
वॉशिंगटन। अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर को हो रहे मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है। सत्ताधारी रिपब्लिकन और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी, दोनों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। यह चुनाव वॉशिंगटन में सत्ता का संतुलन तय करेगा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अगले दो वर्षों की दिशा भी बदल सकता है।
इसे भी पढ़ें- मध्यावधि चुनाव में हारे, तो ईरान पर फूट सकता है ट्रंप का गुस्सा? अमेरिकी रिपोर्ट्स से मचा हड़कंप
चुनाव से ठीक पहले आए ताजा सर्वेक्षण ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए बहुत उत्साहजनक नहीं हैं। कई सर्वे ‘ब्लू वेव’ यानी डेमोक्रेटिक पार्टी की लहर की संभावना जता रहे हैं।

ऐसा हुआ तो कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हो सकता है। हालांकि, कई विशेषज्ञों ने चेताया है कि, सर्वेक्षण तस्वीर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सकते हैं। इसी वजह से रिपब्लिकन खेमे को उम्मीद है कि, असली नतीजे सर्वे के अनुमानों से अलग कहानी बयां करेंगे।
नतीजों के लिए करना पड़ सकता है इंतजार
मतदान मंगलवार को होगा और शुरुआती रुझान उसी शाम से आने शुरू होने की उम्मीद है। कांग्रेस में सत्ता के संतुलन की शुरुआती तस्वीर बुधवार तड़के या सुबह तक सामने आ सकती है, लेकिन जिन राज्यों में मुकाबला बेहद कड़ा है। वहां नतीजे आने में कई दिन लग सकते हैं। खासकर उन राज्यों में, जहां डाक से भेजे गए मतपत्रों (मेल-इन बैलेट) की गिनती में ज्यादा समय लगता है। ऐसे में कुछ सीटों पर अंतिम तस्वीर साफ होने तक सस्पेंस बना रह सकता है।
संभावित हार से निपटने की तैयारी में ट्रंप?
सर्वेक्षणों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात के लिए तैयारी शुरू कर दी है कि, कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हो सकता है। सोमवार को उन्होंने कहा कि वे अरबपति कारोबारी एलन मस्क और अपने प्रशासन के सदस्यों को डेमोक्रेट्स की संभावित जांच से बचाने के लिए तैयार रहेंगे। उन्होंने अपने सहयोगियों को राष्ट्रपति की ओर से माफी (पार्डन) दिए जाने की संभावना का भी जिक्र किया।

ट्रंप के ये बयान ऐसे समय आए हैं, जब डेमोक्रेट्स ने साफ संकेत दिया है कि, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर नियंत्रण मिलने की स्थिति में वे ट्रंप प्रशासन से जुड़े कारोबारी लोगों के खिलाफ जांच शुरू करेंगे। उनके संभावित निशानों में मस्क भी हैं, जिन्होंने ट्रंप प्रशासन के सरकारी खर्च में कटौती के अभियान में भूमिका निभाई थी। मस्क ने रिपब्लिकन चुनाव अभियानों में भी भारी रकम लगाई थी। ऐसे में राष्ट्रपति के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में संभावित नतीजों को लेकर उनकी चिंता के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों अहम हैं मध्यावधि चुनाव
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इनमें नागरिक कई तरह के संघीय और राज्य स्तरीय पदों के लिए अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। इनमें विधायिका के सदस्यों के साथ गवर्नर और अटॉर्नी जनरल जैसे पद भी शामिल हैं। इन्हें अक्सर राष्ट्रपति के कामकाज पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) की तरह देखा जाता है, क्योंकि मतदाता इसी बहाने सरकार के प्रदर्शन पर अपनी राय जाहिर करते हैं।
सबसे ज्यादा निगाहें कांग्रेस के दोनों सदनों, यानी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर हैं। अगर राष्ट्रपति की पार्टी का दोनों सदनों में बहुमत हो, तो उसके लिए कानून बनाना और नई नीतियां लागू करना अपेक्षाकृत आसान रहता है। लेकिन विपक्ष को नियंत्रण मिल जाए, तो राष्ट्रपति की काम करने की क्षमता सीमित हो सकती है। वे राजनीतिक रूप से कमजोर भी पड़ सकते हैं, क्योंकि विपक्ष विधेयकों को रोकने के साथ-साथ प्रशासन की जांच भी कर सकता है।
किसके पास कितनी ताकत
सीनेट कांग्रेस का उच्च सदन है, जिसमें 100 सीटें होती हैं। राष्ट्रपति की ओर से की गई अहम नियुक्तियों, जैसे कैबिनेट सचिव, राजदूत और न्यायाधीश, की पुष्टि इसी सदन की जिम्मेदारी है। महाभियोग के बाद राष्ट्रपति को पद से हटाने का फैसला भी सीनेट ही करती है। सीनेटरों का कार्यकाल छह साल का होता है और हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सदस्यों के लिए चुनाव होते हैं।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स निचला सदन है, जिसमें 435 वोटिंग सदस्य होते हैं। इन सभी को हर दो साल में दोबारा चुनाव का सामना करना पड़ता है। रिपब्लिकन पार्टी इस चुनाव में दोनों सदनों पर नियंत्रण के साथ उतर रही है। हाउस में उसके पास 218 सीटों का मामूली बहुमत है, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं। सीनेट में रिपब्लिकन का 53-47 का बहुमत है। हाउस में बहुमत का यह अंतर बेहद कम है, इसलिए कुछ सीटों का इधर-उधर होना भी सत्ता का समीकरण बदल सकता है।
सात अहम राज्यों में डेमोक्रेट्स आगे
चुनाव से ठीक पहले सोमवार को जारी न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना कॉलेज के ताजा पोल में सीनेट की अहम सीटों वाले सभी सात राज्यों में डेमोक्रेट्स आगे बताए गए हैं। ये राज्य हैं: मिशिगन, टेक्सास, मेन, कंसास, ओहियो, अलास्का और आयोवा। ये आंकड़े डेमोक्रेट्स के लिए काफी उत्साहजनक माने जा रहे हैं। हालांकि सर्वे सिर्फ रुझान दिखाते हैं, नतीजे नहीं। असली फैसला मतदाताओं के हाथ में है और अंतिम तस्वीर मतगणना के बाद ही साफ होगी।
नतीजों पर नजर
फिलहाल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स, दोनों खेमे अपने-अपने पक्ष में नतीजों की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सर्वे डेमोक्रेट्स के पक्ष में हवा का रुख दिखा रहे हैं, पर विशेषज्ञों की चेतावनी और कड़े मुकाबले वाली सीटों की गिनती में देरी की आशंका बताती है कि तस्वीर पूरी तरह साफ होने में समय लग सकता है। जो भी नतीजा आएगा, उसका असर ट्रंप की नीतियों, उनके प्रशासन के कामकाज और अमेरिकी राजनीति की आगे की दिशा पर पड़ना तय है।
इसे भी पढ़ें- ट्रंप का नया कानून: भारत पर 100% टैरिफ की तलवार, रूसी तेल खरीद बनी वजह



