इजरायल चुनाव: बहुमत से दूर नेतन्याहू, बोले- ‘ईरानी खतरा खत्म करना होगा’

लिकुड सबसे बड़ी पार्टी, पर गठबंधन 53 सीटों पर अटका, विपक्ष भी दूर

तेल अवीव। इजरायल के संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर रह गया है। 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए, जबकि उनके गठबंधन को सिर्फ 53 सीटें मिली हैं। सौ फीसदी मतगणना पूरी होने के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने ‘एक मजबूत दक्षिणपंथी सरकार’ बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने ईरान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि, उनका मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके बाद सियासी गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि, क्या नेतन्याहू जनादेश के बावजूद सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं। क्या वह ईरान के बहाने जनता के उस फैसले से बचना चाहते हैं जो उनके पक्ष में नहीं गया।

इसे भी पढ़ें- ईरानी सेना की बढ़ती ताकत देख उड़े इजरायल के होश, मिसाइलों की संख्या में हुई जबर्दस्त बढ़ोतरी

किसे कितनी सीटें

  • लिकुड पार्टी: 27 सीटें, सबसे बड़ी पार्टी
  • नेतन्याहू का गठबंधन: 53 सीटें
  • विपक्षी नेता आइजनकोट का गुट: 48 सीटें
  • अरब पार्टियां: 19 सीटें, अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा

न सत्ता पक्ष के पास बहुमत, न विपक्ष के पास

लिकुड ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर अपनी ताकत तो दिखाई है, लेकिन सहयोगी दलों को मिलाकर भी वह बहुमत से आठ सीट पीछे है। दूसरी ओर विपक्षी नेता आइजनकोट का गुट 48 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर है और वह भी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।

Israeli Elections

अरब दलों की 19 सीटें अब निर्णायक भूमिका में दिख रही हैं, लेकिन विपक्षी खेमा उनके समर्थन से सरकार बनाने से साफ इनकार कर चुका है। यानी जनादेश ऐसा बंटा हुआ आया है कि, किसी एक खेमे के लिए अकेले सरकार बनाना आसान नहीं दिखता। ऐसे में दोनों खेमों के सामने जोड़-तोड़ की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

ईरान के झंडे पर इजराइल का विनाश

समर्थकों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा, जब तक वह कट्टरपंथी शासन (ईरान) मौजूद है और उसके झंडे पर इजरायल का विनाश लिखा है, तब तक मेरा मिशन पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने चेताया कि, ईरान फिर से इजरायल को खत्म करने की कोशिश करेगा। साथ ही कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर इस खतरे को जड़ से मिटाना इजरायल के बस में है। भाषण के दौरान उन्होंने एक गीत भी सुनाया, जिसके बोल थे, ‘कौन नहीं डरेगा, कौन नहीं डरेगा… दोस्तों, ये तो बस शुरुआत है।’ अंतिम नतीजों को लेकर उन्होंने कहा कि ईश्वर ने चाहा तो वे एक-दो दिन में आ जाएंगे। आलोचकों का कहना है कि, नेतन्याहू ने अपने पूरे संबोधन में सरकार बनाने के गणित से ज्यादा सुरक्षा और ईरान के मुद्दे पर जोर दिया।

न्यूज चैनलों पर प्रोपेगेंडा फ़ैलाने का आरोप

नेतन्याहू ने भाषण में न्यूज चैनलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने समर्थकों से पूछा कि क्या उन्हें याद है कि प्रोपेगेंडा फैलाने वाले चैनलों ने जनता की सोच प्रभावित करने की कोशिश कैसे की। उनका कहना था कि, चैनल दावा कर रहे थे कि, लिकुड को सिर्फ 18-19 सीटें मिलेंगी, जबकि उन्हें शुरू से पता था कि वे झूठ बोल रहे हैं।

