हलवाइयों और कारीगरों को मिलेगा बड़ा मंच, सीएम योगी बोले- ‘यूपी के व्यंजन बनेंगे ग्लोबल ब्रांड’

  • ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच से घरों में बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों को मिलेगा बाजार: मुख्यमंत्री

 लखनऊ। प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों और उनसे जुड़े कारीगरों को पहचान दिलाने के लिए ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना का विस्तार तहसील, ब्लॉक, गांव और कस्बे स्तर तक किया जाएगा। इससे स्थानीय व्यंजनों को बाजार और ब्रांडिंग मिलेगी, साथ ही हलवाई, कारीगर और घरों में पारंपरिक पाक कला को आगे बढ़ाने वाले परिवार रोजगार और कमाई के नए मौकों से जुड़ सकेंगे। प्रदेश सरकार इस क्षेत्र की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता भी मुहैया करा रही है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही।

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सीएम ने यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक मीडिया समूह के ‘एक जनपद, एक व्यंजन’ कार्यक्रम में शिरकत की और योजना से जुड़े आठ कुशल कारीगरों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। ये सम्मान पाने वालों में जगदीश यादव, संदीप कुमार, राकेश कुमार, ब्रजेश कश्यप, बलराम गुप्ता, नीलू कुमार, शिवानी मवई और श्रवण लाल  शामिल रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए  मुख्यमंत्री ने कहा, इस मंच के जरिए प्रदेश के अलग-अलग जनपदों के कारीगरों, हलवाई परिवारों और उनके पारंपरिक व्यंजनों को पहचान मिल रही है।

75 जिलों के खास व्यंजनों को पहचान दिलाने की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि, वर्ष 2017 में प्रदेश के पारंपरिक उद्यमों को खेती से जोड़कर आर्थिक ताकत बनाने की दिशा में काम शुरू हुआ। इसी सोच के साथ 2018 में ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना की शुरुआत की गई। पहले 75 में से 58 जिलों में खास उत्पादों की पहचान हुई थी। अब सभी 75 जनपदों के एक-एक विशेष उत्पाद को तकनीक, बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ा गया है। इस योजना के जरिए प्रदेश से लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात हो रहा है। प्रदेश के करीब 80 उत्पादों को जीआई टैग भी मिल चुका है।

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उन्होंने आगे कहा कि, अलग-अलग जिलों में खान-पान और स्वाद की अपनी खास परंपरा है। बीते तीन-चार वर्षों में इन व्यंजनों की पहचान के लिए सर्वे कराया गया। उसी के आधार पर ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना शुरू हुई। पिछले साल केंद्रीय गृह मंत्री के हाथों इसका शुभारंभ हुआ था। अब इसे और व्यापक बनाकर तहसील, ब्लॉक, गांव और कस्बे स्तर तक पहुंचाने की तैयारी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा स्थानीय व्यंजनों और कारीगरों को मंच मिल सके।

 हुनर को मिल रहा मंच

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों में वैश्विक बाजार तक पहुंचने का सामर्थ्य है। बलिया का बाटी-चोखा, जौनपुर की इमरती और अलग-अलग जिलों के खास पकवान इसकी मिसाल हैं। घरों में अपनी माताओं, बहनों, दादियों और नानियों से सीखी गई पाक कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती आई है। इस हुनर को सही मंच, पैकेजिंग, तकनीक और बाजार से जोड़कर बड़े कारोबार में बदला जा सकता है।

बच्चियों को मंच पर बुलाकर भावुक हुए मुख्यमंत्री

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक बच्ची का जिक्र किया, जो अपनी मां के हाथों बनी मूंग दाल की नमकीन का पैकेट लेकर उनसे मिली थी। बच्ची ने उत्साह के साथ मुख्यमंत्री को यह नमकीन भेंट की और बताया कि उसकी मां इसे घर पर बनाती और बेचती हैं। इस वाकये का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भावुक हो उठे। उन्होंने उस बच्ची और उसके साथ मौजूद दूसरी बच्ची को मंच पर बुलाया और उनके जोश की तारीफ की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घरों में बनने वाले ऐसे उत्पादों को अच्छी पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जोड़ दिया जाए तो वे बड़े बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। उन्होंने संबंधित विभाग और आयोजक संस्था से ऐसे कारीगरों और परिवारों का हौसला बढ़ाने की अपील की।

कारीगरों को 5 से 20 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री ने कहा कि, प्रदेश सरकार ने पारंपरिक कारीगरों, हलवाइयों और ऐसे परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना लागू की है। इसके तहत पात्र लोगों को शुरुआत में 5 लाख तक का ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त कर्ज देने की व्यवस्था है। साथ ही सब्सिडी का भी प्रावधान है। योजना में मदद की रकम को बढ़ाकर 7.5 लाख और 10 लाख रुपए तक, जबकि बड़े कारोबार के लिए 20 लाख रुपये तक की सुविधा देने का इंतजाम किया गया है।

उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति और हुनर रखने वाले परिवार, महिलाएं और स्वयं सहायता समूह इस माध्यम से अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं। प्रदेश में इतना बड़ा बाजार मौजूद है कि स्थानीय व्यंजनों और खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा किया जा सकता है। उन्होंने बुलंदशहर की ‘अचार वाली दीदी’ का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने 500 रुपए उधार लेकर अचार बनाने का काम शुरू किया और आज 500 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।

शुद्धता और गुणवत्ता से ही बनेगी व्यंजनों की पहचान

मुख्यमंत्री ने कारीगरों और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों से शुद्धता और गुणवत्ता कायम रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि, कारोबार की सबसे पहली शर्त शुद्धता है। ज्यादा मुनाफे के लिए मिलावट या शॉर्टकट अपनाने से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है और पारंपरिक पाक कला की साख पर भी आंच आती है। गुणवत्ता बनी रही तो देश-दुनिया के हर बाजार में इन उत्पादों की मांग बढ़ेगी।

उन्होंने भारतीय परंपरा में अन्न के सम्मान और तरह-तरह के व्यंजनों की समृद्ध विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ स्थानीय हुनर को सम्मान देने और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच को आगे बढ़ाने का जरिया है। जापान के ‘वन विलेज वन प्रोडक्ट’ मॉडल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को खास पहचान और बाजार से जोड़कर गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

इस खास मौके पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार अवनीश अवस्थी, विभिन्न जनपदों के कारीगर, कारोबारी, मीडियाकर्मी और अन्य गणमान्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

 

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