पोस्टर वॉर पर ब्रेक: अमित शाह की बैठक से पहले भाजपा ने नेताओं को दिया ‘पार्टी पहले’ का मंत्र

लखनऊ। उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की अहम बैठक शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित हो रही है। इस बैठक को लेकर पार्टी ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो सूबे की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है। संगठन ने तय किया है कि आयोजन स्थल और शहर में नेताओं के व्यक्तिगत होर्डिंग, पोस्टर और बैनर नहीं लगाए जाएंगे। पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि, इस बार मंच पर चेहरे नहीं, बल्कि संगठन की एकजुटता और योगी सरकार का कामकाज दिखाई देना चाहिए।

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तावड़े की मंशा पर अमल

पार्टी के इस निर्णय को राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े की उस मंशा का विस्तार माना जा रहा है, जिसे वे कुछ समय पहले ही सार्वजनिक रूप से जता चुके थे। तावड़े ने प्रदेश के नेताओं और कार्यकर्ताओं से साफ कहा था कि पार्टी कार्यक्रमों में बैनर-पोस्टर के जरिए प्रचार से बचा जाए और भव्य स्वागत-सत्कार जैसी परंपराओं से दूरी बनाई जाए। उनका जोर इस बात पर था कि समय और ऊर्जा चुनावी तैयारी और संगठन को मजबूत करने में लगाई जाए।

Amit Shah Lucknow

कार्यसमिति की इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विनोद तावड़े के साथ पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। माना जा रहा है कि, बैठक में भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपनी औपचारिक चुनावी रणनीति का खाका पेश करेगी। ऐसे में पार्टी नहीं चाहती कि, किसी भी तरह की अनावश्यक होड़ या प्रदर्शन से बैठक के मूल राजनीतिक उद्देश्य से ध्यान भटके।

सिर्फ झंडे और उपलब्धियों वाले बैनर

पार्टी ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वे केवल भाजपा के झंडे और सरकार की उपलब्धियां दर्शाने वाले बैनर ही लगाएं। जानकारी के मुताबिक, बैठक स्थल और उसके आसपास ऐसे बैनर लगाए जाएंगे, जिन पर ‘विकास लगातार, एनडीए सरकार’ और ‘गुंडों पर प्रहार, एनडीए सरकार’ जैसे नारे लिखे होंगे। ये बैनर मुख्य रूप से योगी सरकार के कामकाज और उपलब्धियों को रेखांकित करेंगे।

पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि, इससे यह संदेश जाएगा कि यह बैठक किसी एक नेता या गुट की ताकत दिखाने का मंच नहीं, बल्कि पूरे संगठन की सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन है। साथ ही, सरकार की उपलब्धियों को केंद्र में रखकर जनता के बीच भी सकारात्मक संदेश देने की कोशिश है।

हैसियत दिखाने की होड़ पर विराम

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि, अब तक नेता अपने व्यक्तिगत होर्डिंग का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक हैसियत जताने, शीर्ष नेतृत्व से निकटता का संकेत देने और संगठन के भीतर नेताओं-कार्यकर्ताओं का ध्यान खींचने के लिए करते रहे हैं। बड़े आयोजनों से पहले शहर की सड़कों और चौराहों पर पोस्टरों की भरमार इसी होड़ का नतीजा होती थी।

Amit Shah Lucknow

यूपी भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, इस तरह के प्रदर्शन पर रोक लगने से पार्टी नेतृत्व को नेताओं के बीच वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा थामने में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि, बैठक का मुख्य राजनीतिक उद्देश्य, यानी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती, किसी भी सूरत में पीछे नहीं छूटना चाहिए।

परंपरा से हटकर फैसला

भाजपा का यह निर्णय उसकी पुरानी कार्यशैली से अलग माना जा रहा है। अब तक पार्टी कार्यकर्ता अपने नेताओं के आगमन पर जोरदार स्वागत, स्वागत द्वार और पोस्टरों की श्रृंखला लगाने के लिए जाने जाते रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, तावड़े को इस तरह का स्वागत-सत्कार पसंद नहीं आया और उन्होंने कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे अपना पूरा ध्यान पार्टी की एकजुटता पर केंद्रित करें।

Amit Shah Lucknow

उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि कार्यकर्ताओं के लिए मंत्र यह है कि पार्टी को सबसे आगे रखें और अपनी व्यक्तिगत पहचान को पीछे रखें। उनके इस बयान को संगठन के उसी संदेश की पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें ‘व्यक्ति से बड़ा दल, दल से बड़ा देश’ की भावना को प्राथमिकता दी गई है।

तैयारियों की कमान शुक्ला को

बैठक की तैयारियों की देखरेख का जिम्मा पूर्व प्रदेश महासचिव गोविंद नारायण शुक्ला को सौंपा गया है। बताया जा रहा है कि, व्यवस्थाओं से लेकर आयोजन स्थल की साज-सज्जा तक, सभी बिंदुओं पर पार्टी के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है, ताकि कहीं से भी अनुशासन की अनदेखी का संदेश न जाए।

चुनावी रणनीति पर नजरें

विधानसभा चुनाव नजदीक आते देख भाजपा संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने में जुटी है। कार्यसमिति की बैठक में बूथ स्तर तक की तैयारियों, जनसंपर्क अभियान, सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने और विपक्ष के हमलों का जवाब देने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। अमित शाह के संबोधन पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि माना जा रहा है कि वे कार्यकर्ताओं को चुनावी जीत का मंत्र देंगे।

पोस्टर वॉर पर रोक लगाकर भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में अनुशासन और सामूहिकता ही संगठन की कसौटी होगी। अब देखना यह होगा कि यह निर्देश जमीन पर कितना असर दिखाता है और क्या नेता व्यक्तिगत प्रचार का मोह छोड़कर वास्तव में संगठन के हित को सर्वोपरि रख पाते हैं।

 

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