ही चीन की कंपनी के लिए काम जारी रखा। भारत आने के बाद तन्वी ने भुवनेश्वर की उड़ान अकादमी में अभ्यास शुरू किया। कोविड के उस दौर में जब कई जगह ट्रेनिंग बंद थी, तब तन्वी को वहां सीनियर और ज्यादातर पुरुष खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनमोल मौका मिला, जिससे उनके खेल का स्तर तेजी से सुधरा। इसके बाद पिता ने खुद प्राइवेट कोर्ट पर उनके साथ पसीना बहाया और तकनीक को मजबूत किया। वर्तमान में तन्वी बेंगलुरु के ‘सेंटर फॉर बैडमिंटन एक्सीलेंस’ (CBE) में विमल कुमार, सागर और भास्कर जैसे कोचों की देखरेख में ट्रेनिंग ले रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां

तन्वी पात्री ने कम उम्र में ही कई बड़े खिताब अपने नाम किए हैं:

  • यूथ ओलंपिक में बैडमिंटन मेडल पक्का करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी।
  • यूथ ओलंपिक में मेडल जीतने वाली कुल तीसरी भारतीय खिलाड़ी।
  • एशियन अंडर-15 चैंपियन (2024)।
  • एशियन अंडर-17 चैंपियन (2026)।
  • दोनों कॉन्टिनेंटल जूनियर खिताब जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी।
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तन्वी ने इसी साल U-17 एशियन टाइटल जीता था।

खेल पर आने वाला भारी-भरकम खर्च

इंटरनेशनल सर्किट में खेलना आसान नहीं होता। मीडिया रिपोर्ट्स और परिजनों के मुताबिक, विदेश यात्रा, ट्रेनिंग, होटल और टूर्नामेंट के खर्चों को मिलाकर सालाना 30 से 40 लाख रुपए तक की जरूरत पड़ती है। वर्तमान में तन्वी को ओडिशा सरकार, ओक्यू और गेल इंडिया से कुछ सहायता मिलती है, लेकिन अधिकांश खर्च परिवार को खुद ही उठाना पड़ता है। इसके अलावा, खेल के उपकरणों (जैसे शटल बैरल और रैकेट) की कीमतें भी काफी बढ़ चुकी हैं।

तन्वी वर्तमान में भुवनेश्वर के ओटम ग्लोबल स्कूल में 10वीं कक्षा की छात्रा हैं। उनके पिता का मानना है कि यूथ ओलंपिक का यह मेडल अभी सफर की सिर्फ एक शुरुआत है, और उनका असली लक्ष्य भविष्य में सीनियर सर्किट और वैश्विक पटल पर देश का परचम लहराना है।

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