Israeli Elections

नेतन्याहू के मुताबिक इसका मकसद समर्थकों का मनोबल तोड़ना था, ताकि वे वोट डालने ही न जाएं। उन्होंने दावा किया कि, यहूदी जनता और यहूदी राष्ट्र के समर्थकों के बीच दक्षिणपंथी खेमे को स्पष्ट बहुमत मिला है। उनके अनुसार लिकुड का सबसे ज्यादा सीटें जीतना “निर्णायक बहुमत” का संकेत है। इसी आधार पर उन्होंने दोहराया कि देश में मजबूत, राष्ट्रीय और दक्षिणपंथी सरकार बननी चाहिए।

ये तीन संभावनाएं हैं

चुनाव में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद तीन तस्वीरें उभरती हैं।

अरब दलों के साथ विपक्ष की सरकार

आइजनकोट का गुट अरब दलों के साथ गठबंधन करे तो 48 और 19 सीटें मिलकर आंकड़ा 67 पहुंच जाता है। यह बहुमत से कहीं ज्यादा है, लेकिन विपक्षी ब्लॉक पहले ही अरब दलों के समर्थन से सरकार बनाने से इनकार कर चुका है।

रोटेशन पर प्रधानमंत्री

अगर नेतन्याहू और आइजनकोट राष्ट्रीय एकताके आधार पर सरकार बनाने पर राजी हो जाएं, तो दोनों नेता दो-दो साल के लिए प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

दोबारा चुनाव

अगर कोई भी खेमा सरकार नहीं बना पाया, तो देश में फिर चुनाव कराए जा सकते हैं। इजरायल के लिए यह नई बात नहीं है। 2019 से 2022 के बीच वहां पांच बार संसदीय चुनाव हुए थे। अंत में नेतन्याहू ही सरकार बनाने में कामयाब रहे थे।

क्या कुर्सी छोड़ने से इनकार कर सकते हैं नेतन्याहू?

  • इजरायल की कानूनी व्यवस्था के मुताबिक नेतन्याहू चाहकर भी तानाशाह की तरह पद पर नहीं टिक सकते। नई सरकार के गठन तक वह प्रधानमंत्री बने रहेंगे, लेकिन आगे की प्रक्रिया उनके हाथ में नहीं है।
  • इजरायल के राष्ट्रपति सबसे पहले नेतन्याहू को सरकार बनाने के लिए बुलाएंगे। वह नाकाम रहे तो विपक्षी गुट को न्योता दिया जाएगा।
    दोनों गुट 28 दिन में सरकार नहीं बना सके, तो देश दोबारा चुनाव की ओर बढ़ेगा। संसद खुद-ब-खुद भंग हो जाएगी और तीन महीने के भीतर चुनाव कराने होंगे।
  • विपक्ष सरकार बना ले और नेतन्याहू पद छोड़ने से मना करें, तो अटॉर्नी जनरल और सुप्रीम कोर्ट तुरंत दखल देंगे। सुप्रीम कोर्ट ऐसे कदम को असंवैधानिक करार दे सकता है।
  • पुलिस, सेना और सरकारी मशीनरी संसद और संविधान के प्रति जवाबदेह है, किसी एक नेता के प्रति नहीं। इसलिए वे नए प्रधानमंत्री के आदेश मानेंगे और नेतन्याहू शक्तिहीन हो जाएंगे।

क़ानून के दायरे में दांव आजमाएंगे नेतन्याहू

माना जा रहा है कि नेतन्याहू कानून और संविधान के दायरे में रहकर ही अपने दांव आजमाएंगे। अंतिम नतीजे आने के बाद गठबंधन की जोड़-तोड़ तेज होने के आसार हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि राष्ट्रपति सरकार बनाने का पहला न्योता किसे देते हैं, और क्या इजरायल एक बार फिर चुनावी चक्र की ओर बढ़ेगा।

 

इसे भी पढ़ें- इजरायल-ईरान तनाव: नेतन्याहू ने दी तीसरे हमले की धमकी, गालिबाफ बोले- ‘युद्ध के लिए भी तैयार हैं’

Related Articles

Back to top button